BJP के 2019 के वादों की पड़ताल, पार्ट 2: राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े 66% वादे पूरे; सीमा सुरक्षा पर कैसे चूकी सरकार

BJP के 2019 के वादों की पड़ताल, पार्ट 2: राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े 66% वादे पूरे; सीमा सुरक्षा पर कैसे चूकी सरकार


5
घंटे
पहले
लेखक:
शिवेंद्र
गौरव,
शुभांक
शुक्ला

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ये
BJP
के
साल
2019
के
वादों
की
पड़ताल
की
दूसरी
कड़ी
है…

BJP
ने
2019
के
50
पेज
के
घोषणापत्र
में
राष्ट्रीय
सुरक्षा
और
विदेश
नीति
से
जुड़े
9
प्रमुख
वादे
किए
थे,
जिनमें
से
6
वादे
पूरे
हुए
हैं,
जबकि
3
अधूरे
हैं।
इस
तरह
BJP
का
स्ट्राइक
रेट
करीब
66%
है।
अधूरे
वादों
में
से
दो
वादे
सीमा
सुरक्षा
से
जुड़े
हुए
हैं।
इससे
साफ
है
कि
घुसपैठ
और
सीमा
सुरक्षा
से
जुड़ी
चुनौतियां
अभी
भी
हैं।
इस
रिपोर्ट
में
राष्ट्रीय
सुरक्षा
और
विदेश
नीति
से
जुड़े
सभी
प्रमुख
वादों
की
हालिया
स्थिति
जानेंगे…


वादा-1:
आतंकवाद
पर
जीरो
टॉलरेंस
की
नीति
जारी
रखेंगे

देश
से
आतंकवाद
को
खत्म
करने
के
लिए
जीरो
टॉलरेंस
के
अपने
वादे
पर
BJP
खरी
उतरी
है।

  • गृह
    मंत्रालय
    ने
    19
    दिसंबर
    2023
    को
    जम्मू-कश्मीर
    से
    जुड़ा
    डेटा
    जारी
    करके
    बताया
    था
    कि
    आतंकवाद
    पर
    जीरो
    टॉलरेंस
    की
    नीति
    से
    आतंकी
    घटनाएं
    कम
    हुई
    हैं।
    साल
    2018
    में
    228
    आतंकी
    घटनाएं
    हुई
    थीं,
    जो
    2023
    में
    घटकर
    43
    हो
    गईं।
  • इसी
    तरह
    जम्मू-कश्मीर
    में
    आतंकियों
    के
    साथ
    होने
    वाले
    एनकाउंटर
    में
    कमी
    आई
    है।
    साल
    2018
    में
    इनकी
    संख्या
    189
    थी,
    जो
    2023
    में
    घटकर
    48
    हो
    गई।
  • हालांकि,
    अभी
    भी
    जम्मू-कश्मीर
    में
    आतंकी
    घटनाओं
    या
    आतंकवादियों
    से
    मुठभेड़
    की
    खबरें
    आती
    रहती
    हैं,
    लेकिन
    BJP
    ने
    देश
    और
    देश
    के
    बाहर
    आतंकवाद
    से
    जुड़ी
    किसी
    भी
    तरह
    की
    घटना
    पर
    अपना
    रुख
    जीरो
    टॉलरेंस
    का
    रखा
    है।


वादा-2:
रक्षा
उपकरणों
की
खरीद
तेज
करेंगे

BJP
ने
हथियारों
की
खरीद
तेज
करने
का
अपना
वादा
पूरा
किया
है।
मेक
इन
इंडिया
पॉलिसी
के
तहत
निगेटिव
इम्पोर्ट
(विदेशों
से
हथियारों
की
खरीद
कम
करना)
की
लिस्ट
में
इजाफा
हुआ
है,
लेकिन
आंकड़े
बताते
हैं
कि
भारत
अभी
भी
बड़ी
तादाद
में
विदेशी
हथियारों
की
खरीद
करता
है।

  • केंद्र
    ने
    साल
    2014-17
    और
    2017-22
    के
    बीच
    सैन्य
    उपकरणों
    की
    खरीद
    को
    लेकर
    दो
    डेटा
    जारी
    किए
    हैं।
  • फरवरी
    2023
    में
    लोकसभा
    में
    रक्षा
    राज्य
    मंत्री
    अजय
    भट्ट
    ने
    बताया
    कि
    साल
    2017
    से
    2022
    के
    बीच
    1.93
    लाख
    करोड़
    रुपए
    के
    सैन्य
    उपकरण
    विदेशों
    से
    खरीदे
    गए।
    भारत
    की
    कंपनियों
    से
    कितने
    रुपए
    के
    उपकरण
    खरीदे
    गए,
    इसकी
    जानकारी
    नहीं
    दी
    गई।
  • वहीं,
    साल
    2014
    से
    2017
    के
    बीच
    देश
    और
    विदेश
    से
    2.42
    लाख
    करोड़
    रुपए
    के
    सैन्य
    उपकरण
    खरीदे
    गए
    थे।
  • सरकार
    ने
    डिफेंस
    सेक्टर
    का
    बजट
    भी
    बढ़ाया
    है।
    साल
    2024-25
    के
    लिए
    6.21
    लाख
    करोड़
    रुपए
    का
    बजट
    रखा
    गया
    है,
    जबकि
    साल
    2019-20
    में
    यह
    बजट
    3.18
    लाख
    करोड़
    रुपए
    का
    था।


वादा-
3:
सभी
सीमाओं
पर
अवैध
घुसपैठ
रोकने
के
लिए
स्मार्ट
फेंसिंग
करेंगे

BJP
का
यह
वादा
अभी
अधूरा
है।

  • भारत
    की
    जमीनी
    सीमाएं
    7
    देशों
    से
    लगती
    हैं।
    इनमें
    अफगानिस्तान,
    पाकिस्तान,
    भूटान
    ,नेपाल,
    चीन,
    म्यांमार
    और
    बांग्लादेश
    शामिल
    हैं।
    भारत
    इन
    देशों
    के
    साथ
    कुल
    15,106.7
    किलोमीटर
    की
    जमीनी
    सीमा
    साझा
    करता
    है।
  • केंद्र
    सरकार
    ने
    पहली
    बार
    साल
    2018
    में
    भारत-पाकिस्तान
    सीमा
    पर
    स्मार्ट
    फेंसिंग
    का
    काम
    शुरू
    किया
    था।
  • इसके
    बाद
    जनवरी
    2024
    में
    भारत-म्यांमार
    सीमा
    पर
    भी
    स्मार्ट
    फेंसिंग
    का
    काम
    शुरू
    हुआ,
    लेकिन
    कुल
    जमीनी
    सीमा
    में
    से
    अब
    तक
    केवल
    5223
    किलोमीटर
    पर
    ही
    बाड़ेबंदी
    का
    काम
    पूरा
    हुआ
    है।


वादा-
4:
वामपंथी
उग्रवाद
को
कम
करने
के
लिए
सख्त
कदम

देश
में
वामपंथी
उग्रवाद
प्रभावित
जिलों
की
संख्या
घटी
है।
आंकड़े
बताते
हैं
कि
BJP
ने
अपना
ये
वादा
पूरा
किया
है।

  • गृह
    मंत्रालय
    के
    मुताबिक,
    वामपंथी
    उग्रवाद
    से
    प्रभावित
    राज्यों
    में
    विकास
    के
    लिए
    साल
    2018
    से
    2023
    के
    बीच
    4,931
    करोड़
    रुपए
    जारी
    किए
    गए।
    इस
    राशि
    से
    राज्यों
    में
    13,620
    किलोमीटर
    की
    सड़कों
    का
    निर्माण
    किया
    गया।
  • टेलिकॉम
    कनेक्टिविटी
    में
    सुधार
    के
    लिए
    13,823
    टावरों
    की
    मंजूरी
    दी
    गई,
    जिनमें
    से
    3700
    से
    ज्यादा
    टावर
    चालू
    हो
    चुके
    हैं।
  • वामपंथी
    उग्रवाद
    से
    प्रभावित
    जिलों
    में
    4,903
    नए
    डाकघर
    खोले
    गए।
  • 30
    सबसे
    ज्यादा
    वामपंथी
    उग्रवाद
    प्रभावित
    जिलों
    में
    अप्रैल
    2015
    से
    2023
    के
    बीच
    955
    बैंक
    और
    839
    ATM
    खोले
    गए।
  • 23
    फरवरी
    2024
    को
    गृहमंत्री
    अमित
    शाह
    ने
    दावा
    किया
    कि
    देश
    में
    2004-14
    और
    2014-23
    के
    बीच
    वामपंथी
    उग्रवाद
    से
    जुड़ी
    हिंसा
    में
    52%
    और
    मौतों
    की
    संख्या
    में
    69%
    की
    गिरावट
    आई
    है।
    गृह
    मंत्रालय
    के
    मुताबिक,
    उग्रवादी
    घटनाएं
    14,862
    से
    घटकर
    7,128
    हो
    गईं।
    इनसे
    होने
    वाली
    मौतें
    6,035
    से
    घटकर
    1,868
    हो
    गईं।
  • देश
    में
    वामपंथी
    उग्रवाद
    प्रभावित
    जिलों
    की
    संख्या
    घट
    गई
    है।
    10
    राज्यों
    के
    72
    जिलों
    से
    घटकर
    ये
    संख्या
    58
    रह
    गई
    है।


वादा-
5:
2024
तक
14
नए
इंटीग्रेटेड
चेक
पोस्ट
का
निर्माण

इंटीग्रेटेड
चेक
पोस्ट
(ICP)
का
उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय
सीमाओं
पर
बेहतर
सुरक्षा
सुधार
के
साथ-साथ
पड़ोसी
देशों
के
साथ
द्विपक्षीय
व्यापार
और
संबंध
बेहतर
करना
होता
है।
2024
तक
नए
14
ICP
का
BJP
का
वादा
अभी
अधूरा
है।

  • 6
    फरवरी
    2019
    को
    गृह
    मंत्रालय
    ने
    एक
    प्रेस
    रिलीज
    जारी
    कर
    कहा
    कि
    उत्तर
    प्रदेश
    और
    असम
    में
    ICP
    स्थापित
    करने
    को
    मंजूरी
    दे
    दी
    गई
    है।
    इसके
    अलावा
    10
    और
    जगहों
    पर
    ICP
    बनाने
    के
    लिए
    ‘सैद्धांतिक
    रूप
    से’
    मंजूरी
    दी
    गई
    है।
  • 27
    जुलाई
    2022
    को
    गृह
    मंत्रालय
    ने
    एक
    प्रेस
    रिलीज
    जारी
    कर
    बताया
    कि
    देश
    में
    साल
    2012
    से
    2020
    तक
    9
    इंटीग्रेटेड
    चेक
    पोस्ट
    बनाए
    गए
    और
    ये
    अभी
    सक्रिय
    हैं।
  • नवंबर
    2023
    में
    इंडियन
    एक्सप्रेस
    की
    एक
    रिपोर्ट
    के
    मुताबिक,
    साल
    2022-23
    के
    लिए
    गृह
    मंत्रालय
    की
    सालाना
    रिपोर्ट
    में
    बताया
    गया
    कि
    ICP
    शुरू
    करने
    के
    लिए
    केंद्र
    सरकार
    ने
    बांग्लादेश,
    नेपाल
    और
    भूटान
    के
    साथ
    भारत
    की
    जमीनी
    सीमाओं
    पर
    कुल
    14
    जगहों
    की
    पहचान
    की
    है।
    ये
    जगहें
    उत्तर-प्रदेश,
    उत्तराखंड,
    बिहार
    और
    पश्चिम
    बंगाल
    के
    सीमाई
    इलाकों
    में
    हैं।
    इनमें
    से
    कई
    चेक
    पोस्ट्स
    पर
    काम
    लगभग
    पूरा
    हो
    गया
    है,
    वहीं
    कुछ
    चेक
    पोस्ट्स
    का
    काम
    संतोषजनक
    नहीं
    है।
    गृह
    मंत्रालय
    ने
    अपनी
    रिपोर्ट
    में
    ये
    भी
    कहा
    कि
    पश्चिम
    बंगाल
    सरकार
    ने
    अभी
    तक
    सात
    ICP
    के
    लिए
    भूमि
    अधिग्रहण
    की
    प्रक्रिया
    शुरू
    नहीं
    की
    है।
  • ICP
    का
    संचालन
    लैंड
    पोर्ट्स
    अथॉरिटी
    ऑफ
    इंडिया
    (LPAI)
    द्वारा
    किया
    जाता
    है।
    ये
    ऑर्गनाइजेशन
    गृह
    मंत्रालय
    के
    तहत
    आता
    है।
    साल
    2021
    में
    LPAI
    ने
    कहा
    था
    कि
    साल
    2025
    तक
    भारत
    की
    जमीनी
    सीमाओं
    पर
    24
    ICP
    होंगे।


वादा-
6:
बहुपक्षीय
सहयोग
को
बढ़ावा

BJP
ने
अपना
यह
वादा
पूरा
किया
है।

  • संयुक्त
    राष्ट्र,
    G20,
    ब्रिक्स,
    SCO
    जैसे
    मंचों
    पर
    भारत
    ने
    मजबूती
    से
    आतंकवाद
    जैसी
    वैश्विक
    समस्याओं
    को
    लेकर
    आपसी
    सहयोग
    की
    वकालत
    की
    है।
  • नेबरहुड
    फर्स्ट
    जैसी
    पॉलिसी
    के
    तहत
    भारत
    ने
    पड़ोसी
    देशों
    से
    संबंध
    बेहतर
    करने
    की
    कोशिश
    की
    है।
  • साल
    2023
    में
    भारत
    ने
    G-20
    और
    SCO
    (शंघाई
    कॉर्पोरेशन
    ऑर्गनाइजेशन)
    जैसे
    वैश्विक
    मंचों
    की
    अध्यक्षता
    की।
    दिसंबर
    2022
    में
    भारत
    ने
    दूसरी
    बार
    USNC
    की
    मासिक
    अध्यक्षता
    की।
  • बहुपक्षीय
    सहयोग
    को
    बढ़ावा
    देने
    की
    भारत
    की
    कोशिशों
    की
    सराहना
    अंतर्राष्ट्रीय
    मंचों
    पर
    भी
    की
    गई
    है।


वादा-
7:
वैश्विक
मंचों
पर
आतंकवाद
के
खिलाफ
लड़ाई,
अंतर्राष्ट्रीय
आतंकवाद
विरोधी
मंच
बनाने
के
लिए
कार्य

आतंकवाद
के
मुद्दे
पर
दुनिया
भर
के
देशों
को
एक
मंच
पर
लाने
की
BJP
सरकार
की
कोशिश
का
वादा
संतोषजनक
कहा
जा
सकता
है।

  • अंतर्राष्ट्रीय
    स्तर
    पर
    कोई
    नया
    आतंकवाद
    विरोधी
    मंच
    नहीं
    बना
    है,
    हालांकि
    भारत
    का
    रवैया
    वैश्विक
    आतंकवाद
    के
    हर
    स्वरूप
    के
    खिलाफ
    रहा
    है।
  • 2022
    में
    भारत
    ने
    संयुक्त
    राष्ट्र
    सुरक्षा
    परिषद्
    की
    आतंकवाद
    विरोधी
    समिति
    की
    मेजबानी
    की।
    इस
    बैठक
    में
    ‘दिल्ली
    घोषणा
    पत्र’
    के
    दस्तावेज
    को
    सभी
    सदस्य
    देशों
    ने
    अपनाया।
    इसमें
    मुख्य
    तौर
    पर
    ड्रोन,
    सोशल
    मीडिया
    और
    ऑनलाइन
    माध्यमों
    से
    होने
    वाले
    आतंकवाद
    को
    रोकने
    की
    बात
    कही
    गई
    थी।
  • दुनिया
    के
    अलग-अलग
    हिस्सों
    में
    हुई
    आतंकवाद
    की
    किसी
    भी
    घटना
    की
    भारत
    ने
    सख्त
    निंदा
    की
    है।
  • बीते
    कुछ
    सालों
    में
    दुनिया
    भर
    में
    हुई
    आतंकवाद
    की
    घटनाओं
    के
    बीच
    फंसे
    भारतीयों
    को
    सुरक्षित
    निकालकर
    वापस
    लाया
    गया
    है।


वादा-
8:
संयुक्त
राष्ट्र
सुरक्षा
परिषद
की
स्थायी
सदस्यता
प्राप्त
करने
का
प्रयास

BJP
का
संयुक्त
राष्ट्र
सुरक्षा
परिषद
(UNSC)
की
स्थायी
सदस्यता
पाने
के
प्रयास
का
यह
वादा
पूरा
हुआ
माना
जा
सकता
है।

  • भारत
    अब
    तक
    UNSC
    की
    स्थायी
    सदस्यता
    नहीं
    ले
    पाया
    है,
    लेकिन
    इसके
    लिए
    भारत
    लगातार
    प्रयास
    करता
    रहा
    है।
    अमेरिका
    और
    रूस
    जैसे
    देश
    भी
    कहते
    रहे
    हैं
    कि
    भारत
    को
    UNSC
    की
    स्थायी
    सदस्यता
    मिलनी
    चाहिए।
  • 2
    अप्रैल
    2024
    को
    विदेश
    मंत्री
    एस
    जयशंकर
    ने
    कहा,
    ‘भारत
    को
    UNSC
    की
    स्थायी
    सदस्यता
    जरूर
    मिलेगी,
    क्योंकि
    दुनिया
    में
    यह
    भाव
    है
    कि
    उसे
    सदस्यता
    मिलनी
    चाहिए,
    लेकिन
    देश
    को
    इसके
    लिए
    और
    ज्यादा
    मेहनत
    करनी
    होगी।’


वादा-
9:
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
प्रौद्योगिकी
समूह
का
प्रयास

भारत
ने
कई
मंचों
पर
अंतरिक्ष
से
जुड़े
मामलों
पर
एकजुट
होकर
एक
समूह
बनाने
की
बात
कही
है,
लेकिन
अभी
यह
प्रयास
अधूरा
है।

  • भारत
    पहले
    से
    ही
    इंटरनेशनल
    स्पेस
    एक्सप्लोरेशन
    कोआर्डिनेशन
    ग्रुप
    (ISECG)
    का
    सदस्य
    है।
    भारत
    ने
    कई
    अंतर्राष्ट्रीय
    मंचों
    पर
    स्पेस
    रिसर्च
    और
    स्पेस
    के
    कॉमर्शियल
    यूज
    को
    लेकर
    एक
    नियामक
    संस्था
    बनाने
    की
    बात
    कही
    है।
  • भारतीय
    स्पेस
    एजेंसी
    इसरो
    के
    बैनर
    तले
    भारत
    की
    अंतरिक्ष
    अनुसंधान
    के
    क्षेत्र
    में
    उपलब्धियां
    बढ़ी
    हैं।
    इसरो
    ने
    चंद्रयान-3
    मिशन
    की
    सफलता
    के
    साथ
    वैश्विक
    स्तर
    पर
    एक
    समृद्ध
    स्पेस
    एजेंसी
    का
    गौरव
    हासिल
    किया
    है।
  • भारत
    ने
    स्पेस
    रिसर्च
    के
    क्षेत्र
    में
    अंतर्राष्ट्रीय
    सहयोग
    को
    भी
    बढ़ावा
    दिया
    है।
    इसरो
    कई
    स्पेस
    मिशन
    के
    लिए
    विदेशी
    एजेंसियों
    के
    साथ
    तकनीक
    का
    आदान-प्रदान
    करता
    है।



विदेश
नीति
और
राष्ट्रीय
सुरक्षा
से
जुड़े
वादों
और
उनको
लेकर
BJP
सरकार
की
कोशिशों
को
समझने
के
लिए
हमने
आंतरिक
सुरक्षा
के
मामलों
के
जानकार
प्रोफेसर
हर्ष
पंत
से
बात
की।
उन्होंने
बताया
कि…

  • बीते
    5-6
    सालों
    में
    सरकार
    आतंकवाद
    पर
    नियंत्रण
    करने
    में
    सक्षम
    रही
    है।
    पाकिस्तान
    से
    कोई
    बातचीत

    करके
    उसने
    आतंकवाद
    पर
    अपनी
    जीरो
    टॉलरेंस
    की
    नीति
    कायम
    रखी
    है।
  • रक्षा
    क्षेत्र
    में
    हमारा
    निर्यात
    भी
    बढ़ा
    है।
    डिफेंस
    सेक्टर
    का
    बजट
    और
    बढ़ाए
    जाने
    की
    जरूरत
    है,
    लेकिन
    अगर
    UPA
    सरकार
    से
    तुलना
    करेंगे
    तो
    बजट
    में
    काफी
    सुधार
    हुआ
    है।
    इस
    समय
    रक्षा
    क्षेत्र
    का
    कोई
    प्रोजेक्ट
    नहीं
    अटका
    है।
    सेना
    को
    जरूरत
    के
    हथियार
    मुहैया
    हो
    रहे
    हैं,
    लेकिन
    एक
    पहलू
    यह
    भी
    है
    कि
    हथियारों
    की
    खरीद
    होने
    के
    बाद
    सेना
    को
    हथियार
    मिलने
    की
    प्रक्रिया
    लंबी
    होती
    है।
  • जमीनी
    सीमाओं
    पर
    बाड़ेबंदी
    आसान
    नहीं
    होती,
    क्योंकि
    दो
    देशों
    के
    बीच
    फेंसिंग
    को
    नकारात्मक
    नजरिए
    से
    देखा
    जाता
    है।
    इसके
    लिए
    पड़ोसी
    देशों
    को
    भी
    भरोसे
    में
    लेना
    होता
    है।
    म्यांमार
    और
    बांग्लादेश
    की
    सीमा
    पर
    फेंसिंग
    में
    ऐसी
    ही
    रुकावटों
    का
    सामना
    करना
    पड़ा
    है।
  • वामपंथी
    उग्रवाद
    से
    प्रभावित
    इलाकों
    में
    विकास
    के
    लिए
    कई
    प्रोजेक्ट
    शुरू
    किए
    गए
    हैं।
    सरकार
    ने
    नॉर्थ-ईस्ट
    को
    मुख्यधारा
    से
    जोड़ने
    की
    कोशिश
    की
    है।
    इसका
    सकारात्मक
    नतीजा
    भी
    देखने
    को
    मिला
    है।
    हाल
    ही
    में
    उल्फा
    जैसे
    कई
    उग्रवादी
    संगठनों
    के
    साथ
    डील
    की
    गई
    हैं।



विदेश
नीति
से
जुड़े
मामलों
के
जानकार
प्रोफेसर
राजन
कुमार
कहते
हैं
कि…

  • सरकार
    ने
    बहुत
    सक्रियता
    से
    बहुपक्षीय
    सहयोग
    बढ़ाने
    की
    दिशा
    में
    काम
    किया
    है।
    G-20
    में
    शामिल
    देश,
    इसकी
    मेजबानी
    को
    उतनी
    गंभीरता
    से
    नहीं
    लेते
    थे,
    लेकिन
    जिस
    सफलता
    से
    BJP
    सरकार
    ने
    इसकी
    मेजबानी
    की,
    यह
    कई
    देशों
    के
    लिए
    नई
    बात
    थी।
    ब्रिक्स
    के
    कार्यक्रम,
    संयुक्त
    राष्ट्र
    संघ
    में
    सुधार
    की
    आवश्यकता
    पर
    भारत
    ने
    मजबूती
    से
    अपना
    पक्ष
    रखा
    है।
  • आतंकवाद
    को
    लेकर
    अंतर्राष्ट्रीय
    स्तर
    पर
    कोई
    एक
    परिभाषा
    नहीं
    है।
    आतंकवाद
    को
    लेकर
    दुनिया
    भर
    के
    देशों
    में
    आम
    सहमति
    नहीं
    है।
    इसलिए
    आतंकवाद
    को
    लेकर
    कोई
    संस्थागत
    फोरम
    बना
    पाना
    बहुत
    मुश्किल
    है।
  • BJP
    की
    सरकार
    आने
    से
    पहले
    भी
    भारत
    ने
    लगातार
    UNSC
    की
    स्थायी
    सदस्यता
    पाने
    का
    प्रयास
    किया
    है,
    लेकिन
    इन
    प्रयासों
    की
    एक
    सीमा
    है।
    चीन
    भारत
    की
    सदस्यता
    का
    विरोध
    करता
    है।
    जब
    तक
    UNSC
    में
    सुधार
    नहीं
    होते,
    भारत
    को
    UNSC
    की
    स्थायी
    सदस्यता
    मिलना
    मुश्किल
    है।
  • रिसर्च
    के
    अलावा
    अब
    स्पेस
    व्यापार
    का
    अड्डा
    भी
    बन
    गया
    है।
    इसलिए
    स्पेस
    वॉर,
    स्पेस
    का
    कॉमर्शियलाइजेशन
    और
    स्पेस
    का
    कचरा
    कुछ
    ऐसे
    मुद्दे
    हैं
    जिनके
    चलते
    अब
    एक
    अंतर्राष्ट्रीय
    नियामक
    संस्था
    की
    जरूरत
    है।
    संयुक्त
    राष्ट्र
    के
    तहत
    इन
    मुद्दों
    पर
    चर्चा
    के
    फोरम
    तो
    हैं,
    लेकिन
    कोई
    संस्थागत
    फोरम
    या
    नियामक
    अभी
    तक
    नहीं
    बना
    है।

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