21 राज्यों की 102 सीटों पर 67% वोटिंग: त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 80%, बिहार में सबसे कम 48%; बंगाल-मणिपुर में हिंसा

21 राज्यों की 102 सीटों पर 67% वोटिंग: त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 80%, बिहार में सबसे कम 48%; बंगाल-मणिपुर में हिंसा

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वोटिंग के बाद EVM को सील कर दिया गया। अब ये मशीनें 4 जून को खुलेंगी। - Dainik Bhaskar


वोटिंग
के
बाद
EVM
को
सील
कर
दिया
गया।
अब
ये
मशीनें
4
जून
को
खुलेंगी।

लोकसभा
के
फर्स्ट
फेज
में
21
राज्यों-केंद्र
शासित
प्रदेशों
की
102
सीटों
पर
वोटिंग
पूरी
हुई
है।
सुबह
7
बजे
से
शाम
6
हुई
वोटिंग
में
66.92
प्रतिशत
लोगों
ने
मतदान
किया।
सबसे
ज्यादा
80%
वोटिंग
त्रिपुरा
में
हुई,
जबकि
सबसे
कम
48%
वोटिंग
बिहार
में
हुई।
फाइनल
वोटिंग
प्रतिशत
अभी
नहीं
आया
है।

सीटों
के
हिसाब
से
यह
सबसे
बड़ा
फेज
है।
दो
राज्यों
पश्चिम
बंगाल
और
मणिपुर
में
वोटिंग
के
दौरान
हिंसा
की
भी
हुई।

इसके
अलावा
अरुणाचल
प्रदेश
और
सिक्किम
में
विधानसभा
चुनाव
के
लिए
भी
वोट
डाले
गए।
अरुणाचल
प्रदेश
में
64%
और
सिक्किम
में
68%
लोगों
ने
राज्य
में
सरकार
बनाने
के
लिए
वोट
डाले।


कूचबिहार
में
भाजपा-TMC
कार्यकर्ताओं
में
पथराव

पश्चिम
बंगाल
के
कूचबिहार
में
भाजपा
और
TMC
कार्यकर्ताओं
के
बीच
पथराव
हो
गया।
तृणमूल
कांग्रेस
के
कार्यकर्ताओं
ने
आरोप
लगाया
कि
कूचबिहार
के
तूफानगंज
में
भाजपा
कार्यकर्ताओं
ने
पोलिंग
बूथ
पर
हिंसा
की।
तृणमूल
एजेंट्स
से
मारपीट
की
गई
है,
इसमें
कई
घायल
हैं।
TMC
ने
कहा
कि
भाजपा
कार्यकर्ता
हथियारों
के
साथ
बूथ
के
सामने
खड़े
होकर
मतदाताओं
को
डरा
रहे
हैं।

इस
इलाके
में
गुरुवार
रात
भी
भाजपा
कार्यकर्ताओं
ने
हिंसा
की
और
तृणमूल
के
अस्थाई
दफ्तर
में
आगजनी
की।
TMC
ने
भाजपा
प्रत्याशी
के
खिलाफ
चुनाव
आयोग
में
शिकायत
की
है।
भाजपा
ने
भी
तृणमूल
के
कार्यकर्ताओं
पर
हिंसा
का
आरोप
लगाया
है।


इम्फाल
में
उपद्रवियों
ने
EVM
जलाई,
तोड़फोड़
भी
हुई

पूर्वी
इम्फाल
के
मोइरंगकंपू
में
चुनाव
के
दौरान
आगजनी
की
घटना
सामने
आई
है।
यहां
उपद्रवियों
ने
EVM
मशीन
को
जला
दिया।

वहीं
इंफाल
पूर्वी
जिले
के
खुरई
लाईखुटलेंबी
में
गुस्साए
लोगों
ने
EVM
मशीन
में
तोड़फोड़
कर
दी।
इन
लोगों
का
आरोप
था
कि
हथियारबंद
बदमाशों
ने
उनका
वोट
डाल
दिया।
वोटिंग
के
दौरान
मणिपुर
के
बिष्णुपुर
में
भी
फायरिंग
हुई।

मणिपुर
की
दो
लोकसभा
सीटों
(मणिपुर
इनर
और
मणिपुर
आउटर)
पर
भी
इस
फेज
में
वोटिंग
है।
हिंसा
को
देखते
हुए
आउटर
सीट
के
कुछ
हिस्सों
में
26
अप्रैल
को
भी
वोटिंग
होगी।


छत्तीसगढ़
में
बूथ
के
पास
ब्लास्ट,
जवान
शहीद

छत्तीसगढ़
में
बीजापुर
के
उसूर
थाना
इलाके
के
गलगम
में
पोलिंग
बूथ
से
5
सौ
मीटर
दूर
ग्रेनेड
ब्लास्ट
हुआ
था।
ब्लास्ट
में
घायल
CRPF-196
बटालियन
का
जवान
शहीद
हो
गया।
जवान
का
नाम
देवेंद्र
कुमार
है।
जवान
एरिया
डोमिनेशन
पर
निकले
थे।


कूच
बिहार
में
CAPF
जवान
की
मौत

बंगाल
के
कूचबिहार
में
पोलिंग
ड्यूटी
में
लगे
CAPF
जवान
की
मौत
हो
गई
है।
अस्पताल
सूत्रों
के
मुताबिक,
जवान
का
नाम
नीलेश
कुमार
है।
वो
बिहार
से
चुनाव
ड्यूटी
पर
आया
था।
साथियों
को
वो
बीमार
हालत
में
मिला।
जब
उसे
अस्पताल
लाया
गया,
तब
डॉक्टर्स
ने
उसे
मृत
घोषित
कर
दिया।


नगालैंड
के
6
जिलों
में
वोटिंग
जीरो

नगालैंड
के
6
जिलों
में
लगभग
0%
वोटिंग
हुई
है।
ये
जिले
हैं-
मोन,
लॉन्गलेंग,
तुएनसान्ग,
नोकलाक,
शामाटोर
और
किफिरे।
ये
सभी
पूर्वी
नगालैंड
में
आते
हैं।
ईस्टर्न
नगालैंड
पीपुल्स
ऑर्गेनाइजेशन
इन
जिलों
के
लिए
अलग
प्रशासन
और
पहले
से
अधिक
वित्तीय
स्वंत्रता
की
मांग
कर
रहा
है।
इस
संगठन
ने
इन
जिलों
के
लोगों
से
चुनाव
का
बहिष्कार
करने
की
अपील
की
थी।


PM
ने
5
भाषाओं
में
ट्वीट
करके
वोटिंग
की
अपील
की
थी

शुक्रवार
सुबह
PM
नरेंद्र
मोदी
ने
सभी
से
वोट
डालने
की
अपील
की
थी।
उन्होंने
हिंदी,
तमिल,
मराठी
समेत
5
भाषाओं
में
ट्वीट
किया
था।


2019
में
102
में
40
सीटें
भाजपा
ने
जीती
थीं

2019
में
इन
102
लोकसभा
सीटों
पर
भाजपा
ने
40,
DMK
ने
24,
कांग्रेस
ने
15
सीटें
जीती
थीं।
अन्य
को
23
सीटें
मिली
थीं।
इस
फेज
में
अधिकतर
सीटों
पर
मुकाबला
इन्हीं
3
दलों
के
बीच
है।


फर्स्ट
फेज
में
1,625
प्रत्याशी

फर्स्ट
फेज
में
1,625
कैंडिडेट्स
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
इनमें
1,491
पुरुष,
134
महिला
कैंडिडेट
हैं।
8
केंद्रीय
मंत्री,
एक
पूर्व
मुख्यमंत्री
और
एक
पूर्व
राज्यपाल
भी
इस
बार
चुनाव
मैदान
में
हैं।

इस
फेज
के
बाद
26
अप्रैल
को
दूसरे
फेज
की
वोटिंग
होगी।
कुल
7
फेज
में
543
सीटों
पर
1
जून
को
मतदान
खत्म
होगा।
सभी
सीटों
के
रिजल्ट
4
जून
को
आएंगे।


21
राज्यों
के
102
सीटों
की
डिटेल


161
कैंडिडेट्स
पर
हत्या,
किडनैपिंग
जैसे
गंभीर
मामले
दर्ज

एसोसिएशन
फॉर
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म
(ADR)
ने
1,618
उम्मीदवारों
के
हलफनामे
के
आधार
पर
एक
रिपोर्ट
तैयार
की।
इनमें
से
16%
यानी
252
उम्मीदवारों
पर
क्रिमिनल
केस
दर्ज
हैं।
450
यानी
28%
उम्मीदवार
करोड़पति
हैं।
इनके
पास
एक
करोड़
या
उससे
ज्यादा
की
संपत्ति
है।
10
ने
अपनी
संपत्ति
शून्य
बताई
है,
जबकि
तीन
के
पास
300
से
500
रुपए
की
संपत्ति
है।

ADR
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
10%
यानी
161
कैंडिडेट
ऐसे
हैं
जिन
पर
हत्या,
किडनैपिंग
जैसे
गंभीर
मामले
दर्ज
हैं।
7
उम्मीदवारों
पर
हत्या
और
19
पर
हत्या
की
कोशिश
के
मामले
हैं।
18
उम्मीदवारों
पर
महिलाओं
के
खिलाफ
अपराध
के
मामले
दर्ज
हैं।
इनमें
से
एक
पर
रेप
का
मामला
भी
दर्ज
है।
वहीं,
35
कैंडिडेट्स
पर
हेट
स्पीच
से
जुड़े
मामले
दर्ज
हैं।

ADR
ने
अपनी
रिपोर्ट
में
बताया
है
कि
इलेक्शन
के
पहले
फेज
में
1618
उम्मीदवारों
में
से
450
यानी
28%
उम्मीदवार
करोड़पति
हैं।
इनके
पास
एक
करोड़
या
उससे
ज्यादा
की
संपत्ति
है।
कैंडिडेट्स
के
पास
औसत
संपत्ति
4.51
करोड़
रुपए
है।

10
उम्मीदवारों
ने
अपनी
संपत्ति
शून्य
बताई
है,
जबकि
तीन
के
पास
300
से
500
रुपए
की
संपत्ति
है।
तमिलनाडु
की
थुथुकूडी
सीट
से
निर्दलीय
उम्मीदवार
के.
पोनराज
320
रुपए
के
साथ
सबसे
गरीब
उम्मीदवार
हैं।


फर्स्ट
फेज
की
9
हॉट
सीट…


1.
नागपुर
(महाराष्ट्र)

केंद्रीय
सड़क
परिवहन
मंत्री
नितिन
गडकरी
महाराष्ट्र
की
नागपुर
सीट
से
चुनाव
मैदान
में
हैं।
गडकरी
यहां
से
हैट्रिक
लगाने
की
कोशिश
कर
रहे
हैं।
वो
पहली
बार
इस
सीट
पर
2014
में
जीते
थे।

उस
चुनाव
में
गडकरी
ने
सात
बार
के
सांसद
कांग्रेस
नेता
विलास
मुत्तेमवार
को
हराया
था।
2019
के
चुनाव
में
गडकरी
ने
कांग्रेस
प्रत्याशी
नाना
पटोले
को
मात
दी।
इस
बार
कांग्रेस
ने
विकास
ठाकरे
को
मैदान
में
उतारा
है।
वो
नागपुर
पश्चिम
के
विधायक
हैं।


2.
बीकानेर
(राजस्थान)

केंद्रीय
कानून
मंत्री
अर्जुन
राम
मेघवाल
राजस्थान
की
बीकानेर
लोकसभा
सीट
से
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
उनका
मुकाबला
कांग्रेस
के
पूर्व
मंत्री
गोविंद
राम
मेघवाल
से
है।
बहुजन
समाज
पार्टी
ने
खेत
राम
मेघवाल
को
मैदान
में
उतारा
है।
अर्जुन
राम
मेघवाल
पहली
बार
इस
सीट
पर
2009
में
जीते
थे।
उन्होंने
2014
और
2019
का
चुनाव
भी
जीता
था।


3.
अलवर
(राजस्थान)

केंद्रीय
पर्यावरण,
वन
और
जलवायु
परिवर्तन
मंत्री
भूपेंद्र
यादव
राजस्थान
की
अलवर
सीट
से
चुनाव
मैदान
में
हैं।
उनका
मुकाबला
कांग्रेस
के
ललित
यादव
से
है.
वो
अलवर
की
मुंडावर
विधानसभा
सीट
से
विधायक
हैं।

अलवर
से
2019
में
बाबा
बालक
नाथ
ने
लोकसभा
का
चुनाव
जीता
था।
बीते
साल
हुए
विधानसभा
चुनाव
में
बाबा
बालक
नाथ
विधायक
चुने
गए
हैं।
भूपेंद्र
यादव
का
यह
पहला
लोकसभा
चुनाव
है।
वो
2012
से
ही
राज्य
सभा
के
सदस्य
हैं।


4.
छिंदवाड़ा
(मध्य
प्रदेश)

70
साल
से
ज्यादा
समय
से
यह
सीट
कांग्रेस
के
पास
है।
बीते
45
साल
से
यहां
नाथ
परिवार
का
मेंबर
जीत
रहा
है।
हालांकि,
1997
में
हुए
उपचुनाव
में
राज्य
के
तत्कालीन
मुख्यमंत्री
सुंदरलाल
पटवा
ने
कमलनाथ
को
37
हजार
से
ज्यादा
मतों
से
हरा
दिया
था।
इसके
बाद
अगले
ही
साल
कमलनाथ
ने
भी
पटवा
को
बड़े
अंतर
से
हराया।

कमलनाथ
यहां
1980
से
2019
के
बीच
9
बार
सांसद
रहे।
2018
में
मुख्यमंत्री
बनने
के
बाद
उन्होंने
कमान
बेटे
को
सौंपी
और
2019
में
मोदी
लहर
के
बावजूद
नकुलनाथ
MP
की
यह
सीट
जीतने
में
कामयाब
रहे।
इस
बार
भी
कांग्रेस
के
नकुलनाथ
और
भाजपा
के
विवेक
बंटी
साहू
के
बीच
मुकाबला
है।
साहू
2019
उपचुनाव
और
2023
विधानसभा
चुनाव
में
कमलनाथ
के
हाथों
हार
चुके
हैं।


5.
मंडला
(मध्य
प्रदेश)

भाजपा
ने
यहां
से
6
बार
के
सांसद
और
केंद्रीय
मंत्री
फग्गन
सिंह
कुलस्ते
को
मैदान
में
उतारा
है।
उनका
मुकाबला
कांग्रेस
के
चार
बार
के
विधायक
ओमकार
सिंह
मरकाम
से
है।
इस
सीट
पर
BJP
की
चिंता
इस
वजह
से
बढ़ी
हुई
है,
क्योंकि
6
माह
पहले
हुए
विधानसभा
चुनाव
के
दौरान
फग्गन
सिंह
कुलस्ते
को
मंडला
जिले
की
निवास
सीट
से
हार
का
सामना
करना
पड़ा
था।
मंडला
संसदीय
क्षेत्र
के
तहत
आने
वाली
8
विधानसभा
सीटों
में
से
5
पर
कांग्रेस
तो
3
पर
BJP
का
कब्जा
है।


6.
उधमपुर
(जम्मू-कश्मीर)

जम्मू-कश्मीर
की
उधमपुर-डोडा
लोकसभा
सीट
से
तीसरी
बार
जीत
के
लिए
मैदान
में
केंद्रीय
मंत्री
डॉ.
जितेंद्र
सिंह
हैं।
उन्होंने
2014
में
जम्मू
कश्मीर
के
पूर्व
मुख्यमंत्री
गुलाम
नबी
आजाद
को
61
हजार
वोटों
से
हराया
था।
इसके
बाद
2019
में
कांग्रेस
प्रत्याशी
विक्रम
आदित्य
सिंह
को
3
लाख
से
ज्यादा
वोटों
से
हराया
था।
कांग्रेस
ने
इस
बार
भाजपा
के
बागी
चौधरी
लाल
सिंह
पर
दांव
लगाया
है।


7.
अरुणाचल
पश्चिम

केंद्रीय
पृथ्वी
विज्ञान
और
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योग
मंत्री
किरण
रिजिजू
चुनाव
अरुणाचल
पश्चिम
सीट
से
चुनाव
मैदान
में
हैं।
रिजिजू
इस
सीट
से
पहली
बार
2004
में
जीते
थे।
लेकिन
उन्हें
2009
के
चुनाव
में
हार
का
सामना
करना
पड़ा।

इसके
बाद
रिजूजू
ने
2014
के
चुनाव
में
जीत
दर्ज
की।
वो
2019
में
भी
अरुणाचल
पश्चिम
सीट
से
चुनाव
जीते।
इस
बार
उनका
मुकाबला
पूर्व
मुख्यमंत्री
और
अरुणाचल
प्रदेश
कांग्रेस
के
प्रदेश
अध्यक्ष
नबाम
तुकी
से
हैं।


8.
कूचबिहार
(पश्चिम
बंगाल)

भाजपा
ने
इस
सीट
से
केंद्रीय
मंत्री
निशीथ
प्रमाणिक
को
मैदान
में
उतारा
है,
जबकि
TMC
ने
जगदीश
चंद्र
बर्मा
बसुनिया
पर
दांव
खेला
है।
2019
में
कूचबिहार
सीट
से
BJP
उम्मीदवार
निशीथ
प्रमाणिक
सांसद
चुने
गए
थे।
2019
में
निशीथ
प्रमाणिक
को
तृणमूल
कांग्रेस
ने
निष्कासित
कर
दिया
था,
जिसके
बाद
वे
BJP
के
टिकट
पर
कूचबिहार
से
चुनाव
लड़े
और
जीत
गए।
उन्होंने
तृणमूल
कांग्रेस
के
अधिकारी
परेश
चंद्र
को
54,231
वोटों
के
अंतर
से
हराया
था।


9.
नगीना
(उत्तर
प्रदेश)

UP
के
बिजनौर
जिले
की
नगीना
लोकसभा
सीट
इस
बार
हाई-प्रोफाइल
हो
गई
है।
यहां
युवा
दलित
नेता
चंद्रशेखर
आजाद
अपनी
पार्टी
‘आजाद
समाज
पार्टी’
से
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
इसी
वजह
से
सीट
पर
मुकाबला
चार
लोगों
के
बीच
हो
गया
है।
BJP
की
ओर
से
यहां
नहटौर
विधायक
ओम
कुमार
मैदान
में
हैं
तो
इंडिया
गठबंधन
की
ओर
से
पूर्व
जज
मनोज
कुमार
हैं।

बहुजन
समाज
पार्टी
की
ओर
से
सुरेंद्र
पाल
प्रत्याशी
हैं।
दरअसल,
2019
के
मोदी
लहर
में
भी
यह
सीट
बसपा
ने
जीत
ली
थी।
इस
सीट
से
बसपा
के
गिरीश
चंद्र
जाटव
ने
जीत
हासिल
की
थी,
लेकिन
मायावती
ने
उन्हें
इस
बार
बुलंदशहर
से
मैदान
में
उतारा
है।


विधानसभा
चुनाव:
अरुणाचल
में
64%और
सिक्किम
में
68%
वोटिंग

लोकसभा
चुनाव
में
वोटिंग
के
साथ
ही
अरुणाचल
प्रदेश
और
सिक्किम
में
विधानसभा
चुनाव
के
लिए
वोटिंग
हुई।
अरुणाचल
प्रदेश
में
शाम
5
बजे
तक
64
फीसदी
वोटिंग
हुई।
सिक्किम
में
67.95फीसदी
वोटिंग
हुई।
यह
2019
में
हुई
78.63फीसदी
वोटिंग
से
10
फीसदी
कम
है।
अरुणाचल
प्रदेश
में
60
विधानसभा
सीटें
हैं।
19
अप्रैल
को
50
सीटों
पर
एक
फेज
में
वोटिंग
हुई।
दरअसल,
10
सीटों
पर
भाजपा
को
चुनाव
से
पहले
ही
जीत
मिल
चुकी
है।
इन
10
सीटों
पर
भाजपा
उम्मीदवारों
ने
निर्विरोध
जीत
दर्ज
की।
इनमें
CM
पेमा
खांडू,
डिप्टी
सीएम
चाउना
मेन
भी
शामिल
हैं।
अरुणाचल
में
अभी
भाजपा
के
पेमा
खांडू
की
सरकार
है।
2019
में
खांडू
के
नेतृत्व
में
भाजपा
ने
अरुणाचल
में
दूसरी
बार
सरकार
बनाई
थी।
सिक्किम
में
विधानसभा
की
32
सीटों
के
लिए
वोटिंग
हुई।
फिलहाल
राज्य
में
सिक्किम
क्रांतिकारी
मोर्चा
(SKM)
की
सरकार
है।
यहां
प्रेम
सिंह
तमांग
उर्फ
पीएस
गोले
मुख्यमंत्री
हैं।

1994
से
लेकर
2019
तक
राज्य
में
सिक्किम
डेमोक्रेटिक
फ्रंट
(SDF)
की
सरकार
रही।
पार्टी
के
चीफ
पवन
चामलिंग
लगातार
24
साल
166
दिन
तक
सीएम
पद
पर
रहे।
2019
विधानसभा
चुनाव
में
SKM
को
17
सीटें
मिली
थीं,
वहीं
चामलिंग
की
पार्टी
को
15
सीटें
ही
मिली
थीं।


अब
कार्टूनिस्ट
मंसूर
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