वित्त मंत्री बोलीं- हम इलेक्टोरल बॉन्ड फिर से लाएंगे: कांग्रेस बोली- और कितना लूटेंगे; सुप्रीम कोर्ट ने स्कीम को असंवैधानिक बताया था

वित्त मंत्री बोलीं- हम इलेक्टोरल बॉन्ड फिर से लाएंगे: कांग्रेस बोली- और कितना लूटेंगे; सुप्रीम कोर्ट ने स्कीम को असंवैधानिक बताया था


नई
दिल्ली
27
मिनट
पहले

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इलेक्टोरल
बॉन्ड
स्कीम
पर
फिर
विवाद
हो
सकता
है।
वित्त
मंत्री
निर्मला
सीतारमण
ने
हिंदुस्तान
टाइम्स
को
दिए
इंटरव्यू
में
कहा
कि
अगर
हम
सत्ता
में
आए
तो
इलेक्टोरल
बॉन्ड
स्कीम
को
फिर
से
वापस
लाएंगे।
इसके
लिए
पहले
बड़े
स्तर
पर
सुझाव
लिए
जाएंगे।

सरकार
के
दोबारा
से
इलेक्टोरल
बॉन्ड
लाने
की
बात
पर
कांग्रेस
नेता
जयराम
रमेश
ने
कहा
कि
इस
बार
वे
कितना
लूटेंगे।

इससे
पहले
15
फरवरी
को
सुप्रीम
कोर्ट
ने
राजनीतिक
फंडिंग
के
लिए
इलेक्टोरल
बॉन्ड
स्कीम
पर
तत्काल
प्रभाव
से
रोक
लगा
दी
थी।
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कहा
था-
यह
स्कीम
असंवैधानिक
है।
बॉन्ड
की
गोपनीयता
बनाए
रखना
असंवैधानिक
है।
यह
स्कीम
सूचना
के
अधिकार
का
उल्लंघन
है।


विपक्षी
नेताओं
ने
क्या
कहा


जयराम
रमेश
ने
X
पर
लिखा

हम
जानते
हैं
कि
भाजपा
ने
PayPM
ने
घोटाले
से
4
लाख
करोड़
की
लूट
की।
अब
वे
लूट
जारी
रखना
चाहते
हैं।
जरा
इन
तरीकों
पर
ध्यान
दें।
PayPM:
1-
चंदा
दो,
धंधा
लो।
2.
पोस्टपेड
घूस-
ठेका
दो,
रिश्वत
लो।
प्री-पेड
और
पोस्टपेड
के
लिए
घूस-
3.8
लाख
करोड़।
3.
पोस्ट-रेड
घूस-
हफ्ता
वसूली।
पोस्ट-रेड
घूस
की
कीमत-
1853
रुपए।
4-
फर्जी
कंपनियां-
मनी
लॉन्ड्रिंग।
फर्जी
कंपनियों
की
कीमत-
419
करोड़।
अगर
वे
जीते
और
इलेक्टोरल
बॉन्ड
फिर
से
लेकर
आए
तो
इस
बार
कितना
लूटेंगे?


कपिल
सिब्बल
ने
कहा-

मैं
निर्मला
सीतारमण
का
सम्मान
करता
हूं।
एक
इंटरव्यू
में
वे
कह
रही
हैं
कि
इलेक्टोरल
बॉन्ड
को
फिर
से
लाएंगे।
उन्होंने
ये
भी
कहा
कि
जब
पहली
बार
ये
स्कीम
ट्रांसपेरेंसी
को
ध्यान
में
रखकर
लाई
गई
थी।
सुप्रीम
कोर्ट
कह
चुका
है
कि
इसमें
पारदर्शिता
नहीं
थी।
वे
(सरकार)
इसे
नॉन-ट्रांसपेरेंट
तरीके
से
लेकर
आए।
अब
समस्या
है
कि
उनके
पास
इस
चुनाव
के
लिए
तो
पैसा
है,
लेकिन
वे
ये
भी
जानते
हैं
कि
अगर
हार
गए
तो
भी
पैसे
की
जरूरत
होगी।
मैं
मोहन
भागवत
से
पूछना
चाहता
हूं
कि
वे
इस
मुद्दे
पर
खामोश
क्यों
हैं।


इलेक्टोरल
बॉन्ड
से
भाजपा
को
सबसे
ज्यादा
फंडिंग

2018
से
अब
तक
इलेक्टोरल
बॉन्ड
के
जरिए
सबसे
ज्यादा
चंदा
भाजपा
को
मिला।
6
साल
में
चुनावी
बॉन्ड
से
भाजपा
को
6337
करोड़
की
चुनावी
फंडिंग
हुई।
कांग्रेस
को
1108
करोड़
चुनावी
चंदा
मिला।


चुनावी
बॉन्ड
क्या
है?

2017
के
बजट
में
उस
वक्त
के
वित्त
मंत्री
अरुण
जेटली
ने
चुनावी
या
इलेक्टोरल
बॉन्ड
स्कीम
को
पेश
किया
था।
2
जनवरी
2018
को
केंद्र
सरकार
ने
इसे
नोटिफाई
किया।
ये
एक
तरह
का
प्रोमिसरी
नोट
होता
है।
जिसे
बैंक
नोट
भी
कहते
हैं।
इसे
कोई
भी
भारतीय
नागरिक
या
कंपनी
खरीद
सकती
है।

अगर
आप
इसे
खरीदना
चाहते
हैं
तो
आपको
ये
स्टेट
बैंक
ऑफ
इंडिया
की
चुनी
हुई
ब्रांच
में
मिल
जाएगा।
इसे
खरीदने
वाला
इस
बॉन्ड
को
अपनी
पसंद
की
पार्टी
को
डोनेट
कर
सकता
है।
बस
वो
पार्टी
इसके
लिए
एलिजिबल
होनी
चाहिए।


क्या
है
पूरा
मामला

इस
योजना
को
2017
में
ही
चुनौती
दी
गई
थी,
लेकिन
सुनवाई
2019
में
शुरू
हुई।
12
अप्रैल
2019
को
सुप्रीम
कोर्ट
ने
सभी
पॉलिटिकल
पार्टियों
को
निर्देश
दिया
कि
वे
30
मई,
2019
तक
में
एक
लिफाफे
में
चुनावी
बॉन्ड
से
जुड़ी
सभी
जानकारी
चुनाव
आयोग
को
दें।
हालांकि,
कोर्ट
ने
इस
योजना
पर
रोक
नहीं
लगाई।

बाद
में
दिसंबर,
2019
में
याचिकाकर्ता
एसोसिएशन
फॉर
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म्स
(ADR)
ने
इस
योजना
पर
रोक
लगाने
के
लिए
एक
आवेदन
दिया।
इसमें
मीडिया
रिपोर्ट्स
के
हवाले
से
बताया
गया
कि
किस
तरह
चुनावी
बॉन्ड
योजना
पर
चुनाव
आयोग
और
रिजर्व
बैंक
की
चिंताओं
को
केंद्र
सरकार
ने
दरकिनार
किया
था।


इस
पर
विवाद
क्यों…

2017
में
अरुण
जेटली
ने
इसे
पेश
करते
वक्त
दावा
किया
था
कि
इससे
राजनीतिक
पार्टियों
को
मिलने
वाली
फंडिंग
और
चुनाव
व्यवस्था
में
पारदर्शिता
आएगी।
ब्लैक
मनी
पर
अंकुश
लगेगा।
दूसरी
ओर
इसका
विरोध
करने
वालों
का
कहना
है
कि
इलेक्टोरल
बॉन्ड
खरीदने
वाले
की
पहचान
जाहिर
नहीं
की
जाती
है,
इससे
ये
चुनावों
में
काले
धन
के
इस्तेमाल
का
जरिया
बन
सकते
हैं।

कुछ
लोगों
का
आरोप
है
कि
इस
स्कीम
को
बड़े
कॉर्पोरेट
घरानों
को
ध्यान
में
रखकर
लाया
गया
है।
इससे
ये
घराने
बिना
पहचान
उजागर
हुए
जितनी
मर्जी
उतना
चंदा
राजनीतिक
पार्टियों
को
दे
सकते
हैं।


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ने
इलेक्टोरल
बॉन्ड
का
नया
डेटा
वेबसाइट
पर
डाला:इसमें
2019
से
पहले
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भी
जानकारी;
BJP
ने
सबसे
ज्यादा
6,986
करोड़
के
बॉन्ड
कैश
कराए

चुनाव
आयोग
ने
सुप्रीम
कोर्ट
की
रजिस्ट्री
से
16
मार्च
को
मिला
इलेक्टोरल
बॉन्ड
का
नया
डेटा
17
मार्च
को
अपनी
वेबसाइट
पर
अपलोड
कर
दिया।
नए
डेटा
में
फाइनेंशियल
ईयर
2017-18
के
बॉन्ड्स
की
जानकारी
शामिल
है।

आयोग
ने
14
मार्च
को
763
पेज
की
दो
लिस्ट
में
अप्रैल
2019
के
बाद
खरीदे
या
कैश
किए
गए
बॉन्ड
की
जानकारी​​
वेबसाइट
पर
​​​​​अपलोड
की
थी।
एक
लिस्ट
में
बॉन्ड
खरीदने
वालों
की
जानकारी,
जबकि
दूसरी
में
राजनीतिक
दलों
को
मिले
बॉन्ड
की
डिटेल
थी।


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