अपनी जीत से ज्यादा पप्पू की हार चाहते हैं तेजस्वी: NDA और पप्पू में सीधा मुकाबला, पूर्णिया में MY समीकरण का लिटमस टेस्ट

अपनी जीत से ज्यादा पप्पू की हार चाहते हैं तेजस्वी: NDA और पप्पू में सीधा मुकाबला, पूर्णिया में MY समीकरण का लिटमस टेस्ट


पूर्णिया
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लोकसभा
चुनाव
में
बिहार
की
पूर्णिया
सीट

सिर्फ
राज्य
की
सबसे
हॉट
सीट
बन
चुकी
है,
बल्कि
दिल्ली
तक
की
निगाहें
भी
पूर्णिया
पर
टिकी
हैं।
पीएम
नरेंद्र
मोदी,
लालू
यादव,
तेजस्वी
यादव,
राहुल
गांधी,
प्रियंका
गांधी
और
पप्पू
यादव
सभी
नेताओं
और
राजनीतिक
दलों
की
प्रतिष्ठा
का
सवाल
बन
चुकी
पूर्णिया
सीट
पर
सियासी
सरगर्मी
तेज
है।

बिहार
की
इस
VIP
सीट
ने
राजनीति
की
महत्वाकांक्षाओं,
रिश्ते,
अपमान
और
बदला
लेने
के
सियासी
दांव-पेंच
को
सार्वजनिक
कर
दिया
है।
आलम
ये
हो
चला
है
कि
अब
अपनी
जीत
से
ज्यादा
दूसरे
की
हार
के
लिए
जोर-आजमाइश
हो
रही
है।
पूर्णिया
की
लड़ाई
में
एनडीए
के
संतोष
कुशवाहा,
महागठबंधन
की
बीमा
भारती
और
निर्दलीय
पप्पू
यादव
ने
एड़ी-चोटी
का
जोर
लगाया
हुआ
है।

सबके
अपने
दावे
हैं,
सबके
अपने
फसाने।
लेकिन,
नेताओं
के
दावों
से
इतर
आखिर
पूर्णिया
की
जमीन
पर
क्या
माहौल
है,
लोगों
के
क्या
मुद्दे
हैं,
कौन
किस
पर
भारी
पड़
रहा,
इन
तमाम
सवालों
के
जवाब
आपको
दैनिक
भास्कर
की
इस
ग्राउंड
रिपोर्ट
में
मिलेंगे।


पढ़िए
पूर्णिया
VIP
सीट
की
ये
ग्राउंड
रिपोर्ट…

चुनाव के ऐनवक्त पर जदयू छोड़कर आईं बीमा भारती को आरजेडी ने टिकट दिया है। तेजस्वी दो दिन से पूर्णिया में कैंप कर रहे हैं।


चुनाव
के
ऐनवक्त
पर
जदयू
छोड़कर
आईं
बीमा
भारती
को
आरजेडी
ने
टिकट
दिया
है।
तेजस्वी
दो
दिन
से
पूर्णिया
में
कैंप
कर
रहे
हैं।


पूर्णिया
में
चुनावी
मिजाज

‘आप
लोग
किसी
धोखे
में
नहीं
आइए।
यह
चुनाव
किसी
एक
व्यक्ति
का
चुनाव
नहीं
है।
यह
एनडीए
और
इंडिया
गठबंधन
की
लड़ाई
है।
या
तो
इंडिया
को
चुनिए,
बीमा
भारती
को
वोट
करिए
और
अगर
इंडिया
को
नहीं
चुन
सकते,
बीमा
भारती
को
वोट
नहीं
दे
सकते
तो
फिर
एनडीए
को
चुन
लीजिए।
साफ
बात
है।’

तेजस्वी
यादव
का
ये
बयान
सुनकर
शायद
आपको
पहली
बार
में
यकीन

हो,
लेकिन
पूर्णिया
से
महागठबंधन
की
प्रत्याशी
बीमा
भारती
के
लिए
चुनावी
प्रचार
में
तेजस्वी
वाकई
ये
कह
रहे
हैं
कि
या
तो
बीमा
भारती
को
वोट
दीजिए,
नहीं
तो
संतोष
कुशवाहा
को
वोट
दे
दीजिए।
यानी
तेजस्वी
एनडीए
प्रत्याशी
के
लिए
भी
वोट
मांग
रहे
है।

जाहिर
है,
तेजस्वी
यादव
किसी
भी
सूरत
में
पप्पू
यादव
को
पूर्णिया
से
जीत
दर्ज
नहीं
करने
देना
चाहते।
दिलचस्प
ये
है
कि
तेजस्वी
मंच
से
जब
ये
बात
कह
रहे
थे,
सभा
में
मौजूद
कार्यकर्ता
पप्पू
यादव
जिंदाबाद
के
नारे
लगा
रहे
थे।
तेजस्वी
के
एनडीए
को
वोट
देने
की
बात
से
वहां
मौजूद
लोग
नाराज
दिखे।

पप्पू यादव अपने रोड शो में स्थानीय लोगों से ही खाना मांग लेते हैं। वह देसी अंदाजा में दही चूड़ा खाते हैं।


पप्पू
यादव
अपने
रोड
शो
में
स्थानीय
लोगों
से
ही
खाना
मांग
लेते
हैं।
वह
देसी
अंदाजा
में
दही
चूड़ा
खाते
हैं।

2015
में
पप्पू
यादव
ने
तेजस्वी
यादव
के
हार
की
भविष्यवाणी
की
थी,
कहा
था
कि
अगर
तेजस्वी
चुनाव
जीत
गए
तो
वो
राजनीति
छोड़
देंगे।
पप्पू
यादव
की
इस
बात
की
टीस
तेजस्वी
के
दिल
में
आज
भी
है।

तेजस्वी
ने
पिछले
विधानसभा
चुनाव
में
बिहार
की
सभी
243
विधानसभा
सीटों
पर
चुनाव
प्रचार
किया,
लेकिन
सिर्फ
एक
सीट
पर
ही
कैंप
किया।
वो
सीट
थी
मधेपुरा,
जहां
से
पप्पू
चुनाव
लड़
रहे
थे।
लोकसभा
चुनाव
में
भी
तेजस्वी
ने
पहली
बार
पूर्णिया
सीट
पर
खुद
2
दिन
तक
कैंप
किया।

ये
सीट
तेजस्वी
के
लिए
नाक
की
लड़ाई
बन
चुकी
है,
तेजस्वी
ने
जिद
ठान
ली
है।
जिद
अपनी
जीत
से
ज्यादा
पप्पू
यादव
के
हार
की
है।
विपक्ष
की
इस
आपसी
लड़ाई
से
एनडीए
की
राह
आसान
हो
सकती
है।

मधेपुरा
से
लोकसभा
और
फिर
विधानसभा
चुनाव
में
मिली
हार
के
बाद
पप्पू
यादव
प्रणाम
पूर्णिया
कैंपेन
के
जरिए
पिछले
कुछ
महीनों
से
पूर्णिया
से
चुनाव
लड़ने
की
तैयारी
कर
रहे
थे।
लेकिन
तेजस्वी
यादव
ने
पप्पू
को
झटका
देते
हुए
पूर्णिया
सीट
से
अपना
उम्मीदवार
उतारा
और
खुद
कैंप
भी
किया।

पप्पू
को
पूर्णिया
से
हराने
की
ऐसी
ही
कोशिश
1999
के
चुनाव
में
लालू
यादव
ने
भी
की
थी।
तब
लालू
ने
5
दिन
तक
पूर्णिया
में
कैंप
किया
था,
लेकिन
पप्पू
यादव
भारी
वोटों
के
अंतर
से
जीते
थे।
तेजस्वी
अपने
पिता
के
अधूरे
काम
को
पूरा
करने
में
जुटे
हैं।
पूर्णिया
का
चुनाव
MY
समीकरण
का
लिटमस
टेस्ट
है,
जिसका
फायदा
एनडीए
प्रत्याशी
को
मिल
सकता
है।

एनडीए
को
उम्मीद
है
कि
विपक्ष
की
इस
आपसी
लड़ाई
का
फायदा
उन्हें
चुनाव
में
मिलेगा
और
स्थानीय
जेडीयू
सांसद
संतोष
कुशवाहा
के
खिलाफ
एंटी
इंकम्बेंसी
होने
के
बावजूद
वो
तीसरी
बार
सांसद
चुने
जाएंगे।
संतोष
कुशवाहा
का
कहना
है
कि
पूरे
बिहार
में
एनडीए
की
एकतरफा
लहर
चल
रही
है।
पूर्णिया
लोकसभा
में
पिछली
बार
के
मुकाबले
एनडीए
बहुत
बड़े
अंतर
से
चुनाव
जीतेगी,
क्योंकि
जनता
ने
विकास
के
लिए
वोट
देने
का
मन
बना
लिया
है।

हालांकि,
संतोष
कुशवाहा
अपने
प्रचार
के
दौरान
खीजे
हुए
नजर
आते
हैं।
एक
वायरल
वीडियो
में
वो
मंच
से
कार्यकर्ताओं
को
संबोधित
करते
हुए
कथित
तौर
पर
पप्पू
यादव
के
सीने
पर
चढ़कर
हड्डी
तोड़ने
की
बात
करते
हुए
पाए
गए।

दैनिक
भास्कर
के
सवाल
पर
संतोष
कुशवाहा
कहते
हैं,
‘कोई
प्रत्याशी
41
केस
का
अभियुक्त
है,
कोई
अन्य
केसों
के
अभियुुक्त
हैं।
छाती
तोड़ने
का
विषय
मेरा
ये
है
कि
कानून
का
राज
है,
जो
गड़बड़
करेगा,
कानून
के
सहारे
उसका
इलाज
जरूर
किया
जाएगा।’

क्षेत्र
में
समय

देने
और
पीएम
मोदी
के
नाम
पर
चुनाव
लड़ने
के
सवालों
पर
संतोष
कुशवाहा
बोले-
‘जब
संसद
चलता
है
तो
मैं
संसद
में
रहता
हूं,
नहीं
तो
पूर्ण
रूप
से
क्षेत्र
में
ही
रहता
हूं।
राष्ट्रवाद
है,
नरेंद्र
मोदी
को
तीसरी
बार
पीएम
बनाना
है,
नीतीश
कुमार
के
हाथ
को
मजबूत
करना
है,
विकसित
पूर्णिया
बनाना
है।’

एनडीए प्रत्याशी संतोष कुशवाहा ने प्रचार के लिए एसयूवी को स्पेशल लुक दिया है।


एनडीए
प्रत्याशी
संतोष
कुशवाहा
ने
प्रचार
के
लिए
एसयूवी
को
स्पेशल
लुक
दिया
है।


पूर्णिया
का
चुनावी
समीकरण

दैनिक
भास्कर
के
पूर्णिया
ब्यूरो
चीफ
मनोहर
कुमार
के
मुताबिक,
पूर्णिया
सीमांचल
की
हॉट
सीट
है,
यहां
से
जो
भी
चुनावी
बयार
बहती
है,
उसका
असर
4-5
जिलों
पर
पड़ता
है।
एनडीए
और
महागठबंधन
के
बीच
आमने-सामने
के
मुकाबले
का
ही
समीकरण
था।
लेकिन,
पप्पू
यादव
को
टिकट

मिलने
की
वजह
से
उनके
कार्यकर्ताओं
में
काफी
नाराजगी
है।
खासतौर
पर
सीमांचल
में
काफी
वजूद
रखने
वाले
समुदाय
(मुस्लिम)
जो
RJD
का
MY
समीकरण
है,
उस
वोट
बैंक
में
पप्पू
यादव
ज्यादा
सेंधमारी
करते
हुए
देखे
जा
रहे
हैं।

इस
इलाके
में
ध्रुवीकरण
की
राजनीति
होती
रही
है,
उसे
लेकर
NDA
के
लोग
राष्ट्रवाद
और
हिंदुत्व
का
मुद्दा
उठाते
रहे
हैं।
PM
की
चुनावी
सभा
के
बाद
समीकरण
कुछ
बदलने
के
आसार
हैं।
BJP
के
कोर
वोट
बैंक
में
बड़ा
उत्साह
देखा
जा
रहा
है।
अभी
यहां
त्रिकोणीय
मुकाबला
है।
NDA
और
पप्पू
यादव
में
काफी
संघर्ष
देखा
जा
रहा
है
और
बीमा
भारती
अपना
स्थान
बनाने
की
कोशिश
में
हैं।

RJD
के
बड़े
नेता
अपने
छिटके
हुए
कोर
वोट
बैंक
को
अपने
पक्ष
में
करने
में
जुटे
हुए
हैं।
पप्पू
यादव
अभी
भी
मान
रहे
हैं
कि
कांग्रेस
उनके
साथ
है।
कांग्रेस
ने
भी
उन
पर
ऐसा
कोई
एक्शन
नहीं
लिया
है।

इसका
मतलब
है
कि
उनको
कांग्रेस
का
अप्रत्यक्ष
रूप
से
समर्थन
है।
महागठबंधन
की
तरफ
से
RJD
की
बीमा
भारती
उम्मीदवार
हैं,
वो
रुपौली
से
JDU
की
5
बार
विधायक
रही
हैं।
बीमा
भारती
अत्यंत
पिछड़ी
जाति
से
आती
हैं,
तो
RJD
ने
अत्यंत
पिछड़ों
को
साधने
के
लिए
उनको
कैंडिडेट
बनाया
है।

पूर्णिया
के
स्थानीय
वरिष्ठ
पत्रकार
पंकज
नायक
कहते
हैं,
‘पूर्णिया
त्रिकोणीय
मुकाबले
में
फंस
गया
है,
पप्पू
यादव
के
निर्दलीय
लड़ने
के
कारण
ये
सीट
बहुत
दिलचस्प
हो
गई
है।
पिछले
20
सालों
से
कहीं

कहीं
ये
सीट
एनडीए
के
पास
है,
10
साल
पप्पू
सिंह
और
10
साल
संतोष
कुशवाहा
के।

2014
में
पीएम
मोदी
पप्पू
सिंह
के
प्रचार
के
लिए
यहां
आए
थे,
एंटी
इंकम्बेंसी
का
ये
आलम
था
कि
मोदी
लहर
के
बावजूद
पप्पू
सिंह
को
3
लाख
वोटों
से
हार
का
सामना
करना
पड़ा
था
और
जेडीयू
से
संतोष
कुशवाहा
जीते
थे।

इस
बार
फिर
ये
सीट
जेडीयू
के
खाते
में
गई
और
संतोष
कुशवाहा
उम्मीदवार
हैं,
लेकिन
लोगों
में
इस
चेहरे
के
प्रति
मौजूद
एंटी
इंकम्बेंसी
का
लाभ
फिलहाल
कहीं

कहीं
विरोधी
उम्मीदवारों
को
मिल
रहा
है।
महागठबंधन
ने
जो
टिकट
बांटा
है,
खास
तौर
पर
आरजेडी
ने,
उसे
लेकर
विश्लेषक
ये
समझने
में
लगे
हैं
कि
आखिर
इतने
कमजोर
लोगों
को
टिकट
क्यों
दिया
गया
है।

बीमा
भारती
जिस
समाज
से
आती
हैं,
उनका
यहां
पर
बहुत
वोट
बैंक
नहीं
है।
उसके
बावजूद
उनको
यहां
से
टिकट
देना।
जो
पप्पू
यादव
टिकट
मांगने
के
लिए
चलकर
गए
थे,
उनको
कहीं

कहीं
आश्वासन
मिला,
जिसके
बाद
उन्होंने
कांग्रेस
से
कंफर्म
किया।
जब
उनको
फाइनली
टिकट
नहीं
दिया
गया,
तब
उन्होंने
निर्दलीय
चुनाव
लड़ा।
अब
मुकाबला
एनडीए
और
पप्पू
यादव
के
बीच
रह
गया
है।’

“पूर्णिया
लोकसभा
में
70
फीसदी
हिंदू
हैं
और
30
फीसदी
मुस्लिम
हैं।
यहां
तकरीबन
साढ़े
5
लाख
मुस्लिम
हैं,
डेढ़
लाख
यादव
हैं।
यहां
कुल
19
लाख
के
आस-पास
मतदाता
हैं।
पिछली
बार
65
फीसदी
मतदान
हुआ
था।
इस
बार
लग
रहा
कि
मौसम
थोड़ा
गर्म
रहेगा,
तो
इसमें
थोड़ा-बहुत
ऊपर-नीचे
होगा।
पचपनिया
(55
छोटी
जातियों
का
समूह)
वोटर
40
फीसदी
के
आस-पास
हैं
और
वो
दोनों
तरफ
हैं।
एनडीए
की
तरफ
इसलिए
है,
क्योंकि
उनको
अनाज
मिल
रहा
है।,

-पंकज
नायक
के
मुताबिक,
दूसरी
तरफ
पप्पू
यादव
लोगों
से
कनेक्ट
कर
रहे
हैं,
तो
इनके
पास
भी
जाएंगे।
लेकिन,
मुस्लिम
और
यादव
आज
की
तारीख
में
पप्पू
यादव
के
साथ
इंटैक्ट
दिख
रहे
हैं।
अपर
कास्ट
वोटर्स
में
70:30
रेशियो
है।
चूंकि
पप्पू
यादव
कांग्रेस
में
गए
हैं
और
आज
भी
कह
रहे
हैं
कि
26
अप्रैल
के
बाद
कांग्रेस
का
प्रचार
करेंगे,
तो
60
साल
से
ज्यादा
उम्र
के
ब्राह्मण
वोटरों
को
लग
रहा
है
कि
अगर
ये
चुनाव
जीत
जाएं
तो
आने
वाले
समय
में
पप्पू
यादव
कांग्रेस
का
बड़ा
चेहरा
होंगे।

उम्रदराज
ब्राह्मणों
को
इस
बार
पप्पू
यादव
में
अपना
नेता
नजर

रहा
है।
इसलिए
हो
सकता
है
कि
30
फीसदी
सवर्ण
वोटर
पप्पू
यादव
की
तरफ
शिफ्ट
हो
जाए।

पंकज
नायक
ने
कहा-
‘जब
पप्पू
यादव
मधेपुरा
विधानसभा
का
चुनाव
बुरी
तरह
से
हारे,
तो
उन्हें
लगा
कि
मधेपुरा
में
उनके
लिए
कुछ
बचा
हुआ
नहीं
है।
इस
बीच
पटना
की
बाढ़
उनके
लिए
मनचाही
मुराद
जैसी
साबित
हुई,
जिस
तरह
से
उन्होंने
काम
किया,
उसका
इम्पैक्ट
पूरे
बिहार
और
खासतौर
पर
पूर्णिया
के
लोगों
पर
पड़ा।

पप्पू
यादव
को
कोरोना
के
समय
दवाइयां
उपलब्ध
कराने
से
लेकर
श्मशान
घाटों
पर
घूमते
हुए
देखा
होगा।
जो
ग्रामीण
परिवेश
के
लोग
हैं,
उनको
ये
बात
समझ

रही
है
कि
ये
नेता
मुसीबत
में
खड़ा
रहने
वाला
है।
जहां
बाकी
नेता
अपने
घर
में
खुद
को
सुरक्षित
किए
हुए
थे,
उस
समय
पप्पू
यादव
घूम
रहे
थे।
पिछले
6
महीने
में
पप्पू
यादव
ने
लोगों
के
बीच
जाकर
पर्सनल
कनेक्ट
किया
है,
बूथ
लेवल
पर
काम
किया।
बाकी
उम्मीदवारों
को
फीलगुड
हो
सकता
है,
लेकिन
ये
फीलगुड
में
बिल्कुल
नहीं
हैं,
ये
जमीनी
तौर
पर
मेहनत
करते
दिखते
हैं।

एंटी
इंकम्बेंसी
नैचुरल
है,
अगर
कोई
10
साल
से
लगातार
हो।
आप
कुछ
भी
दिए
हों,
उसके
बावजूद
ये
रहता
ही
है।
मुस्लिम
और
यादव
पिछले
20
साल
से
खुद
को
हाशिेए
पर
पा
रहे
थे,
पप्पू
यादव
के

जाने
के
बाद
उनको
ये
लग
रहा
कि
अब
हमारा
नेता
हमारे
बीच
है।

छोटी-छोटी
चीजें
होती
हैं,
ब्लॉक
में
किसी
का
काम
नहीं
हो
पा
रहा
है,
थाने
में
कोई
काम
है,
उसके
लिए
यहां
नेताओं
की
मौजूदगी
नहीं
थी।
बिहार
में
अफसरशाही
है,
ऐसे
में
लोगों
को
लग
रहा
है
कि
पप्पू
यादव
बड़ा
चेहरा
हो
सकते
हैं।’

सीनियर
जर्नलिस्ट
पंकज
नायक
कहते
हैं
कि
पप्पू
यादव
का
पहले
लालू
यादव
के
पास
जाना
और
उसके
बाद
दिल्ली
जाना,
ये
कहीं

कहीं
पप्पू
यादव
के
फेवर
में
गया
है।
यादवों
में
ये
चर्चा
है
कि
आखिर
यादव
समाज
से
आने
वाले
एक
अच्छे
उम्मीदवार
पप्पू
यादव
चलकर
जाते
हैं
और
आप
उनको
टिकट
नहीं
देते
हैं।

उनकी
जगह
आप
ऐसे
उम्मीदवार
को
टिकट
दे
रहे
हैं,
जिनकी
अभी
यहां
से
सीट
निकालने
की
ताकत
नहीं
है।
ऐसे
में
उनको
अंदेशा
है
कि
कहीं
ये
परदे
के
पीछे
से
एनडीए
को
मदद
करने
के
मूड
में
तो
नहीं
हैं?
दिल्ली
में
केजरीवाल
कांड
के
बाद
लोगों
के
बीच
चर्चा
है
कि
लालू-तेजस्वी
2024
में
बैक
डोर
से
एनडीए
को
मदद
कर
रहे
हैं,
2025
के
लिए
इनकी
तैयारी
है।


पूर्णिया
में
चुनावी
हवा
का
रुख

लोकसभा
चुनाव
को
लेकर
पूर्णिया
की
जनता
के
मन
में
क्या
है,
ये
जानने
के
लिए
हमारी
टीम
पूर्णिया
लोकसभा
पहुंची।
हमने
पूर्णिया
सीट
के
वोटर्स
का
मिजाज
टटोला।
पूर्णिया
के
कस्बा
में
हमें
होटल
मजदूर
संजय
पासवान
मिले।
संजय
को
प्रधानमंत्री
आवास
योजना
और
मुफ्त
राशन
का
लाभ
मिल
रहा
है,
जिसके
कारण
वो
मोदी
को
फिर
से
प्रधानमंत्री
बनाना
चाहते
हैं।

संजय
कहते
हैं,
‘जो
लोकतंत्र
मजबूत
करे,
उसको
सत्ता
में
देखना
चाहते
हैं।
जो
हमारे
प्रधानमंत्री
हैं,
हमको
वही
चाहिए।
हमारे
कुशवाहा
जी
जीतेंगे।
हम
कभी
नहीं
सोचे
थे
कि
हमारा
घर
बन
जाएगा।
प्रधानमंत्री
जी
का
इंदिरा
आवास
मिला,
बहुत
अच्छा
जीवन
जी
रहे
हैं।
फ्री
में
राशन
मिल
रहा
है
और
क्या
चाहिए।
ये
बहुत
बड़ा
मुद्दा
है।’

वहीं,
बगल
में
मेडिकल
स्टोर
चलाने
वाले
दिलीप
प्रसाद
के
मुताबिक
पूर्णिया
में
लड़ाई
संतोष
कुशवाहा
और
पप्पू
यादव
के
बीच
है
और
वो
महागठबंधन
उम्मीदवार
बीमा
भारती
के
बारे
में
नहीं
जानते।

दिलीप
प्रसाद
ने
कहा-
‘अभी
जेडीयू-बीजेपी
और
पप्पू
यादव
हैं,
दोनों
में
लड़ाई
है,
कहना
मुश्किल
है
कि
क्या
होगा।
आखिरी
समय
तक
देखना
होगा,
अभी
दोनों
का
लहर
चल
रहा
है।
आगे
कौन
निकलेगा,
ये
कहना
मुश्किल
है।
बीमा
भारती
तो
कस्बा
इलाके
में
कभी
आई
भी
नहीं
है।
उनके
बारे
में
उतना
नहीं
सुने
है,
प्रचार
भी
नहीं
है
उनका।
संतोष
जी
काम
ठीक
ही
किए।
पप्पू
यादव
भी
जब
सांसद
थे,
वो
भी
अच्छा
काम
किए
थे।
दोनों
इस
क्षेत्र
के
लिए
काम
किए
हैं।
महंगाई,
बेरोजगारी
से
आम
आदमी
त्रस्त
है,
यही
चुनाव
के
मुख्य
मुद्दे
हैं।’

पूर्णिया
सीट
पर
पीएम
मोदी
की
चुनावी
सभा
भी
हुई,
जिसमें
उन्होंने
एनडीए
प्रत्याशी
संतोष
कुशवाहा
के
लिए
वोट
मांगा।
ये
कयास
लगाए
जा
रहे
हैं
कि
मोदी
की
रैली
के
बाद
संतोष
कुशवाहा
के
पक्ष
में
माहौल
बनेगा।
लेकिन,
खुद
को
बीजेपी
वोटर
बताने
वाले
एनजीओ
वर्कर
रविनेश
पोद्दार
का
कहना
है
कि

हम
चाहते
हैं
कि
मोदी
जी
पूर्ण
बहुमत
से
प्रधानमंत्री
बनें,
लेकिन
पूर्णिया
में
बदलाव
हो।
देश
में
भले
ही
मोदी

जाएं,
मोदी
जी
500
सीट
ले
आएं,
लेकिन
पूर्णिया
में
ऐसा
सांसद
चाहिए
जो
समाज
हित
के
लिए
बात
करे,
युवाओं
के
लिए
बात
करे।

पूर्णिया
मेडिकल
कॉलेज
बन
चुका
है,
लेकिन
कैसी
हालत
है,
सबको
पता
है।
यहां
के
नेता
को
लगता
है
कि
किसी
पार्टी
का
टिकट
लेकर

जाएंगे,
विधायक-सांसद
बन
जाएंगे।
लेकिन,
इस
बार
इस
ट्रेंड
को
बदलना
है।
उनको
ये
एहसास
दिलाना
है
कि
आपको
समाज
हित
के
लिए
बात
करनी
पड़ेगा,
आपको
जनता
के
लिए
बात
करना
पड़ेगा।
आप
मोदी-योगी
के
नाम
पर
कब
तक
वोट
मांगिएगा।
आप
10
साल
सांसद
रहे,
अपने
काम
पर
वोट
मांगिए।”

सोशल
वर्कर
और
बिजनेसमैन
शशि
कुमार
मिठ्ठू
के
मुताबिक,
“बहुत
लोगों
का
कहना
है
कि
मोदी
जी
के
आने
से
माहौल
उलट
गया,
लेकिन
हम
जैसे
लोगों
की
सोच
है
कि
अगर
हमें
यहां
कोई
भी
समस्या
होगी
तो
लोकल
प्रतिनिधि
से
ही
समाधान
मिलेगा

कि
मोदी
जी
के
द्वारा।
जो
अच्छे
उम्मीदवार
होंगे,
हम
उन्हीं
को
वोट
देंगे।

पूर्णिया
सदर
अस्पताल
में
18
मार्च
से
थैलेसीमिया
पीड़ित
125-130
बच्चों
को
ब्लड
नहीं
मिल
पा
रहा
है।
वो
समस्या
किसकी
है,
प्रतिनिधि
की
है।
बीमा
भारती
की
तो
वैसे
कहीं
लहर
दिख
नहीं
रही।
पप्पू
यादव
की
लहर
इसलिए
दिख
रही
है,
क्योंकि
उनकी
गिनती
बिहार
के
एक
अच्छे
सोशल
वर्कर
में
होती
है।
बाढ़
हो
या
कोरोना,
सबमें
उनका
योगदान
देखा
गया
है।
उसको
लेकर
भी
हम
उनको
सपोर्ट
कर
रहे
हैं।
सांसद
से
कोई
नाराजगी
नहीं
है,
लोगों
का
जेडीयू
से
भरोसा
टूट
गया
है।
नीतीश
कुमार
को
पलटूराम
चाचा
भी
बोला
जाता
है।
बहुत
सारे
लोगों
की
सोच
है
कि
हर
बार
सरकार
पलटी
मारती
है
तो
इस
बार
जनता
क्यों
नहीं
पलटी
मार
सकती
है।”

कम्युनिटी
किचन
चलाने
वाले
कुश
कुमार
झा
कहते
हैं,
‘लोग
एक
बदलाव
की
आशा
कर
रहे
हैं
और
सभी
लोग
एकजुट
होकर
वोट
करने
की
सोच
रहे
हैं।
लोग
अब
जाति
और
पार्टी
पॉलिटिक्स
पर
वोट
नहीं
करते।
ये
देखते
हैं
कि
ऐसा
कौन
सा
प्रत्याशी
है
जो
हमारे
लिए
उपयोगी
है।
पूर्णिया
में
ऐसा
कोई
बंदा
नहीं
होगा,
जिसके
दुख
में
पप्पू
यादव
मौजूद
नहीं
रहते
होंगे।
जो
समाज
में
रहकर
काम
करेगा,
हम
लोग
उसको
वोट
करेंगे।
सीमांचल
जैसे
पिछड़े
और
बाढ़
पीड़ित
इलाके
में
पप्पू
यादव
सबसे
मजबूत
आवाज
हैं।

पप्पू
यादव
जब
पूर्णिया
से
सांसद
थे,
उस
समय
24
घंटे
बिजली
रहती
थी।
जब
वो
सांसद
थे
तो
पूर्णिया
को
अलग
पहचान
दिलाई।
उनके
बाद
बने
सांसदों
ने
पूर्णिया
का
उतना
विकास
नहीं
किया।
पूरी
जनता
एकजुट
होकर
उन
पर
विश्वास
जता
रही
है।
दुनिया
में
हर
गलती
की
सजा
होती
है,
वो
अपनी
गलती
की
सजा
भुगत
चुके
हैं।
उनको
एहसास
हो
चुका
है,
वही
सुधारने
के
लिए
वो
फिर
से
पूर्णिया
आए
हैं।
उनकी
पुरानी
छवि
आने
वाले
समय
में
खत्म
होने
वाली
है।
हम
बीजेपी
के
वोटर
हैं,
केंद्र
में
हमें
मोदी
चाहिए,
लेकिन
पूर्णिया
में
पप्पू
चाहिए।’

पप्पू
यादव
को
पसंद
करने
वाले
मतदाताओं
से
इतर
कुछ
वोटर
ऐसे
भी
हैं
जो
पप्पू
यादव
की
आपराधिक
छवि
से
आज
भी
उबर
नहीं
पाए।
एनजीओ
वर्कर
और
खेती-बारी
करने
वाले
विकास
आदित्य
का
मानना
है,
“मुकाबला
त्रिकोणीय
है
और
तीनों
प्रत्याशी
बेहतरीन
तरीके
से
लड़
रहे
हैं।
लेकिन,
जो
पिछले
10
साल
से
पूर्णिया
के
विकास
में
सहभागी
है,
उन्हें
बढ़त
है।
पूर्णिया
के
हित,
बेहतर
स्वास्थ्य
और
सुरक्षा
को
ध्यान
में
रखते
हुए
वैसे
लोगों
को
वोट

करें
जो
पूर्णिया
को
20-25
साल
पीछे
लेकर
चले
जाएं।

पप्पू
यादव
और
बीमा
भारती
पर
आपराधिक
मामले
दर्ज
हैं,
कुख्यात
अपराधी
वाली
क्षवि
है।
यहां
एयरपोर्ट
और
रेलवे
मुद्दे
हैं।
कृषि
आधारित
मक्का
और
मखाना
को
लेकर
जो
काम
होना
था,
वो
भी
बड़ा
मुद्दा
है।
जीएमसीएच,
इंजीनियरिंग
कॉलेज,
कृषि
विश्वविद्यालय
बनने
जैसे
काम
हो
गए
हैं।
पटना
के
बाद
पूर्णिया
दूसरा
ऐसा
जिला
होगा,
जहां
बीच
शहर
से
6
लेन
पास
हुआ
और
बनकर
तैयार
है।”


चुनावी
मुद्दे
क्या
हैं

वरिष्ठ
पत्रकार
और
राजनीति
के
जानकार
पंकज
नायक
कहते
हैं,
‘ये
बात
बड़ी
अटपटी
सी
लगेगी,
इस
बार
चुनावी
मुद्दा
ये
है
कि
कौन
सा
नेता
जनता
के
बीच
में
रहेगा,
कौन
हमेशा
आसानी
से
उपलब्ध
होगा।
बाकी
मुद्दों
पर
चर्चा
ही
नहीं
हो
रही
है।

ऐसा
नहीं
है
कि
पिछले
10
साल
में
पूर्णिया
में
काम
नहीं
हुआ
है।
पूर्णिया
में
6
लेन
सड़कें
हैं,
बड़ा
मेडिकल
कॉलेज
खुला
है।
आज
हम
लोग
एयरपोर्ट
की
बात
कर
रहे
हैं,
जो
तभी
हो
सकता
है
जब
बाकी
इंफ्रास्ट्रक्चर
हो।
लेकिन,
इस
चुनाव
में
मुद्दा
ये
है
कि
हमारे
बीच
कौन
सा
नेता
ज्यादा
समय
दे
रहा
है।
सांसद
बनने
के
बाद
हो
सकता
है
कि
बाकी
जगह
व्यस्तता
होने
की
वजह
से
संतोष
कुशवाहा
क्षेत्र
में
कम
समय
दे
पाते
हों।
इसका
फायदा
कहीं

कहीं
दोनों
विरोधी
उम्मीदवारों
को
हो
रहा
है।

प्रधानमंत्री
अपने
भाषण
में
कह
रहे
थे
कि
यहां
का
मक्का
इथेनॉल
प्लांट
में
इस्तेमाल
होता
है,
तो
ये
पता
करने
का
विषय
है
कि
कितने
मक्के
की
वहां
खरीद
हुई।
जिस
जगह
पर
प्लांट
बना
है,
वहां
आस-पास
के
क्षेत्र
के
लोगों
की
शिकायतें
हैं।
शिकायत
है
कि
इतना
बड़ा
प्लांट
किसी
ऐसे
इंडस्ट्रियल
एरिया
में
लगाया
जाता,
जहां
आम
लोग
परेशान
नहीं
होते।

वहां
जो
रॉ
मैटेरियल
खरीदा
जा
रहा
है,
वो
लोकल
में
खरीदा
जा
रहा
या
नहीं,
किसानों
को
फायदा
मिल
रहा
है
या
नहीं,
ये
जांच
का
विषय
है।
यदि
सरकार
ने
प्लांट
को
सब्सिडी
दी
है
तो
उससे
कितना
रोजगार
यहां
के
लोगों
को
मिला
है,
ये
जांच
का
विषय
है।’

प्रधानमंत्री पूर्णिया में 16 अप्रैल को जनसभा की थी। उन्होंने संविधान, भ्रष्टाचार, राम मंदिर और आतंकवाद पर इंडी गठबंधन को घेरा


प्रधानमंत्री
पूर्णिया
में
16
अप्रैल
को
जनसभा
की
थी।
उन्होंने
संविधान,
भ्रष्टाचार,
राम
मंदिर
और
आतंकवाद
पर
इंडी
गठबंधन
को
घेरा

पंकज
नायक
के
मुताबिक
आम
किसानों
को
अभी
भी
एमएसपी
का
लाभ
नहीं
दिख
रहा
है।
किसान
आज
भी
बिचौलियों
के
हाथ
माल
बेचने
को
मजबूर
हैं।
अभी
मक्का
बिक्री
का
समय
है,
आपको
जानकर
आश्चर्य
होगा
कि
अगर
किसान
को
सेम
डे
पेमेंट
चाहिए
तो
उसको
2-3
परसेंट
कट
बीच
में
काम
करने
वाली
एक
एजेंसी
को
देना
होता
है।
एजेंसी
खरीददार
से
15
दिन
बाद
पूरी
पेमेंट
लेती
है।
किसानों
को
3
परसेंट
का
नुकसान
हो
रहा
है,
क्योंकि
यहां
उस
तरह
की
व्यवस्था
नहीं
हुई
है।
यहां
की
कृषि
मंडी
अव्यवस्थित
है,
10
सालों
से
हम
सुनते
ही

रहे
हैं
कि
बन
जाएगा।

दैनिक
भास्कर
के
पूर्णिया
ब्यूरो
चीफ
मनोहर
कुमार
के
मुताबिक,
‘यहां
अभी
तक
बहुत
बड़े
उद्योग-धंधे
नहीं
लग
पाए
हैं,
फूड
प्रोसेसिंग
लगने
की
बात
हो
रही
थी।
बेरोजगारी
एक
बड़ा
मुद्दा
तो
है
ही।
लोग
पलायन
कर
रहे
हैं,
दिल्ली-पंजाब
मजदूरी
करने
जाते
हैं।
यहां
उद्योग-धंधे
होते
तो
यहां
के
नौजवानों
को
लाभ
मिलता,
वो
यहीं
रहते,
रोजगार
मिलता।
पूर्णिया
एयरपोर्ट
को
लेकर
बड़ा
सामाजिक
आंदोलन
हुआ।

प्रधानमंत्री
ने
कहा
है
कि
जल्द
ही
यहां
से
हवाई
जहाज
उड़ेगा।
रेल
कनेक्टिविटी
का
मसला
है,
यहां
लंबी
दूरी
की
ट्रेन
नहीं
है,
उसको
लेकर
भी
लोग
आंदोलन
करते
रहे
हैं।
NDA
के
लोग
विकास
का
मुद्दा
उठाते
हैं।
उनका
तर्क
है
कि
उनके
चलते
यहां
यूनिवर्सिटी,
मेडिकल
कॉलेज,
इंजीनियरिंग
कॉलेज
आया।
दिल्ली
की
ट्रेन
है,
जन
सेवा
और
जनहित
ट्रेन
की
शुरुआत
की
गई
है।
वो
अपनी
उपलब्धियों
को
गिना
रहे
हैं
कि
उनके
कार्यकाल
में
उनकी
मेहनत
से
हुआ
है।

मक्का
और
मखाना
यहां
की
दो
महत्वपूर्ण
फसलें
हैं,
पूरे
बिहार
का
20
प्रतिशत
यहां
के
किसान
उगाते
हैं।
उसकी
मार्केटिंग
के
लिए
जो
होना
चाहिए,
जो
उद्योग
होना
चाहिए।
जिससे
बाहर
जाने
की
बजाय
उसकी
प्रोसेसिंग
की
व्यवस्था
यहीं
हो,
ये
मुद्दा
है।’

पूर्णिया में मखाने की खेती प्रसिद्ध है।


पूर्णिया
में
मखाने
की
खेती
प्रसिद्ध
है।

स्थानीय
वरिष्ठ
पत्रकार
पंकज
नायक
ने
कहा-
‘पूर्णिया
बस
अड्डे
में
जो
काम
1986
में
हुआ
था,
उसके
बाद
करीब
40
साल
में
एक
नई
ईंट
नहीं
जुड़ी
है।
पूर्णिया
एयरपोर्ट
यहां
की
200
किलोमीटर
के
एरिया
को
कवर
करेगा।
यहां
की
बड़ी
आबादी
जो
काम
करने
के
लिए
खाड़ी
देशों
में
जाती
है,
वो
वापस
मुम्बई
या
दिल्ली
आते
हैं।
अगर
पूर्णिया
एयरपोर्ट
हो
जाये
तो
उनका
समय
और
पैसा
दोनों
बचेगा।

बगल
में
नेपाल
का
नजदीकी
एयरपोर्ट
विराटनगर
है,
वहां
से
कोई
इंटरनेशनल
फ्लाइट
नहीं
उड़ती।
पूर्णिया
एयरपोर्ट
चालू
होगा,
तो
नेपाल
के
लोग
भी
यहां
आएंगे।
रोजगार
भी
बढ़ेगा,
हर
ढंग
से
शहर
बढ़ता
है
इन
चीजों
से।

राजनीतिक
इच्छाशक्ति
की
कमी
के
कारण
देरी
हो
रही
है।
2015
में
इसकी
घोषणा
हुई
थी,
करीब
9
साल
गुजर
गए
हैं।
9
साल
में
ये
मामला
9
कदम
भी
आगे
नहीं
बढ़ा
है।
11
हजार
फीट
का
रनवे
कब
से
बनकर
तैयार
है।
हो
सकता
है
कि
इस्तेमाल

होने
के
चलते
वो
उखड़ना
भी
शुरू
हो
चुका
हो।
2015
के
बाद
दरभंगा
एयरपोर्ट
की
बात
होती
है
और
एक
शख्स
संजय
झा
उसको
चालू
करवा
लेते
हैं।

निशिकांत
दुबे
ने
देवघर
एयरपोर्ट
चालू
करवा
लिया।
अगर
राजनीतिक
इच्छाशक्ति
मजबूत
हो,
तो
काम
हो
सकता
है।
यहां
राजनीतिक
इच्छाशक्ति
ही
खत्म
है,
जिस
कारण
ये
पेंडिंग
है।
स्थानीय
समस्याओं
को
यहां
के
स्थानीय
नेताओं
और
अधिकारियों
को
खत्म
करना
है।
अगर
किसानों
का
कोई
मामला
फंसा
हुआ
है
तो
उसके
लिए
पटना
हाईकोर्ट
उठकर
पूर्णिया
नहीं
आएगा।
जिस
चीज
को
राहुल
कुमार
(पूर्व
जिलाधिकारी)
या
यहां
के
स्थानीय
नेता
ठीक
कर
सकते
थे,
उस
काम
को
भरोसे
पर
छोड़
दिया
गया
है
कि
देखते
हैं
क्या
होता
है।’


खबरें
और
भी
हैं…