

नई
दिल्ली3
मिनट
पहले
-
कॉपी
लिंक

VVPAT
एक
वोट
वेरिफिकेशन
सिस्टम
है,
जिससे
पता
चलता
है
कि
वोट
सही
तरीके
से
गया
है
या
नहीं।
इलेक्ट्रॉनिक
वोटिंग
मशीन
(EVM)
के
वोटों
और
वोटर
वेरिफिएबल
पेपर
ऑडिट
ट्रेल
(VVPAT)
पर्चियों
की
100%
क्रॉस-चेकिंग
की
मांग
पर
सुप्रीम
कोर्ट
आज
(26
अप्रैल)
सुनाएगा।
लाइव
लॉ
के
मुताबिक,
मामले
की
सुनवाई
कर
रहे
दोनों
जज-
जस्टिस
संजीव
खन्ना
और
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
दो
अलग
फैसला
सुनाने
वाले
हैं।
24
अप्रैल
की
सुनवाई
के
बाद
कोर्ट
ने
फैसला
सुरक्षित
रख
लिया
था।
40
मिनट
चली
सुनवाई
में
जस्टिस
संजीव
खन्ना
ने
कहा
था
कि
हम
मेरिट
पर
दोबारा
सुनवाई
नहीं
कर
रहे
हैं।
हम
कुछ
निश्चित
स्पष्टीकरण
चाहते
हैं।
हमारे
कुछ
सवाल
थे
और
हमें
जवाब
मिल
गए।
फैसला
सुरक्षित
रख
रहे
हैं।
अगस्त
2023
में
लगाई
गई
थी
याचिका
VVPAT
पर्चियों
की
100%
वेरिफिकेशन
को
लेकर
एक्टिविस्ट
अरुण
कुमार
अग्रवाल
ने
अगस्त
2023
में
याचिका
लगाई
गई
थी।
याचिका
में
कहा
गया
कि
वोटर्स
को
VVPAT
की
पर्ची
फिजिकली
वेरिफाई
करने
का
मौका
दिया
जाना
चाहिए।
वोटर्स
को
खुद
बैलट
बॉक्स
में
पर्ची
डालने
की
सुविधा
मिलनी
चाहिए।
इससे
चुनाव
में
गड़बड़ी
की
आशंका
खत्म
हो
जाएगी।
इस
केस
में
याचिकाकर्ताओं
की
तरफ
से
एडवोकेट
प्रशांत
भूषण,
गोपाल
शंकरनारायण
और
संजय
हेगड़े
पैरवी
कर
रहे
हैं।
प्रशांत
एसोसिएशन
ऑफ
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म्स
(ADR)
की
तरफ
से
हैं।
वहीं,
चुनाव
आयोग
की
ओर
से
अब
तक
एडवोकेट
मनिंदर
सिंह,
अफसरों
और
केंद्र
सरकार
की
ओर
सॉलिसिटर
जनरल
तुषार
मेहता
मौजूद
रहे
हैं।

पिछली
सुनवाई
में
कोर्ट
ने
EC
से
पूछा
था-
क्या
वोटर्स
को
VVPAT
पर्ची
नहीं
दी
जा
सकती
इससे
पहले
18
अप्रैल
को
जस्टिस
संजीव
खन्ना
और
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
की
बेंच
ने
5
घंटे
वकीलों
और
चुनाव
आयोग
की
दलीलें
सुनने
के
बाद
फैसला
सुरक्षित
रखा
था।
पिछली
सुनवाई
में
कोर्ट
ने
चुनाव
आयोग
से
पूछा
था
कि
क्या
वोटिंग
के
बाद
वोटर्स
को
VVPAT
से
निकली
पर्ची
नहीं
दी
जा
सकती
है।
इस
पर
चुनाव
आयोग
ने
कहा
था
वोटर्स
को
VVPAT
स्लिप
देने
में
बहुत
बड़ा
रिस्क
है।
इससे
वोट
की
गोपनीयता
से
समझौता
होगा
और
बूथ
के
बाहर
इसका
दुरुपयोग
किया
जा
सकता
है।
इसका
इस्तेमाल
दूसरे
लोग
कैसे
कर
सकते
हैं,
हम
नहीं
कह
सकते।
कोर्ट
ने
स्वतंत्र
और
निष्पक्ष
चुनाव
सुनिश्चित
करने
के
लिए
अपनाए
गए
कदमों
के
बारे
में
चुनाव
आयोग
के
वकील
से
EVM
और
VVPAT
की
पूरी
प्रक्रिया
समझी।
साथ
ही
कहा
कि
चुनावी
प्रक्रिया
की
पवित्रता
कायम
रहनी
चाहिए।
शक
नहीं
होना
चाहिए
कि
ये
होना
चाहिए
था
और
हुआ
नहीं।
इसके
बाद
कोर्ट
ने
फैसला
सुरक्षित
रख
लिया।
पूरी
खबर
पढ़ें…

16
अप्रैल
की
सुनवाई
में
सुप्रीम
कोर्ट
ने
भूषण
से
कहा
था-
जर्मनी
के
एग्जाम्पल
यहां
नहीं
चलते
16
अप्रैल
को
हुई
सुनवाई
में
एडवोकेट
प्रशांत
भूषण
ने
दलील
दी
कि
VVPAT
की
स्लिप
बैलट
बॉक्स
में
डाली
जाएं।
जर्मनी
में
ऐसा
ही
होता
है।
इस
पर
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
ने
कहा
कि
वहां
के
एग्जाम्पल
हमारे
यहां
नहीं
चलते।
इसके
अलावा
कोर्ट
ने
चुनाव
आयोग
से
EVM
के
बनने
से
लेकर
भंडारण
और
डेटा
से
छेड़छाड़
की
आशंका
तक
हर
चीज
के
बारे
में
बताने
को
कहा
था।
पूरी
खबर
पढ़ें…
अभी
5
EVM
के
वोटों
का
ही
VVPAT
पर्चियों
से
मिलान
फिलहाल
किसी
भी
निर्वाचन
क्षेत्र
में
5
EVM
के
वोटों
का
ही
VVPAT
पर्चियों
से
मिलान
होता
है।
याचिका
में
कहा
गया
कि
चुनाव
आयोग
ने
लगभग
24
लाख
VVPAT
खरीदने
के
लिए
5
हजार
करोड़
रुपए
खर्च
किए
हैं,
लेकिन
केवल
20,000
VVPAT
की
पर्चियों
का
ही
वोटों
से
वेरिफिकेशन
किया
जा
रहा
है।
भारत
में
VVPAT
मशीन
का
इस्तेमाल
पहली
बार
2014
के
आम
चुनावों
में
किया
गया
था।
इसे
इलेक्ट्रॉनिक्स
कॉर्पोरेशन
ऑफ
इंडिया
लिमिटेड
(ECIL)
और
भारत
इलेक्ट्रॉनिक
लिमिटेड
(BEL)
ने
बनाया
है।
पहले
भी
सुप्रीम
कोर्ट
में
कई
बार
उठा
है
मुद्दा
2019
के
लोकसभा
चुनावों
से
पहले,
21
विपक्षी
दलों
के
नेताओं
ने
भी
सभी
EVM
में
से
कम
से
कम
50
प्रतिशत
VVPAT
मशीनों
की
पर्चियों
से
वोटों
के
मिलान
करने
की
मांग
की
थी।
उस
समय,
चुनाव
आयोग
हर
निर्वाचन
क्षेत्र
में
सिर्फ
एक
EVM
का
VVPAT
मशीन
से
मिलान
करता
था।
8
अप्रैल,
2019
को
मिलान
के
लिए
EVM
की
संख्या
1
से
बढ़ाकर
5
कर
दी
थी।
इसके
बाद
मई
2019
कुछ
टेक्नोक्रेट्स
ने
सभी
EVM
के
VVPAT
से
वेरिफाई
करने
की
मांग
की
याचिका
लगाई
थी,
जिसे
सुप्रीम
कोर्ट
ने
खारिज
कर
दिया
था।
इसके
अलावा
एसोसिएशन
फॉर
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म्स
ने
भी
जुलाई
2023
में
वोटों
के
मिलान
की
याचिका
लगाई
थी।
इसे
खारिज
करते
हुए
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कहा
था-
कभी-कभी
हम
चुनाव
निष्पक्षता
पर
ज्यादा
ही
संदेह
करने
लगते
हैं।
ये
खबरें
भी
पढ़ें…
PM
मोदी-राहुल
के
चुनावी
भाषणों
पर
EC
का
नोटिस:भाषण
में
नफरत
फैलाने
का
आरोप,
भाजपा-कांग्रेस
पार्टी
के
अध्यक्षों
से
29
अप्रैल
तक
जवाब
मांगा

चुनाव
आयोग
(EC)
ने
गुरुवार
को
PM
नरेंद्र
मोदी
और
राहुल
गांधी
के
भाषणों
पर
नोटिस
जारी
किया।
यह
नोटिस
आचार
संहिता
के
उल्लंघन
की
शिकायतों
पर
लोक
प्रतिनिधित्व
कानून
1951
के
सेक्शन
77
के
तहत
इश्यू
किया
गया
है।
चुनाव
आयोग
के
पोल
पैनल
ने
कांग्रेस
और
भाजपा
की
एक-दूसरे
के
खिलाफ
की
गई
शिकायतों
के
आधार
पर
नोटिस
जारी
किया
है।
यह
पहली
बार
है
जब
आयोग
ने
स्टार
प्रचारक
की
जगह
पार्टी
अध्यक्षों
को
नोटिस
जारी
किया
है।
पूरी
खबर
यहां
पढ़ें…
रामदेव-बालकृष्ण
ने
विज्ञापन
केस
में
दूसरा
माफीनामा
छपवाया:सुप्रीम
कोर्ट
ने
कहा
था-
साइज
ऐसा
न
हो
कि
माइक्रोस्कोप
से
पढ़ना
पड़े

पतंजलि,
बाबा
रामदेव
और
बालकृष्ण
ने
बुधवार
(24
अप्रैल)
को
अखबारों
में
एक
और
माफीनामा
छपवाया।
इसमें
बिना
शर्त
कोर्ट
से
माफी
मांगी
गई
है।
पतंजलि
पर
अखबारों
में
विज्ञापन
देकर
एलोपैथी
के
खिलाफ
निगेटिव
प्रचार
करने
का
आरोप
है।
मामले
पर
सुप्रीम
कोर्ट
में
सुनवाई
चल
रही
है।
पतंजलि
ने
बुधवार
को
छपवाए
माफीनामे
में
लिखा-
हमसे
विज्ञापनों
को
प्रकाशित
करने
में
हुई
गलती
के
लिए
ईमानदारी
से
बिना
शर्त
माफी
मांगते
हैं।
ऐसी
गलती
दोबारा
नहीं
होगी।
हम
सावधानी
के
साथ
सुप्रीम
कोर्ट
के
निर्देशों
का
पालन
करने
का
वचन
देते
हैं।
पूरी
खबर
यहां
पढ़ें…
खबरें
और
भी
हैं…