सुप्रीम कोर्ट में EVM-VVPAT के 100% मिलान की मांग खारिज: बैलट पेपर से चुनाव नहीं होंगे; पर कैंडिडेट की शिकायत पर EVM जांच होगी

सुप्रीम कोर्ट में EVM-VVPAT के 100% मिलान की मांग खारिज: बैलट पेपर से चुनाव नहीं होंगे; पर कैंडिडेट की शिकायत पर EVM जांच होगी


नई
दिल्ली
10
मिनट
पहले

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VVPAT एक वोट वेरिफिकेशन सिस्टम है, जिससे पता चलता है कि वोट सही तरीके से गया है या नहीं। - Dainik Bhaskar


VVPAT
एक
वोट
वेरिफिकेशन
सिस्टम
है,
जिससे
पता
चलता
है
कि
वोट
सही
तरीके
से
गया
है
या
नहीं।

सुप्रीम
कोर्ट
ने
बैलट
पेपर
से
चुनाव
कराने
और
इलेक्ट्रोनिक
वोटिंग
मशीन
(EVM)
और
VVPAT
स्लिप
की
100%
क्रॉस-चेकिंग
कराने
से
जुड़ी
याचिकाएं
खारिज
कर
दीं।

लेकिन
एक
बड़ा
फैसला
भी
दिया।
कोर्ट
ने
EVM
के
इस्तेमाल
के
42
साल
के
इतिहास
में
पहली
बार
जांच
का
रास्ता
खोल
दिया।
सुनवाई
शुक्रवार
को
हुई
और
बेंच
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
और
जस्टिस
संजीव
खन्ना
की
थी।
दोनों
ने
एकमत
से
फैसला
सुनाया।


(देश
में
1982
में
पहली
बार
केरल
में
EVM
से
आम
चुनाव
हुए
थे।
सुप्रीम
कोर्ट
में
चुनौती
के
बाद
इन्हें
रद्द
कर
दिया
गया
था।)

इस
केस
में
3
पक्ष
शामिल
थे…एसोसिएशन
फॉर
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म
यानी
याचिकाकर्ता,
चुनाव
आयोग,
सरकार
और
अफसर।
केस
चुनाव
और
मतदान
से
जुड़ा
है
तो
राजनीतिक
पार्टियां
और
आम
जनता
भी
जुड़ी
हुई
है।


केस
और
फैसले
के
असर
को
इन
सभी
पक्षों
के
नजरिए
से
समझते
हैं…


1.
आम
आदमी
यानी
मतदाता

सुप्रीम
कोर्ट
के
इस
फैसले
से
आम
आदमी
की
वोट
देने
की
प्रोसेस
में
कोई
बदलाव
नहीं
होगा।
वोटर
पोलिंग
बूथ
जाएगा।
अंगुली
पर
स्याही
लगेगी।
चुनाव
अधिकारी
कंट्रोल
यूनिट
का
बटन
दबाएगा।
वोटर
बैलट
यूनिट
में
कैंडिडेट
के
नाम
के
सामने
का
बटन
दबाएगा
और
फिर
कुछ
सेकेंड
तक
वीवीपैट
की
लाइट
में
अपनी
पर्ची
देख
सकेगा।


2.
राजनीतिक
पार्टियां
और
कैंडिडेट्स

फैसले
के
बाद
राजनीतिक
पार्टियां
और
कैंडिडेट्स
के
लिए
एक
रास्ता
खुला
है।
वे
EVM
की
जांच
करवा
सकेंगे।
इसे
नीचे
दिए
पॉइंट्स
से
समझिए।

  • दूसरे
    या
    तीसरे
    नंबर
    पर
    आने
    वाले
    किसी
    कैंडिडेट
    को
    शक
    है
    तो
    वह
    रिजल्ट
    घोषित
    होने
    के
    7
    दिन
    के
    भीतर
    शिकायत
    कर
    सकता
    है।
  • शिकायत
    के
    बाद
    EVM
    बनाने
    वाली
    कंपनी
    के
    इंजीनियर्स
    इसकी
    जांच
    करेंगे।
  • किसी
    भी
    लोकसभा
    क्षेत्र
    में
    शामिल
    विधानसभा
    क्षेत्रवार
    की
    टोटल
    EVM’s
    में
    से
    5%
    मशीनों
    की
    जांच
    हो
    सकेगी।
    इन
    5%
    EVM’s
    को
    शिकायत
    करने
    वाला
    प्रत्याशी
    या
    उसका
    प्रतिनिधि
    चुनेगा।
  • इस
    जांच
    का
    खर्च
    कैंडिडेट
    को
    ही
    उठाना
    होगा।
    खर्च
    कितना
    आएगा,
    इसका
    फैसले
    में
    जिक्र
    नहीं
    है।
    लेकिन
    जांच
    पूरी
    होने
    के
    बाद
    चुनाव
    आयोग
    बताएगा
    कि
    जांच
    में
    कुल
    कितना
    खर्च
    आया।
    आयोग
    इसे
    नोटिफाई
    करके
    बताएगा।
  • जांच
    के
    बाद
    अगर
    ये
    साबित
    होता
    है
    कि
    EVM
    से
    छेड़छाड़
    की
    गई
    है
    तो
    शिकायत
    करने
    वाले
    कैंडिडेट
    को
    जांच
    का
    पूरा
    खर्च
    लौटा
    दिया
    जाएगा।


3.
याचिकाकर्ता

उनकी
सभी
याचिकाएं
खारिज
हो
गईं,
लेकिन
EVM
की
जांच
के
आदेश
से
थोड़ी
राहत
मिली।
ADR
के
वकील
प्रशांत
भूषण
ने
कहा
कि
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कई
निर्देश
दिए,
जिसमें
कैंडिडेट्स
के
लिए
शिकायत
और
फिर
जांच
की
बात
भी
है।
इसके
बाद
सभी
याचिकाएं
खारिज
कर
दी
गईं।


4.
चुनाव
आयोग


सुप्रीम
कोर्ट
ने
चुनाव
आयोग
को
3
निर्देश
दिए
हैं।


1.

सिंबल
लोडिंग
प्रक्रिया
के
पूरा
होने
के
बाद
इस
यूनिट
को
सील
कर
दिया
जाए।
सील
की
गई
यूनिट
को
45
दिन
के
लिए
स्ट्रॉन्ग
रूम
में
स्टोर
किया
जाए।


2.

इलेक्ट्रॉनिक
मशीन
से
पेपर
स्लिप
की
गिनती
के
सुझाव
का
परीक्षण
कीजिए।


3.

यह
भी
देखिए
कि
क्या
चुनाव
निशान
के
अलावा
हर
पार्टी
के
लिए
बारकोड
भी
हो
सकता
है।


5.
सरकार

सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
में
सरकार
के
लिए
कोई
निर्देश
नहीं
है।


प्रधानमंत्री
बोले-
यह
फैसला
विपक्ष
के
मुंह
पर
तमाचा

सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
के
दौरान
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
बिहार
के
अररिया
में
चुनावी
सभा
कर
रहे
थे।
उन्होंने
कहा
कि
सर्वोच्च
न्यायालय
का
फैसला
विपक्ष
के
मुंह
पर
करारा
तमाचा
है।
विपक्ष
को
देश
से
माफी
मांगनी
चाहिए।
इन्होंने
बैलेट
पेपर
लूटकर
राज
किया।
ये
EVM
हटाना
चाहते
हैं,
इनके
सपने
चूर-चूर
हो
गए।


चुनाव
आयोग
ने
कहा-
40
बार
अदालतों
ने
याचिकाएं
खारिज
कीं

चुनाव
आयोग
के
अधिकारी
ने
फैसले
के
बाद
कहा
कि
EVM
की
विश्वसनीयता
पर
सवाल
उठाने
वाली
याचिकाओं
को
अदालतें
40
बार
खारिज
कर
चुकी
हैं।
अधिकारी
ने
मुख्य
चुनाव
आयुक्त
राजीव
कुमार
के
बयान
का
जिक्र
किया।
इसमें
राजीव
कुमार
ने
कहा
था
कि
EVMs
100
फीसदी
सुरक्षित
हैं
और
राजनीतिक
दल
भी
यह
जानते
हैं
कि
ये
मशीनें
निष्पक्ष
हैं।
उन्होंने
कहा
था-
EVM
की
वजह
से
ही
राजनीतिक
दल
अस्तित्व
में
आए
हैं।
कई
छोटी
पार्टियां
हैं,
जो
बैलट
पेपर
के
युग
में
शायद
अस्तित्व
में
नहीं
आतीं।


24
अप्रैल
को
कोर्ट
ने
फैसला
सुरक्षित
रख
लिया
था

इससे
पहले
24
अप्रैल
को
40
मिनट
की
सुनवाई
के
बाद
बेंच
ने
फैसला
सुरक्षित
रख
लिया
था।
जस्टिस
संजीव
खन्ना
ने
कहा
था
कि
हम
मेरिट
पर
दोबारा
सुनवाई
नहीं
कर
रहे
हैं।
हम
कुछ
निश्चित
स्पष्टीकरण
चाहते
हैं।
हमारे
कुछ
सवाल
थे
और
हमें
जवाब
मिल
गए
हैं।
फैसला
सुरक्षित
रख
रहे
हैं।


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18
अप्रैल:
कोर्ट
ने
EC
से
पूछा
था-
क्या
वोटर्स
को
VVPAT
पर्ची
नहीं
दी
जा
सकती

इससे
पहले
18
अप्रैल
को
जस्टिस
संजीव
खन्ना
और
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
की
बेंच
ने
5
घंटे
वकीलों
और
चुनाव
आयोग
की
दलीलें
सुनने
के
बाद
फैसला
सुरक्षित
रखा
था।
पिछली
सुनवाई
में
कोर्ट
ने
चुनाव
आयोग
से
पूछा
था
कि
क्या
वोटिंग
के
बाद
वोटर्स
को
VVPAT
से
निकली
पर्ची
नहीं
दी
जा
सकती
है।

इस
पर
चुनाव
आयोग
ने
कहा
था
वोटर्स
को
VVPAT
स्लिप
देने
में
बहुत
बड़ा
रिस्क
है।
इससे
वोट
की
गोपनीयता
से
समझौता
होगा
और
बूथ
के
बाहर
इसका
दुरुपयोग
किया
जा
सकता
है।
इसका
इस्तेमाल
दूसरे
लोग
कैसे
कर
सकते
हैं,
हम
नहीं
कह
सकते।


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16
अप्रैल
की
सुनवाई
में
सुप्रीम
कोर्ट
ने
भूषण
से
कहा
था-
जर्मनी
के
एग्जाम्पल
यहां
नहीं
चलते

16
अप्रैल
को
हुई
सुनवाई
में
एडवोकेट
प्रशांत
भूषण
ने
दलील
दी
कि
VVPAT
की
स्लिप
बैलट
बॉक्स
में
डाली
जाएं।
जर्मनी
में
ऐसा
ही
होता
है।
इस
पर
जस्टिस
दीपांकर
दत्ता
ने
कहा
कि
वहां
के
एग्जाम्पल
हमारे
यहां
नहीं
चलते।
इसके
अलावा
कोर्ट
ने
चुनाव
आयोग
से
EVM
के
बनने
से
लेकर
डेटा
से
छेड़छाड़
की
आशंका
तक
हर
चीज
के
बारे
में
बताने
को
कहा
था।


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अभी
5
EVM
के
वोटों
का
ही
VVPAT
पर्चियों
से
मिलान

फिलहाल
किसी
भी
निर्वाचन
क्षेत्र
में
5
EVM
के
वोटों
का
ही
VVPAT
पर्चियों
से
मिलान
होता
है।
याचिका
में
कहा
गया
कि
चुनाव
आयोग
ने
लगभग
24
लाख
VVPAT
खरीदने
के
लिए
5
हजार
करोड़
रुपए
खर्च
किए
हैं,
लेकिन
केवल
20,000
VVPAT
की
पर्चियों
का
ही
वोटों
से
वेरिफिकेशन
किया
जा
रहा
है।

भारत
में
VVPAT
मशीन
का
इस्तेमाल
पहली
बार
2014
के
आम
चुनावों
में
किया
गया
था।
इसे
इलेक्ट्रॉनिक्स
कॉर्पोरेशन
ऑफ
इंडिया
लिमिटेड
(ECIL)
और
भारत
इलेक्ट्रॉनिक
लिमिटेड
(BEL)
ने
बनाया
है।


पहले
भी
सुप्रीम
कोर्ट
में
कई
बार
उठा
है
मुद्दा

2019
के
लोकसभा
चुनावों
से
पहले,
21
विपक्षी
दलों
के
नेताओं
ने
भी
सभी
EVM
में
से
कम
से
कम
50
प्रतिशत
VVPAT
मशीनों
की
पर्चियों
से
वोटों
के
मिलान
करने
की
मांग
की
थी।
उस
समय,
चुनाव
आयोग
हर
निर्वाचन
क्षेत्र
में
सिर्फ
एक
EVM
का
VVPAT
मशीन
से
मिलान
करता
था।
8
अप्रैल,
2019
को
मिलान
के
लिए
EVM
की
संख्या
1
से
बढ़ाकर
5
कर
दी
थी।

इसके
बाद
मई
2019
कुछ
टेक्नोक्रेट्स
ने
सभी
EVM
के
VVPAT
से
वेरिफाई
करने
की
मांग
की
याचिका
लगाई
थी,
जिसे
सुप्रीम
कोर्ट
ने
खारिज
कर
दिया
था।

इसके
अलावा
एसोसिएशन
फॉर
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म्स
ने
भी
जुलाई
2023
में
वोटों
के
मिलान
की
याचिका
लगाई
थी।
इसे
खारिज
करते
हुए
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कहा
था-
कभी-कभी
हम
चुनाव
निष्पक्षता
पर
ज्यादा
ही
संदेह
करने
लगते
हैं।


अगस्त
2023
में
लगाई
गई
थी
याचिका

VVPAT
पर्चियों
की
100%
वेरिफिकेशन
को
लेकर
एक्टिविस्ट
अरुण
कुमार
अग्रवाल
ने
अगस्त
2023
में
याचिका
लगाई
गई
थी।
याचिका
में
कहा
गया
कि
वोटर्स
को
VVPAT
की
पर्ची
फिजिकली
वेरिफाई
करने
का
मौका
दिया
जाना
चाहिए।
वोटर्स
को
खुद
बैलट
बॉक्स
में
पर्ची
डालने
की
सुविधा
मिलनी
चाहिए।
इससे
चुनाव
में
गड़बड़ी
की
आशंका
खत्म
हो
जाएगी।

इस
केस
में
याचिकाकर्ताओं
की
तरफ
से
एडवोकेट
प्रशांत
भूषण,
गोपाल
शंकरनारायण
और
संजय
हेगड़े
पैरवी
कर
रहे
हैं।
प्रशांत
एसोसिएशन
ऑफ
डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म्स
(ADR)
की
तरफ
से
हैं।
वहीं,
चुनाव
आयोग
की
ओर
से
अब
तक
एडवोकेट
मनिंदर
सिंह,
अफसरों
और
केंद्र
सरकार
की
ओर
सॉलिसिटर
जनरल
तुषार
मेहता
मौजूद
रहे
हैं।


खबरें
और
भी
हैं…