मणिपुर में CRPF के 2 जवान शहीद: मैतेई गांव में कुकी उग्रवादियों ने सेंट्रल फोर्स की चौकी पर बम फेंका, 2 अन्य जवान जख्मी

मणिपुर में CRPF के 2 जवान शहीद: मैतेई गांव में कुकी उग्रवादियों ने सेंट्रल फोर्स की चौकी पर बम फेंका, 2 अन्य जवान जख्मी


इम्फाल
17
मिनट
पहले
लेखक:
एम
मुबासिर
राजी

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शहीद जवानों में एक CRPF के सब इंस्पेक्टर और एक हेड कॉन्स्टेबल हैं। - Dainik Bhaskar


शहीद
जवानों
में
एक
CRPF
के
सब
इंस्पेक्टर
और
एक
हेड
कॉन्स्टेबल
हैं।

मणिपुर
के
बिष्णुपुर
​​​जिले
​​के
​नारानसैना
इलाके
में
शुक्रवार
(26
अप्रैल)
देर
रात
कुकी
उग्रवादियों
के
हमले
में
CRPF
के
दो
जवान
शहीद
हो
गए।
दो
घायल
हैं।
मृतक
जवानों
की
पहचान
एन
साकार
और
अरूप
सैनी
के
रूप
में
की
गई
है।

मणिपुर
पुलिस
ने
बताया
कि
कुकी
समुदाय
के
उग्रवादियों
​​​​​ने
देर
रात
12:45
बजे
से
लेकर
2:15
बजे
के
दौरान
मैतेई
गांव
की
ओर
फायरिंग
की।
उग्रवादियों
ने
बम
भी
फेंके।
इस
दौरान
नारानसैना
में
CRPF
की
चौकी
के
अंदर
बम
गिरने
से
धमाका
हो
गया।

इसमें
CRPF
की
128वीं
बटालियन
के
इंस्पेक्टर
जादव
दास,
सब
इंस्पेक्टर
एन
सरकार,
हेड
कॉन्स्टेबल
अरूप
सैनी
और
कॉन्स्टेबल
आफताब
हुसैन
घायल
हो
गए।
इनमें
एन
साकार
और
अरूप
सैनी
की
मौत
हो
गई।

बिष्णुपुर
जिला
इनर
मणिपुर
लोकसभा
क्षेत्र
में
आता
है।
यहां
19
अप्रैल
को
पहले
फेज
की
वोटिंग
के
दौरान
हिंसा
हुई
थी।
इसमें
3
लोग
घायल
हुए
थे।
26
अप्रैल
को
आउटर
मणिपुर
सीट
के
लिए
कुछ
इलाकों
में
वोटिंग
हुई
थी।
वोटिंग
खत्म
होने
के
कुछ
घंटों
बाद
CRPF
जवानों
पर
हमला
हुआ।

यह तस्वीर CRPF के एक घायल जवान की है। हमले में घायल इंस्पेक्टर जादव दास और कॉन्स्टेबल आफताब का रिम्स अस्पताल में इलाज चल रहा है।


यह
तस्वीर
CRPF
के
एक
घायल
जवान
की
है।
हमले
में
घायल
इंस्पेक्टर
जादव
दास
और
कॉन्स्टेबल
आफताब
का
रिम्स
अस्पताल
में
इलाज
चल
रहा
है।

तस्वीर बम धमाके के बाद CRPF की चौकी के अंदर की है। मणिपुर पुलिस ने दो बम ब्लास्ट की पुष्टि की है।


तस्वीर
बम
धमाके
के
बाद
CRPF
की
चौकी
के
अंदर
की
है।
मणिपुर
पुलिस
ने
दो
बम
ब्लास्ट
की
पुष्टि
की
है।


इस
साल
मणिपुर
में
सुरक्षाबलों
पर
हमले
की
दो
अन्य
घटनाएं…


15
फरवरी:
​​​​​भीड़
ने
SP
ऑफिस
पर
हमला
किया,
2
नागरिकों
की
मौत

मणिपुर के चुराचांदपुर में 15 फरवरी को 300-400 लोगों की भीड़ ने SP और DC ऑफिस पर हमला किया था।


मणिपुर
के
चुराचांदपुर
में
15
फरवरी
को
300-400
लोगों
की
भीड़
ने
SP
और
DC
ऑफिस
पर
हमला
किया
था।

मणिपुर
के
चुराचांदपुर
जिले
में
15
फरवरी
को
हिंसा
हुआ
थी,
जिसमें
2
लोगों
की
मौत
हो
गई
थी।
एक
पुलिस
कॉन्स्टेबल
को
सस्पेंड
करने
के
विरोध
में
300-400
लोगों
की
भीड़
ने
देर
रात
SP
और
DC
ऑफिस
पर
हमला
कर
दिया
था।

भीड़
ने
पथराव
और
आगजनी
की।
घटना
में
40
से
ज्यादा
लोग
घायल
हुए
थे।
चुराचांदपुर
कुकी-जो
जनजाती
बहुल
क्षेत्र
है।
यह
राजधानी
इम्फाल
से
65
किलोमीटर
दूर
है।
मणिपुर
हिंसा
में
चुराचांदपुर
सबसे
अधिक
प्रभावित
क्षेत्रों
में
से
एक
था।


पूरी
खबर
पढ़ें…


17
जनवरी:
मोरेह
में
सुरक्षाबलों
की
गाड़ी
पर
हमला,
दो
जवान
सहित
3
की
मौत

मणिपुर
के
मोरेह
इलाके
में
उग्रवादियों
ने
सुरक्षाबलों
की
गाड़ी
पर
हमला
कर
दिया।
इसमें
दो
जवानों
की
मौत
हो
गई।
इसके
अलावा
एक
कुकी
समुदाय
की
महिला
की
जान
चली
गई।
हमलावर
कुकी
समुदाय
के
बता
गए
थे।

उपद्रवियों
ने
मोरेह
SBI
के
पास
सुरक्षाबलों
की
एक
चौकी
पर
बम
फेंके
और
गोलीबारी
की
थी।
उग्रवादियों
ने
अस्थायी
कमांडो
पोस्ट
पर
गोले
भी
दागे,
जिससे
आसपास
खड़े
कई
वाहन
क्षतिग्रस्त
हो
गए।


पूरी
खबर
पढ़ें…


राज्य
में
पिछले
साल
से
हिंसा
जारी,
200
से
ज्यादा
मौतें

मणिपुर
में
पिछले
साल
3
मई
से
कुकी
और
मैतेई
समुदाय
के
बीच
आरक्षण
को
लेकर
हिंसा
चल
रही
है।
राज्य
में
अब
तक
हुई
हिंसा
की
घटनाओं
में
200
से
ज्यादा
लोगों
की
मौत
हो
चुकी
हैं।
1100
से
ज्यादा
लोग
घायल
हुए
हैं।
65
हजार
से
ज्यादा
लोग
अपना
घर
छोड़
चुके
हैं।


4
पॉइंट्स
में
जानिए
क्या
है
मणिपुर
हिंसा
की
वजह…

मणिपुर
की
आबादी
करीब
38
लाख
है।
यहां
तीन
प्रमुख
समुदाय
हैं-
मैतेई,
नगा
और
कुकी।
मैतई
ज्यादातर
हिंदू
हैं।
नगा-कुकी
ईसाई
धर्म
को
मानते
हैं।
ST
वर्ग
में
आते
हैं।
इनकी
आबादी
करीब
50%
है।
राज्य
के
करीब
10%
इलाके
में
फैली
इंफाल
घाटी
मैतेई
समुदाय
बहुल
ही
है।
नगा-कुकी
की
आबादी
करीब
34
प्रतिशत
है।
ये
लोग
राज्य
के
करीब
90%
इलाके
में
रहते
हैं।


कैसे
शुरू
हुआ
विवाद:

मैतेई
समुदाय
की
मांग
है
कि
उन्हें
भी
जनजाति
का
दर्जा
दिया
जाए।
समुदाय
ने
इसके
लिए
मणिपुर
हाई
कोर्ट
में
याचिका
लगाई।
समुदाय
की
दलील
थी
कि
1949
में
मणिपुर
का
भारत
में
विलय
हुआ
था।
उससे
पहले
उन्हें
जनजाति
का
ही
दर्जा
मिला
हुआ
था।
इसके
बाद
हाई
कोर्ट
ने
राज्य
सरकार
से
सिफारिश
की
कि
मैतेई
को
अनुसूचित
जनजाति
(ST)
में
शामिल
किया
जाए।


मैतेई
का
तर्क
क्या
है:

मैतेई
जनजाति
वाले
मानते
हैं
कि
सालों
पहले
उनके
राजाओं
ने
म्यांमार
से
कुकी
काे
युद्ध
लड़ने
के
लिए
बुलाया
था।
उसके
बाद
ये
स्थायी
निवासी
हो
गए।
इन
लोगों
ने
रोजगार
के
लिए
जंगल
काटे
और
अफीम
की
खेती
करने
लगे।
इससे
मणिपुर
ड्रग
तस्करी
का
ट्राएंगल
बन
गया
है।
यह
सब
खुलेआम
हो
रहा
है।
इन्होंने
नागा
लोगों
से
लड़ने
के
लिए
आर्म्स
ग्रुप
बनाया।


नगा-कुकी
विरोध
में
क्यों
हैं:

बाकी
दोनों
जनजाति
मैतेई
समुदाय
को
आरक्षण
देने
के
विरोध
में
हैं।
इनका
कहना
है
कि
राज्य
की
60
में
से
40
विधानसभा
सीट
पहले
से
मैतेई
बहुल
इंफाल
घाटी
में
हैं।
ऐसे
में
ST
वर्ग
में
मैतेई
को
आरक्षण
मिलने
से
उनके
अधिकारों
का
बंटवारा
होगा।


सियासी
समीकरण
क्या
हैं:

मणिपुर
के
60
विधायकों
में
से
40
विधायक
मैतेई
और
20
विधायक
नगा-कुकी
जनजाति
से
हैं।
अब
तक
12
CM
में
से
दो
ही
जनजाति
से
रहे
हैं।


खबरें
और
भी
हैं…