‘पर्ची वाले मुख्यमंत्री’ पर मोहन यादव का जवाब: मुझे किसी विधायक, मंत्री ने चैलेंज नहीं किया; पटवारी अपनी पार्टी देखें

‘पर्ची वाले मुख्यमंत्री’ पर मोहन यादव का जवाब: मुझे किसी विधायक, मंत्री ने चैलेंज नहीं किया; पटवारी अपनी पार्टी देखें


भोपाल
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डॉ.
मोहन
यादव
मुख्यमंत्री
बनने
के
चार
महीने
बाद
ही
अपने
राजनीतिक
करियर
की
अब
तक
की
सबसे
बड़ी
चुनावी
परीक्षा
दे
रहे
हैं।
उन
पर
प्रदेश
की
सभी
29
लोकसभा
सीटें
जिताने
की
जिम्मेदारी
है,
यानी
100%
मार्क्स
लाने
की।

2019
के
चुनाव
में
सिर्फ
छिंदवाड़ा
को
छोड़कर
बाकी
सभी
28
सीटें
भाजपा
ने
जीती
थीं।
छिंदवाड़ा
में
वोटिंग
हो
चुकी
है।
प्रतिष्ठा
का
सवाल
बनी
इस
सीट
के
लिए
भाजपा
ने
अपनी
पूरी
ताकत
झोंक
दी।
इतनी
कि
डॉ.
यादव
प्रचार
के
लिए
10
दिन
और
दो
रातें
छिंदवाड़ा
में
ही
रहे।
वे
दावा
करते
हैं-
‘छिंदवाड़ा
सीट
भी
हमारे
हाथ
में

गई
है।’

लगातार
चुनावी
दौरे
और
रणनीतिक
बैठकों
के
बीच
डॉ.
यादव
ने

दैनिक
भास्कर

से
खास
बातचीत
में
कैलाश
विजयवर्गीय
और
प्रहलाद
पटेल
जैसे
सीनियर
नेताओं
से
तालमेल,
टिकट
वितरण
और
कांग्रेस
के
‘पर्ची
वाले
सीएम’
के
आरोप
पर
जवाब
दिए..


सवाल-
पिछले
चुनाव
में
पार्टी
28
सीटें
जीती
थी।
आपकी
मार्किंग
28
सीट
से
शुरू
होगी,
ऐसे
में
100
प्रतिशत
मार्क्स
यानी
सभी
29
सीटें
कैसे
लाएंगे?
जवाब

एक
मात्र
छिंदवाड़ा
सीट
है
जहां
1977
से
आज
तक
एक
बार
पटवा
जी
को
छोड़
दें
तो
लगातार
कांग्रेस
जीतती
रही
है,
लेकिन
इस
बार
जिस
तरह
हमने
मेहनत
की
और
छिंदवाड़ा
की
जनता
ने
जो
रिस्पॉन्स
दिया
उसे
देखते
हुए
मुझे
लग
रहा
है
कि
छिंदवाड़ा
सीट
भी
हमारे
हाथ
में

गई
है।


सवाल-
छिंदवाड़ा
के
लिए
क्या
खास
रणनीति
बनाई
गई
थी?
जवाब

छिंदवाड़ा
के
लिए
क्या
रणनीति
बनाएं।
एक
ही
परिवार
45
साल
से
लगातार
काबिज
है।
आठ
बार
एक
ही
व्यक्ति
को
टिकट
दे
दो,
नौवीं
बार
उनकी
पत्नी
को,
दसवीं
बार
बेटे
को,
ग्यारहवीं
बार
फिर
बेटा,
फिर
नाती-पोते
आएंगे।

सांसद
है
या
विरासत
की
कोई
प्रॉपर्टी।
लोकल
सांसद
क्यों
नहीं
होना
चाहिए।
पूरे
देश
में
हर
जगह
लोकल
सांसद
है,
सिर्फ
छिंदवाड़ा
में
नहीं
है,
लोगों
को
यह
बात
जंची।


सवाल-
विधानसभा
चुनाव
में
छिंदवाड़ा
संसदीय
क्षेत्र
की
सातों
सीटें
कांग्रेस
ने
जीती
थीं।
चार
महीने
में
ऐसा
क्या
हुआ
कि
आप
अब
जीत
का
दावा
कर
रहे
हैं?
जवाब

दो
बातें
हैं,
जनता
का
एप्रिसिएशन
और
मोदी
जी
की
लोकप्रियता।
यदि
हम
इस
विधानसभा
चुनाव
में
वोट
प्रतिशत
देखेंगे
तो
48
प्रतिशत
भाजपा
को
मिले,
जबकि
2019
लोकसभा
में
58
प्रतिशत
मिले
थे।
PM
मोदी
ने
देश
में
काम
करते-करते
एक
विशेष
पहचान
बनाई
है,
साख
बनाई
है,
लोग
मोदी
जी
से
जुड़ना
चाहते
हैं,
उनके
साथ
जाना
चाहते
हैं।


सवाल-
इस
बार
दिग्विजय
सिंह
के
कारण
राजगढ़
में
क्या
चुनौती
नहीं
है?
जवाब

कतई
नहीं।
वैचारिक
दृष्टि
से
कोई
जिला
मजबूत
है
तो
वह
राजगढ़
है,
जहां
हिंदुत्व
और
भाजपा
की
आइडियोलॉजी
को
लेकर
पंचायत
स्तर
तक
लोग
मौजूद
हैं।
वहां
हमारी
विचारधारा
का
विरोधी
लड़
रहा
है
तो
स्वत:
ही
वातावरण
काम
कर
रहा
है।

ध्यान
दीजिए,
इसी
कारण
कांग्रेस
के
जो
चुनाव
लड़
रहे
हैं,
वे
एक
भी
ऐसा
बयान
नहीं
दे
रहे
हैं
जो
उनकी
पुरानी
पहचान
को
कायम
रखता
हो।
इससे
उलट
वे
कभी
संघ
की
प्रशंसा
कर
रहे
हैं,
कभी
प्रचारक
की।

ये
वो
तरीके
हैं
जिससे
मतदाताओं
की
आंख
में
धूल
झोंकी
जा
सके,
लेकिन
मुझे
पूरा
भरोसा
है
जनता
उन्हें
जानती
है,
उनके
बयानों
को
जानती
है,
इसलिए
राजगढ़
की
जनता
उनके
चक्कर
में
नहीं
आएगी।


सवाल-
आपने
तो
उन्हें
रामद्रोही
भी
कहा
है?
जवाब

मेरा
तो
इतना
ही
कहना
है
कि
सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
के
बाद
भी
वे
कहें
कि
वहां
राम
मंदिर
बनाने
की
हमारी
इच्छा
नहीं
थी।
ढांचा
तोड़ना
था,
जगह
पर
कब्जा
करना
था।
इसे
आप
क्या
कहेंगे?
भगवान
राम
का
मंदिर
बनाने
में
कांग्रेस
एक
के
बाद
एक
कई
अड़ंगे
लगाती
रही।

उनकी
भाषा,
मंदिर
निर्माण
और
कार
सेवकों
के
प्रति
व्यवहार,
उन्हें
यातना
देना..
आखिर
यह
सब
बातें
उन्होंने
ही
कही
है।
ऐसे
में
उन्हें
क्या
रामजी
की
जय-जयकार
करने
वाला
बोलूं।


सवाल-
लोकसभा
चुनाव
में
किसी
विधायक
को
नहीं
उतारने
के
पीछे
कोई
खास
रणनीति?
जवाब

पार्टी
का
स्पष्ट
मानना
है
जब
विधायक
निर्वाचित
हो
गए
हैं
तो
बार-बार
एक
ही
व्यक्ति
को
क्यों
लड़ाना।
उनसे
कहा
गया
है
कि
आपको
जो
जवाबदारी
मिली
वह
कीजिए।


सवाल-
यह
सवाल
इसलिए
उठा
कि
विधानसभा
चुनाव
में
कई
सांसदों
को
उतारा
था?
जवाब

मैं
दोबारा
कहूंगा
कि
जिन्होंने
सांसदी
छोड़ी
और
वे
विधायक
बन
गए
उनमें
से
किसी
एक
को
भी
टिकट
नहीं
दिया,
इसलिए
कि
अब
जो
जिम्मेदारी
मिली
है,
उसे
निभाएं।


सवाल-
मध्यप्रदेश
में
कौन
सा
मुद्दा
और
फैक्टर
चुनाव
परिणाम
को
तय
करेगा?
जवाब

सबसे
बड़ा
मुद्दा
यही
है
कि
कांग्रेस
ने
गलत
मेनिफेस्टो
दिया
है।
कांग्रेस
ने
खुद
को
एक
वर्ग
के
साथ
खड़ा
करने
की
गलती
की
है,
कांग्रेस
को
इसकी
कीमत
चुकानी
पड़ेगी।
कांग्रेस
एक
बार
अपने
अंदर
झांककर
देखे।
अपने
संगठन
का
ढांचा
मजबूत
करे।
हमारा
संगठन
ढांचा
मजबूत
है,
इसलिए
हम
सभी
सीटें
जीत
रहे
हैं।


सवाल-
दूसरे
दलों
के
नेताओं
को
इतनी
बड़ी
संख्या
में
भाजपा
में
शामिल
करने
से
क्या
भाजपा
का
इको
सिस्टम
प्रभावित
नहीं
होगा?
जवाब

कतई
नहीं
होगा।
मैं
उदाहरण
देता
हूं,
ज्योतिरादित्य
सिंधिया
जब
आए
थे,
तब
कितनी
अटकलें
चली
थीं
कि
दो
दिन
के
हैं..
चार
दिन
के
हैं..,
चलेंगे..,
नहीं
चलेंगे..
इनके
साथ
बड़ी
संख्या
में
लोग
आए
उनका
क्या
होगा?
सभी
को
हमने
पचाया
कि
नहीं
पचाया?

हेमंत
बिस्वा
सरमा
जैसे
तमाम
लोग
जो
भाजपा
से
जुड़े,
वे
हमारे
खांटी
लोगों
से
बढ़कर
काम
कर
रहे
हैं।
भाजपा
इस
मामले
में
बहुत
उदार
भी
है
और
भाजपा
का
अपना
नेटवर्क
भी
है।
हमारा
ट्रेनिंग
प्रोग्राम
भी
चलता,
इसलिए
हमारे
यहां
जो
भी
आते
हैं
रच-बस
जाते
हैं।
दूध
में
शक्कर
की
तरह
मिल
जाते
हैं।


सवाल-
पार्टी
के
कुछ
लोग
खुश
नहीं
हैं,
जैसे
नागौद
में
कांग्रेस
के
विधायक
रहे
यादवेंद्र
सिंह
को
भाजपा
में
लाने
से
पूर्व
मंत्री
नागेंद्र
सिंह
नाराज
बताए
जाते
हैं
और
कार्यक्रमों
में
नहीं

रहे
हैं?
जवाब

इसकी
मुझे
जानकारी
नहीं
है।


सवाल-
कांग्रेस
से
भाजपा
में
आए
पूर्व
मंत्री
दीपक
सक्सेना
भी
कह
चुके
हैं
कि
कमलनाथ
यदि
चुनाव
लड़ेंगे
तो
उनके
साथ
रहूंगा‌।
जवाब

स्पष्ट
बोलना
ही
चाहिए।
इसमें
कोई
गलत
भी
नहीं
है।
कमलनाथ
की
इसी
कार्यप्रणाली
का
विरोध
करने
तो
वे
आए
हैं।
पत्नी
को
फिर
बेटे
को
टिकट।
एक
बार
वो
खुद
लड़ें
तो
सम्मान
करेंगे।
आपके
बच्चों
को
भी
मानेंगे..
बच्चों
के
बच्चों
को
भी
मानेंगे..
ये
क्या
बात
हुई।


सवाल-
प्रदेश
कांग्रेस
अध्यक्ष
जीतू
पटवारी
सभाओं
में
कह
रहे
हैं
कि
मुख्यमंत्री
के
चयन
में
विधायकों
की
राय
नहीं
ली
गई।
दिल्ली
से
पर्ची
आई
और
मुख्यमंत्री
बना
दिया?
जवाब

मैं
क्या
बोलूं?
वो
कैसे
बने
उनको
मालूम
नहीं
क्या?
उनके
लिए
किससे
राय
ली
गई?
उन्हें
छोड़कर
लोग
क्यों
जा
रहे
हैं?
उन्हें
अध्यक्ष
ही
नहीं
मान
रहे
हैं।
मुझे
तो
किसी
विधायक,
मंत्री
किसी
ने
भी
चैलेंज
नहीं
किया,
लेकिन
वो
अपनी
पार्टी
को
ही
नहीं
संभाल
पा
रहे
हैं।
वे
पहले
अपना
घर
देख
लें।


सवाल-
नेता
प्रतिपक्ष
उमंग
सिंघार
ने
कहा
कि
बिहार
और
उत्तर
प्रदेश
के
यादवों
को
साधने
के
लिए
आपको
मुख्यमंत्री
बनाया?
जवाब

यह
दृष्टिकोण
केवल
कांग्रेस
का
हो
सकता
है।
कांग्रेस
के
दिमाग
में
जातियां
रहती
हैं।
ये
कांग्रेस
का
राजनीति
करने
का
तरीका
है।
यह
भाजपा
में
नहीं
होता।
मेरे
अपने
विधानसभा
क्षेत्र
में
500
यादव
भी
नहीं
हैं,
लेकिन
पार्टी
लगातार
टिकट
दे
रही
है,
मैं
जीत
कर

रहा
हूं।
जिस
भी
व्यक्ति
को
जो
काम
मिल
जाए
उसे
अच्छी
तरह
से
करके
देना
यह
हमारी
परंपरा
है।


सवाल-
राहुल
गांधी
ने
मध्यप्रदेश
के
दौरे
में
कहा
कि
जहां
50
प्रतिशत
से
ज्यादा
आदिवासी
हैं,
वहां
छठी
अनुसूची
लागू
होगी?
जवाब
-​​​​​​​
राहुल
गांधी
की
दिक्कत
यह
है
कि
उन्हें
खुद
मालूम
नहीं
कि
वे
क्या
कह
रहे
हैं।
एक
बयान
दिया
था
कि
एक
झटके
में
गरीबी
दूर
कर
दूंगा।
10
साल
उनकी
मम्मी
ने
पर्दे
के
पीछे
से
सरकार
चलाई,
तब
गरीबी
दूर
नहीं
कर
पाए।
पांच
साल
उनके
पापा
ने
सरकार
चलाई।
17
साल
उनकी
दादी
ने
सरकार
चलाई।
18
साल
उनके
परनाना
ने
सरकार
चलाई।
वे
गरीबी
दूर
नहीं
कर
पाए।

2018
के
चुनाव
में
नीमच
में
उन्होंने
1,2,3…
बोलते
हुए
कहा
था
कि
10
दिन
के
अंदर
कर्जा
माफ
नहीं
हुआ
तो
मुख्यमंत्री
बदल
दूंगा।
15
महीने
उनके
मुख्यमंत्री
रहे,
क्या
मुख्यमंत्री
को
बदला?
उनके
बोलने
का
वजन
नहीं
है।
वे
एक
तरह
से
दया
के
पात्र
हैं।


सवाल-
इस
चुनाव
में
कांग्रेस
महंगाई
का
मुद्दा
भी
उठा
रही
है।
क्या
इसका
असर
नहीं
पड़ेगा?
जवाब
-​​​​​​​
25
करोड़
लोग
गरीबी
रेखा
से
बाहर
आए।
इनमें
दो
करोड़
लोग
हमारे
प्रदेश
के
हैं।
कांग्रेस
उठाने
के
लिए
कुछ
भी
मुद्दा
उठाए,
वह
चलेगा
कहां?
जनता
के
बीच
अपील
नहीं
कर
रहा
है।
गरीब
आदमी
को
दोनों
समय
का
भोजन
5
साल
तक
फ्री
मिलेगा।
मकान
फ्री,
गैस
फ्री,
दोनों
समय
खाना
फ्री।
ऐसा
समय
आएगा
क्या?


सवाल-​​​​​​​
नकुलनाथ
तो
कह
चुके
हैं
कि
चुनाव
बाद
लाड़ली
बहना
योजना
ही
बंद
हो
जाएगी?
जवाब
-​​​​​​​
अब
यह
नकुलनाथ
जानें
कि
उन्होंने
क्यों
बंद
करने
को
कहा
है।
जब
से
लागू
की
तब
से
ही
कह
रहे
हैं
अगले
महीने
बंद
हो
जाएगी।
हमने
ताे
बंद
नहीं
की।


सवाल-
आपकी
कैबिनेट
में
कैलाश
विजयवर्गीय,
प्रहलाद
पटेल
जैसे
सीनियर
लीडर
हैं,
इनसे
आपका
तालमेल
किस
तरह
का
रहता
है?
इन
सीनियर्स
को
आप
किस
तरह
हैंडल
करते
हैं?
जवाब
-​​​​​​​
धोनी
की
टीम
में
कई
सीनियर
थे।
विराट
कोहली
की
टीम
में
धोनी
थे।
राजनीति
भी
एक
टीम
गेम
है।
इसमें
वरिष्ठ
भी
रहते
हैं,
कनिष्ठ
भी
रहते
हैं।
कैप्टन
कोई
एक
बनता
है।
वह
अकेला
ही
रन
बनाएगा,
विकेट
लेगा
ऐसा
नहीं
है।
सभी
को
मिल-जुलकर
काम
करना
पड़ता
है।

नाम
किसी
का
हो
जाए,
इसलिए
वह
बहुत
बड़ा
हो
गया,
बहुत
छोटा
हो
गया,
ऐसा
नहीं
है।
मुझे
तो
वरिष्ठों
की
मौजूदगी
की
वजह
से
कई
मसलों
में
मदद
मिलती
है।


सवाल-
भोपाल
के
जमातखाने
में
मोदी
है
तो
मुमकिन
है
के
नारे
लगे,
कांग्रेस
ने
इसे
आचार
संहिता
का
उल्लंघन
बताया
है।
जवाब
-​​​​​​​
कांग्रेस
का
यही
काम
है।
कांग्रेस
इसकी
कीमत
चुका
रही
है।
जमातखाने
में
जब
कांग्रेस
जिंदाबाद
के
नारे
लगते
थे
तब
कोई
फर्क
नहीं
पड़ा,
लेकिन
कांग्रेस
को
मालूम
पड़
गया
उसकी
जमीन
खिसक
गई
है।
दाउदी
बोहरा
समाज
अब
भाजपा
के
साथ
जा
रहा
है
तो
स्वाभाविक
रूप
से
उनको
कपड़े
फाड़ना
है।
इसकी
हम
परवाह
नहीं
करते।
समाज
खुद
इसका
जवाब
देगा।


सवाल-
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
मध्यप्रदेश
में
आपकी
और
आपकी
सरकार
की
तारीफ
की।
इसे
आप
किस
रूप
में
ले
रहे
हैं?
जवाब
-​​​​​​​
वे
बड़े
हैं।
वे
जानते
हैं
मुझे
बहुत
कम
समय
हुआ
है,
इसलिए
उनका
विशेष
स्नेह
है।
लोकतंत्र
में
मोदी
जी
जैसे
व्यक्ति
ही
हो
सकते
हैं
जो
हमारे
जैसे
व्यक्ति
को
इतनी
बड़ी
जिम्मेदारी
दे
दें।

वे
भी
गरीब
परिवार
से
निकलकर
आते
हैं
और
मैं
भी
गरीब
परिवार
से
निकलकर
आया
हूं।
वो
OBC
समाज
से
आते
हैं,
मैं
भी
OBC
समाज
से
आया
हूं।
जो
जवाबदारी
मिली
उसे
अच्छे
से
करने
के
लिए
प्रदेश
सेवा
का
संकल्प
लिया
है,
उस
संकल्प
को
मजबूती
देने
के
लिए
उन्होंने
जो
उदारता
दिखाई,
उनका
मैं
धन्यवाद
अदा
करता
हूं।



अब
कुछ
बातें
सरकार
को
लेकर…


सवाल-
आपसे
पहले
आपकी
ही
पार्टी
की
सरकार
थी,
लेकिन
आपने
तो
CM
बनते
ही
कई
अफसरों
को
बदल
दिया,
इसकी
क्या
वजह?
जवाब
-​​​​​​​
एक
साथ
तो
नहीं
चेंज
नहीं
किया,
लेकिन
आवश्यकतानुसार
बदले
हैं।
नई
सरकार
बनती
है
भले
ही
रूलिंग
पार्टी
की
सरकार
हो,
वह
अपने
हिसाब
से
प्रशासनिक
जमावट
तो
करेगी।
प्रशासनिक
कसावट
पहली
जरूरत
है।
शिवराज
जी
ने
प्रदेश
को
बीमारू
राज्य
से
निकालकर
बहुत
अच्छी
स्थिति
में
लाकर
खड़ा
किया
है।
उन्होंने
भी
शुभकामनाएं
दी
हैं
कि
आप
अपने
हिसाब
से
आगे
सरकार
चलाइए,
मैंने
अपने
ढंग
से
सरकार
चलाने
का
प्रयास
किया
है।


सवाल-
पहले
की
सरकार
के
दौरान
अफसरशाही
के
हावी
होने
के
आरोप
लगते
रहे
हैं,
आपने
इसी
नब्ज
को
पकड़
लिया?
जवाब

-​​​​​​​
नहीं,
मैं
ऐसा
नहीं
मानता
हूं,
लेकिन
ऐसा
लगा
कि
सरकार
के
लिए
प्रशासन
के
साथ
सख्ती
जरूरी
है
तो
वह
सख्ती
भी
रखता
हूं।
शिवराज
जी
ने
भी
बहुत
कार्रवाई
की।
उन्होंने
लंबा
समय
निकाला।
मुझे
समय
कम
मिला
है,
इसलिए
त्वरित
गति
से
फैसले
लेना
पड़
रहे
हैं।


सवाल-
आप
अब
तक
के
अपने
फैसलों
में
सबसे
महत्वपूर्ण
निर्णय
कौन
सा
मानते
हैं?
जवाब

-​​​​​​​
ये
तो
ऐसा
ही
हो
गया
कि
किसी
मां-बाप
के
चार
बच्चे
हैं
और
उनसे
पूछे
कि
सबसे
अच्छा
बच्चा
कौन
सा?
मेरे
तो
हर
एक
फैसले
अच्छे
हैं।
फिर
भी
बात
करें
तो
नियम
कहता
है
कि
खुले
में
मछली-मांस
नहीं
बेचना
चाहिए,
हमने
यह
नियम
लागू
कराया।
कोई
भी
धर्म
स्थल
है,
माइक
क्यों
लगाना
चाहिए?
उस
पर
हमने
कार्रवाई
की।

गौशालाओं
का
अनुदान
डबल
किया।
धार्मिक
पर्यटन
पर
हेलिकॉप्टर
सर्विस
शुरू
की।
एयर
टैक्सी
का
फायदा
दिलाने
की
दिशा
में
काम
कर
रहे
हैं।
ऐसे
कई
फैसले
हैं
जिनसे
संतोष
मिलता
है।


सवाल-
आपके
शुरुआती
फैसलों
से
यह
धारणा
बनी
कि
आप
हार्डकोर
हिंदुत्व
की
ओर
जा
रहे
हैं
और
कहीं

कहीं
उत्तर
प्रदेश
के
मुख्यमंत्री
योगी
आदित्यनाथ
की
तरह
काम
करना
चाहते
हैं?
जवाब

-​​​​​​​
नहीं
ऐसा
नहीं
है।
यह
गलत
धारणा
है।
ऐसा
कहना
ज्यादती
हो
जाएगी।
योगी
जी
का
बहुत
बड़ा
स्थान
है,
वे
अपना
काम
कर
रहे
हैं।
मैं
अपने
ढंग
से
काम
करता
हूं
और
मैंने
काम
करके
दिखाया।


सवाल-
एक
साल
में
सरकार
42500
करोड़
का
कर्ज
ले
चुकी
है।
आपकी
सरकार
20500
करोड़
ले
चुकी
है।
क्या
यह
स्थिति
ठीक
है?
प्रदेश
को
कर्ज
से
कैसे
उबारेंगे?
जवाब

-​​​​​​​
ये
पूरी
झूठ
बात
है।
इसे
आप
इस
तरह
से
समझिए-
जब
दिग्विजय
सिंह
की
सरकार
थी
तब
केवल
20
हजार
करोड़
का
बजट
था।
अब
साढ़े
तीन
लाख
करोड़
का
हो
गया
है।
आय-व्यय
के
हिसाब
देखें
तो
टैक्स
भी
बचाना
है,
विकास
भी
करना
है,
तो
आपको
इन्फ्रास्ट्रक्चर
के
काम
करना
पड़ेंगे।
आपकी
री-पेमेंट
की
पोजिशन
होनी
चाहिए।

हमारी
सरकार
उसी
पर
काम
कर
रही
है।
एक
भी
दिन
ओवरड्राफ्ट
नहीं
हुआ।
कोई
भी
ऐसी
देनदारी
नहीं
जिसे
हम
नहीं
चुका
पाए।
डेवलपमेंट
के
लिए
मार्केट
से
पैसा
लेना
यह
विकास
का
परिचायक
है।
यह
गलत
नहीं
है।
यह
कर्ज
नहीं
है।

आप
बताइए
टाटा,
बिरला
अंबानी
कोई
नई
स्कीम
लाते
हैं
तो
शेयर
लाते
हैं
बाजार
में।
स्कीम
फायनेंस
कराते
हैं,
इसका
मतलब
यह
नहीं
है
कि
उनके
पास
पैसा
नहीं
है।


सवाल-
क्षिप्रा
में
गंदगी
का
मुद्दा
भी
सामने
आया
है
और
वहां
के
कांग्रेस
प्रत्याशी
ने
क्षिप्रा
के
गंदे
पानी
में
डुबकी
लगाई।
आखिर
क्षिप्रा
को
कैसे
साफ
रखेंगे?
जवाब

-​​​​​​​
हमें
यह
समझना
होगा
कि
क्षिप्रा
मूल
रूप
से
बरसाती
नदी
है।
बर्फ
पिघलकर
पानी

रहा
है,
ऐसा
है
नहीं।
नर्मदा
के
जल
से
और
अलग-अलग
जगह
स्टापडैम
बनाकर
क्षिप्रा
को
स्नान
लायक
बनाया
है।
पास
में
PHE
की
पानी
की
लाइन
भी
जा
रही
है।
वह
गंदा
पानी
नहीं
था।
झूठ
बोल
रहे
थे
वे।

वे
खुद
इसलिए
नहाने
लग
गए।
गंदे
पानी
में
नहाकर
बताएं
जरा।
बिजली
के
खंभे
से
करंट
लग
जाए
तो
क्या
बिजली
खंभा
तोड़कर
फेंक
देंगे।
बिजली
की
लाइन
फाल्ट
हो
जाए
ताे
रिपेअर
करने
की
ही
बात
होती
है।
ऐसी
कोई
लाइन
थी
जो
फूट
गई
थी,
जो
रिपेअर
हो
गई।

चूंकि
वे
चुनाव
लड़
रहे
हैं,
उन्हें
भाजपा
की
आंधी
के
सामने
कोई
और
मुद्दा
मिल
नहीं
रहा
है
तो
स्वाभाविक
रूप
से
उन्होंने
मुद्दा
तलाशने
का
प्रयास
किया।


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