संडे जज्बात- पति अधिकारी थे, मैं थिएटर आर्टिस्ट: मरे बेटे की शक्ल नहीं देख पाई, बहू बोली- अच्छा हुआ तुम्हारी परछाई नहीं पड़ी

संडे जज्बात- पति अधिकारी थे, मैं थिएटर आर्टिस्ट: मरे बेटे की शक्ल नहीं देख पाई, बहू बोली- अच्छा हुआ तुम्हारी परछाई नहीं पड़ी


4
घंटे
पहले
लेखक:
चंद्रा
रानी
सक्सेना

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मेरा
नाम
चंद्रा
रानी
सक्सेना
है।
उम्र
है
70
साल।
पति
मध्यप्रदेश
सरकार
के
मत्स्य
पालन
विभाग
के
डायरेक्टर
थे।
मैं
दो
बेटों
की
मां
हूं।
एक
बेटा
अधिकारी
तो
दूसरा
इंजीनियर।
भोपाल
में
बेटों
के
चार
मकान
हैं।
फिर
भी
मैं
‘अपना
घर’
वृद्धाश्रम
में
रहती
हूं।

वजह
साफ
है-
आत्मसम्मान।
मेरी
बहू
अगर
अधिकारी
की
पत्नी
है
तो
मैं
भी
एक
डायरेक्टर
की
वाइफ
हूं।
पति
दुनिया
में
नहीं
हैं।
उन्होंने
हमेशा
स्वाभिमान
से
जीने
की
सलाह
दी।
आप
ही
बताइए,
जब
मेरे
एक
बेटे
की
मौत
हुई
और
मुझे
चेहरा
तक
नहीं
दिखाया
गया
तो
ऐसी
बहू
से
क्या
ही
उम्मीद
की
जाए।

चंद्रा रानी सक्सेना 70 साल की उम्र में वृद्धाश्रम में रह रही हैं। आश्रम के स्टाफ उन्हें मम्मी बुलाते हैं।


चंद्रा
रानी
सक्सेना
70
साल
की
उम्र
में
वृद्धाश्रम
में
रह
रही
हैं।
आश्रम
के
स्टाफ
उन्हें
मम्मी
बुलाते
हैं।

कम
उम्र
में
ही
शादी
हो
गई।
सास-ससुर
ने
मां
से
आगे
पढ़ाने
का