Exclusive: पानी पुरी बेचकर वायु सैनिक बने, अब सेना छोड़कर सांसद का चुनाव लड़ रहे

Exclusive: पानी पुरी बेचकर वायु सैनिक बने, अब सेना छोड़कर सांसद का चुनाव लड़ रहे
loksabha election dharmendra singh jhala story

धर्मेंद्र
सिंह
झाला


फोटो
:
अमर
उजाला,
इंदौर

विस्तार

धनबल
की
राजनीति
के
बीच
इंदौर
का
एक
युवा
अपनी
शिक्षा,
व्यवहार
और
सादगी
के
दम
पर
राजनीति
में
कुछ
कर
दिखाने
का
प्रयास
कर
रहा
है।
यह
कहानी
है
धर्मेंद्र
सिंह
झाला
की
जो
वायु
सेना
की
नौकरी
छोड़कर
राजनीति
के
माध्यम
से
देश
को
और
भी
बेहतर
बनाने
की
कोशिशें
कर
रहे
हैं।
पानी
पुरी
बेचकर
पढ़ाई
करने
वाले
धर्मेंद्र
आज
हजारों
युवा
के
आदर्श
हैं।


संघर्षों
भरा
रहा
जीवन

धर्मेंद्र
मुख्यतः
राजस्थान
के
रहने
वाले
हैं
लेकिन
2010
से
इंदौर
में
ही
बस
गए
हैं।
धर्मेंद्र
का
जीवन
बेहद
संघर्षों
से
भरा
रहा।
बचपन
में
ही
पिता
का
स्वर्गवास
हो
गया
और
उन्होंने
घर
खर्च
चलाने
के
लिए
चौथी
कक्षा
से
ही
पानी
पुरी
बेचना
शुरू
कर
दी।
बाद
में
वे
एक
होटल
में
बर्तन
साफ
करने
का
काम
करने
लगे।
इस
समय
उनकी
माता
शादियों
और
अन्य
कार्य़क्रमों
में
पूड़ी
बनाने
का
काम
करती
थी।
धर्मेंद्र
ने
संघर्षों
के
बीच
भी
अपनी
पढ़ाई
जारी
रखी
और
12वी
पास
की।
बाद
में
उन्हें
स्कालरशिप
मिली
और
वे
वायु
सेना
में
पहुंचे।
यहां
पर
भी
पढ़ाई
करते
रहे
और
साल
2022
में
रिटायर्मेंट
ले
लिया। 


जरूरतमंद
बच्चों
को
निःशुल्क
मार्गदर्शन
देते
हैं

धर्मेंद्र
ने
2022
में
वायु
सेना
से
रिटायर्मेंट
लिया
और
इंदौर
में
बापट
चौराहे
पर
मंगल
नगर
पेट्रोल
पंप
के
पास
बच्चों
के
लिए
सैल्यूट
पुलिस
एंड
डिफेंस
एकेडमी
के
नाम
से
कोचिंग
खोली।
एक
साल
के
समय
में
ही
उनके
मार्गदर्शन
से
दो
लड़कियां
एयरफोर्स
में
जा
चुकी
हैं
और
कई
युवा
सेना
और
पुलिस
विभाग
में
जा
चुके
हैं।
कोचिंग
में
वे
जरूरतमंद
बच्चों
को
निःशुल्क
मार्गदर्शन
देते
हैं।
अभी
तक
वे
काउंसलिंग
से
पांच
हजार
से
अधिक
बच्चों
का
मार्गदर्शन
कर
चुके
हैं
और
उनके
पढ़ाए
बच्चे
विदेशों
में
बड़े
पदों
पर
कार्यरत
हैं। 


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राजनीति
की
राह
क्यों
चुनी

धर्मेंद्र
कहते
हैं
कि
जब
तक
युवा
राजनीति
में
नहीं
आएंगे
देश
में
बेहतर
बदलाव
संभव
नहीं
हैं।
राजनीति
ही
देश
की
नीतियां
तय
करती
है।
आज
स्थानीय
मुद्दों
को
संसद
तक
पहुंचाने
की
जरूरत
है।
किसान,
बस्ती,
गरीब,
शिक्षा,
स्वास्थ्य
ये
मुद्दे
संसद
में
कोई
उठा
ही
नहीं
रहा।
इंदौर
में
शिक्षा
का
स्तर
इतना
खराब
है
कि
इस
साल
सिर्फ
दो
ही
बच्चे
मैरिट
में
आए
हैं।
आसपास
के
जिलों
से
बच्चे
यहां
पढ़ने
आते
हैं
और
इंदौर
नशे
का
अड्डा
बन
चुका
है।
सरकार
मुफ्त
में
भोजन
और
अन्य
तरह
की
राशि
दे
रही
है।
इसके
बजाय
आपको
उन्हें
रोजगार
देने
पर
फोकस
करना
चाहिए।


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चुनाव
में
खर्च
कैसे
करेंगे

धर्मेंद्र
ने
बताया
कि
चुनाव
में
किसी
भी
तरह
का
अनावश्यक
खर्च
नहीं
करेंगे।
वे
बस्तियों,
मोहल्लों
में
खुद
संपर्क
कर
रहे
हैं
और
घर-घर
जाकर
प्रचार
कर
रहे
हैं।
उनका
मानना
है
कि
होर्डिंग,
पोस्टर,
गाड़ियों
पर
लगाया
जाने
वाला
करोड़ों
रुपया
बाद
में
जनता
की
जेब
से
ही
वसूला
जाता
है।