एक्सपर्ट्स कोवीशील्ड के साइड इफेक्ट जांचें-सुप्रीम कोर्ट में याचिका: कहा- वैक्सीन लगाने से किसी को गंभीर नुकसान पहुंचा, तो सरकार उन्हें हर्जाना दे

एक्सपर्ट्स कोवीशील्ड के साइड इफेक्ट जांचें-सुप्रीम कोर्ट में याचिका: कहा- वैक्सीन लगाने से किसी को गंभीर नुकसान पहुंचा, तो सरकार उन्हें हर्जाना दे


नई
दिल्ली
46
मिनट
पहले

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एस्ट्राजेनेका कंपनी की वैक्सीन को भारत में कोवीशील्ड के नाम से जाना जाता है। सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से ही कोवीशील्ड को मैन्युफैक्चर किया था। इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाया गया था। (फाइल) - Dainik Bhaskar


एस्ट्राजेनेका कंपनी
की
वैक्सीन
को
भारत
में
कोवीशील्ड
के
नाम
से
जाना
जाता
है।
सीरम
इंस्टीट्यूट
ने
एस्ट्राजेनेका
के
फॉर्मूले
से
ही
कोवीशील्ड
को
मैन्युफैक्चर
किया
था।
इस
वैक्सीन
को
ऑक्सफोर्ड
यूनिवर्सिटी
के
साथ
मिलकर
बनाया
गया
था।
(फाइल)

सुप्रीम
कोर्ट
में
बुधवार
को
कोरोना
वैक्सीन
कोवीशील्ड
की
जांच
के
लिए
एक
याचिका
दाखिल
की
गई।
इसमें
कहा
गया
है
कि
कोवीशील्ड
के
साइड
इफेक्ट्स
की
जांच
करने
के
लिए
एक्सपर्ट
पैनल
बनाने
का
निर्देश
जारी
किया
जाए।

याचिका
एडवोकेट
विशाल
तिवारी
ने
लगाई
है।
उन्होंने
कहा
कि
वैक्सीन
लगाने
के
बाद
किसी
को
नुकसान
पहुंचा
तो
उन्हें
हर्जाना
देने
का
सिस्टम
बनाया
जाए।

भारत
में
सबसे
पहली
कोरोना
वैक्सीन
कोवीशील्ड
है।
इसे
पुणे
की
सीरम
इंस्टीट्यूट
ने
बनाया
है।
कोवीशील्ड
फॉर्मूला
ब्रिटिश
फार्मा
कंपनी
एस्ट्राजेनेका
से
लिया
गया
है।

एस्ट्रेजेनेका
ने
अब
ब्रिटिश
अदालत
में
माना
है
कि
उनकी
वैक्सीन
के
गंभीर
साइड
इफेक्ट्स
हैं।
कहा-
कुछ
मामलों
में
थ्रॉम्बोसिस
थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया
सिंड्रोम
यानी
TTS
हो
सकता
है।
इस
बीमारी
से
शरीर
में
खून
के
थक्के
जम
जाते
हैं
और
प्लेटलेट्स
की
संख्या
गिर
जाती
है।



कोवीशील्ड
पर
याचिका
का
हर
पहलू
सवाल-जवाब
में…


1.
देश
में
कितने
लोगों
को
कोवीशील्ड
वैक्सीन
लगाई
गई?


2.
वैक्सीन
ड्राइव
के
बाद
अब
सुप्रीम
कोर्ट
में
याचिका
क्यों?

एस्ट्राजेनेका
ने
ब्रिटिश
अदालत
में
माना
है
कि
उसकी
वैक्सीन
के
गंभीर
साइड
इफेक्ट्स
हैं।
हालांकि
ऐसे
केसेस
बेहद
दुर्लभ
हैं।
इसके
बाद
भारत
में
कोवीशील्ड
की
जांच
के
लिए
सुप्रीम
कोर्ट
में
याचिका
लगाई
गई।
वजह-
कोवीशील्ड
भी
एस्ट्राजेनेका
के
फॉर्मूले
पर
बनी
है।


3.
सुप्रीम
कोर्ट
में
लगाई
गई
याचिका
में
क्या
कहा
गया
है?

  • कोवीशील्ड
    वैक्सीन
    के
    साइड
    इफेक्ट्स
    की
    जांच
    के
    लिए
    मेडिकल
    एक्सपर्ट्स
    का
    पैनल
    बनाने
    के
    निर्देश
    जारी
    किए
    जाएं।
  • इस
    पैनल
    में
    AIIMS
    दिल्ली
    के
    एक्सपर्ट
    भी
    हों।
    पैनल
    की
    अध्यक्षता
    AIIMS
    के
    डायरेक्टर
    करें
    और
    जांच
    की
    निगरानी
    का
    जिम्मा
    सुप्रीम
    कोर्ट
    के
    रिटायर्ड
    जज
    के
    पास
    हो।
  • एक्सपर्ट
    पैनल
    इस
    बात
    की
    जांच
    करे
    कि
    कोवीशील्ड
    वैक्सीन
    के
    साइड
    इफेक्ट्स
    हैं
    क्या?
    अगर
    हैं
    तो
    वो
    कितने
    गंभीर
    हैं?
  • वैक्सीन
    लगाने
    के
    बाद
    किसी
    को
    गंभीर
    नुकसान
    पहुंचा
    हो
    या
    जान
    गई
    हो
    तो
    केंद्र
    को
    निर्देश
    दिए
    जाएं
    कि
    वो
    ऐसे
    लोगों
    को
    हर्जाना
    देने
    के
    लिए
    वैक्सीन
    डैमेज
    पेमेंट
    सिस्टम
    बनाए।


4.
साइड
इफेक्ट्स
पर
एक्सपर्ट
क्या
कहते
हैं?
भास्कर
ने
बात
की…


5.
एस्ट्राजेनेका
के
फॉर्मूले
पर
कोवीशील्ड
बनी,
एस्ट्राजेनेका
ने
यूके
कोर्ट
में
क्या
कहा?

  • कोविड-19
    वैक्सीन
    से
    खतरनाक
    साइड
    इफेक्ट्स
    हो
    सकते
    हैं।
    हालांकि
    ऐसा
    बहुत
    रेयर
    (दुर्लभ)
    मामलों
    में
    ही
    होगा।
  • वैक्सीन
    से
    कुछ
    मामलों
    में
    थ्रॉम्बोसिस
    थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया
    सिंड्रोम
    यानी
    TTS
    हो
    सकता
    है।
    इस
    बीमारी
    से
    शरीर
    में
    खून
    के
    थक्के
    जम
    जाते
    हैं
    और
    प्लेटलेट्स
    की
    संख्या
    गिर
    जाती
    है।
  • उन
    लोगों
    के
    प्रति
    हमारी
    संवेदनाएं
    हैं,
    जिन्होंने
    अपनों
    को
    खोया
    है
    या
    गंभीर
    बीमारियों
    का
    सामना
    करना
    पड़ा।
    हम
    दवाइयों
    और
    वैक्सीन
    के
    सुरक्षित
    इस्तेमाल
    के
    लिए
    सभी
    मानकों
    का
    पालन
    करते
    हैं।
  • दुनियाभर
    के
    रेगुलेटर्स
    ने
    भी
    माना
    है
    कि
    वैक्सीन
    से
    होने
    वाले
    फायदे
    इसके
    दुर्लभ
    साइड
    इफेक्ट्स
    से
    कहीं
    ज्यादा
    हैं।


6.
एस्ट्राजेनेका
को
ब्रिटिश
कोर्ट
में
क्यों
जाना
पड़ा?

अप्रैल
2021
में
जेमी
स्कॉट
नाम
के
शख्स
ने
यह
वैक्सीन
लगवाई
थी।
इसके
बाद
उनकी
हालत
खराब
हो
गई।
शरीर
में
खून
के
थक्के
बनने
का
सीधा
असर
उनके
दिमाग
पर
पड़ा।
इसके
अलावा
स्कॉट
के
ब्रेन
में
इंटरनल
ब्लीडिंग
भी
हुई।
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
डॉक्टरों
ने
उनकी
पत्नी
से
कहा
था
कि
वो
स्कॉट
को
नहीं
बचा
पाएंगे।
जेमी
स्कॉट
की
पत्नी
ने
ब्रिटिश
कोर्ट
में
एस्ट्राजेनेका
के
खिलाफ
पहला
केस
दर्ज
कराया
था।

तस्वीर जेमी स्कॉट और उनकी पत्नी केट स्कॉट की है। जेमी को अप्रैल 2021 में वैक्सीन की वजह से ब्लड क्लॉटिंग का सामना करना पड़ा था।


तस्वीर
जेमी
स्कॉट
और
उनकी
पत्नी
केट
स्कॉट
की
है।
जेमी
को
अप्रैल
2021
में
वैक्सीन
की
वजह
से
ब्लड
क्लॉटिंग
का
सामना
करना
पड़ा
था।


7.
इस
पूरे
केस
में
क्या
कोई
चौंकाने
वाली
बात
है?

एस्ट्राजेनेका
वैक्सीन
का
इस्तेमाल
अब
ब्रिटेन
में
नहीं
हो
रहा
है।
टेलीग्राफ
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
बाजार
में
आने
के
कुछ
महीनों
बाद
वैज्ञानिकों
ने
इस
वैक्सीन
के
खतरे
को
भांप
लिया
था।
सुझाव
दिया
गया
था
कि
40
साल
से
कम
उम्र
के
लोगों
को
दूसरी
किसी
वैक्सीन
का
भी
डोज
दिया
जाए,
क्योंकि
एस्ट्राजेनेका
की
वैक्सीन
से
होने
वाले
नुकसान
कोरोना
के
खतरे
से
ज्यादा
थे।

मेडिसिन
हेल्थकेयर
प्रोडक्ट्स
रेगुलेटरी
(MHRA)
के
मुताबिक
ब्रिटेन
में
साइड
इफेक्ट
से
जूझने
वाले
हर
5
में
से
एक
व्यक्ति
की
मौत
हुई
है।
फरवरी
में
163
लोगों
को
सरकार
ने
मुआवजा
दिया
था।
इनमें
से
158
ऐसे
थे,
जिन्होंने
एस्ट्राजेनेका
की
वैक्सीन
लगवाई
थी।


8.
एस्ट्राजेनेका
केस
में
जिस
खतरनाक
TTS
का
जिक्र,
वो
क्या
है?


खबरें
और
भी
हैं…