Indore News: इंदौर के लिए स्वच्छता का खिताब बरकरार रखना चुनौती, बिगड़ी सफाई व्यवस्था

Indore News: It is a challenge for Indore to maintain the title of cleanliness, the cleanliness system has det

शहर
में
फिर
गंदगी
नजर
आने
लगी
है।


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार

इंदौर
लगातार
स्वच्छता
रैंकिंग
में
सात
बार
से
नंबर
वन
है,
लेकिन
इस
बार
खिताब
को
बरकरार
रखना
चुनौती
है।
पैसों
का
संकट,
चुनावी
आचार
संहिता
और अनुभवनहीन
अधिकारियों
के
कारण
इंदौर
की
सफाई
व्यवस्था
बिगड़
गई
है।
उसे
पटरी
पर
लाना
काफी
नए
निगमायुक्त
के
लिए
मुश्किल
होगा।
शहर
में
प्रमुख
सड़कों
की
सफाई
तो
हो
रही
है,
लेकिन
तंग
गलियों,
बैकलेन
और
नालों
में
गंदगी
नजर
आने
लगी
है।

लोगों
में
भी
जागरुकता
की
कमी
आई
है।
इस
बार
भी
हमारी
टक्कर
स्वच्छता
में
सूरत
से
होगी,
क्योकि
पिछली
बार
इंदौर
और सूरत
को
संयुक्त
रुप
से
पुरस्कार
मिला
था।
इसके
बाद
सूरत
ने
थ्रीआर
सिस्टम
को
और  मजबूत
किया
है। कचरे
से
खाद
व ऊर्जा
उत्पादन
में
भी
सूरत
बेहतर
काम
कर
रहा
है,जबकि
हमारे
इंदौर
में
गोबधन
प्लांट
से
पर्याप्त
सीएनजी
गैस
ही
नहीं
बन
पा
रही
है।


वाटर
प्लस
की
सेवन
स्टार
रेटिंग
अब
नहीं
आसान

दो
साल
पहले
शहर
के
नालों
को
साफ
करने
में
काफी
प्रयास
हुए।
इसका
फायदा
दो
साल
तक
नंबर
बन
बनाने
में
मिला,
लेकिन
नाले
फिर
गंदा
पानी
उगल
रहे
है।
उनमें
कचरा
भी
लोग
फेंक
रहे
है।
ड्रेनेज
लाइन
घोटाला
भी
फिलहाल
चर्चा
में
है।
मौके
पर
काम
नहीं
हुए
और बिल
मंजूर
हो
गए।
इसके
चलते
इंदौर
का
नाला
टैपिंग
प्रोजेक्ट
फेल
हो
गया।
इस
सार
वाटर
प्लस
में
सेवन
स्टार
रेटिंग
भी
आसान
नहीं
है,जबकि
इसके
नंबर
भी
रैंकिंग
मेें
मायने
रखते
है।


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इन
कमियों
के
कारण
इंदौर
की
सफाई
कमजोर

-नगर
निगम
का
ज्यादातर
स्टाॅफ
निर्वाचन
कार्य
में
जुटा
है।
मतदान
केंद्रों
की
जिम्मेदारी
नगर
निगम
को
दी
गई
है।
इस
कारण
शहर
की
सफाई
व्यवस्था
की
निगरानी
नहीं
हो
रही
है।


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-जागरुकता
के
लिए
शहर
में
मैं
हू
झोलाधारी,
नो
थू-थू
अभियान
और कचरे
से
खाद
बनाने
के
अभियान
चलाए
जाते
थे,
लेकिन
इस
साल
स्वच्छता
को
लेकर
अभियान
नजर
नहीं
आ रहे
है।

-इंदौर
की
अच्छी
सफाई
की
एक
वजह
सख्ती
भी
रहती
थी।
नगर
निगम
का
अमला
स्पाॅट
फाइन
करता
था।
सड़क
पर
थूकने
वालों
के
भी
इंदौर
में
चालान
बने,
लेकिन
अब
लोग
फिर
बेकलेन
में
कचरा
फेंकने
लगे
है।
बेकलेन
भी
नियमित
तौर
पर
साफ
नहीं
हो
रही
है।


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इंदौर
मेें
नए
निगमायुक्त
के
रुप
में
शिवम
वर्मा
आए
है।
ज्यादातर
अपर
आयुक्त
भी
नए
है।
उन्हें
सफाई
की
एबीसीडी
नए
सिरे
से
समझना
पड़
रही
है,
विधानसभा
चुनाव
के
समय
कई
अनुभवी
अधिकारियों
के
तबादले
हो
गए।


रात्रिकालीन
सफाई
पर
फोकस

शहर
में
रात्रिकालीन
सफाई
पर
हमारा
ज्यादा
फोकस
है।
प्रमुख
सड़कों
को
रात
को
बेहतर
तरीके
से
काम
किया
जा
रहा
है।
सिंगल
यूज
प्लास्टिक
की
रोकथाम
के
लिए
हमने
छापे
मारे
है।
शहरवासियों
में
जागरुकता
के
लिए
स्वयंसेवी
संगठनों
की
मदद
ली
जा
रही
है।-शिवम
वर्मा,
निगमायुक्त


फिर
इंदौर
रहेगा
नंबर
वन

स्वच्छता
में
इंदौर
को
अष्ठसिद्धि
प्राप्त
होगी।
हम
सफाई
में
आठवीं
बार
पहले
स्थान
पर
आने
के
लिए
पूरी
मेहनत
कर
रहे
है,
जो
कमियां
है,
उसे
दूर
करेंगे।
आचार
संहिता
के
बाद
सफाई
पर 
और ज्यादा
फोकस
सफाई
पर
रहेगा।
हमारी
सबसे
बड़ी
ताकत
डोर
टू
डोर
कचरा
कलेक्शन
है।
इसके
लिए
हमने
नए
वाहन
खरीदे
है।
स्टाॅफ
भी
बढ़ाया
हैै।
-पुष्य
मित्र
भार्गव,
मेयर