Ujjain News: सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की नियुक्ति को दी गई चुनौती को कोर्ट ने किया खारिज, बताई ये वजह, जानें

The court dismissed the challenge to the appointment of Syedna Mufaddal Saifuddin

सैयदना
मुफद्दल
सैफुद्दीन

विस्तार

दाऊदी
बोहरा
समुदाय
ने
बॉम्बे
उच्च
न्यायालय
के
न्यायमूर्ति
जी.एस.
पटेल
द्वारा
दिए
गए
ऐतिहासिक
फैसले
पर
खुशी
जाहिर
की
है,
जो
पूरे
समाज
के
लिए
एक
ऐतिहासिक
और
निर्णायक
क्षण
है।
सैयदना
सैफुद्दीन
की
नियुक्ति
को
दी
गई
दुर्भाग्यपूर्ण
चुनौती
और
इसके
आधार
पर
पेश
किए
गए
विभिन्न
झूठे
तर्कों
के
उक्त
निर्णय
में
निर्णायक
रूप
से
निपटारा
किया
गया
है
तथा
मूलवादी
खुजेमा
कुतुबुद्दीन
और
वर्तमान
वादी
उनके
पुत्र
ताहिर
कुतुबुद्दीन
के
दावों
को
खारिज
कर
दिया
गया
है।

निर्णय
में
वादी
द्वारा
दाऊदी
बोहरा
धर्म
के
तथ्यों
और
धार्मिक
सिद्धांतों
की
गलत
व्याख्या
और
भ्रामक
चित्रण
को
दृढ़ता
से
खारिज
कर
दिया
गया
है।
फैसले
में,
जिसमें
दोनों
पक्षों
द्वारा
प्रस्तुत
साक्ष्यों
और
विस्तृत
तर्कों
पर
सावधानीपूर्वक
विचार
किया
गया
था,
यह
निर्णायक
रूप
से
माना
गया
है
कि
52वें
अल-दाई
अल-मुतलक,
सैयदना
मोहम्मद
बुरहानुद्दीन
ने
अपने
पुत्र,
सैयदना
मुफद्दल
सैफुद्दीन
को
अपना
उत्तराधिकारी
और
दाउदी
बोहरा
समुदाय
के
53वें
अल-दाई
अल-मुतलक
के
रूप
में
नियुक्त
किया
था।

बताया
जाता
है
कि
बोहरा
समाज
हमेशा
से
भारतीय
न्यायपालिका
में
विश्वास
करता
रहा
हैं
और
उस
पर
पूरा
भरोसा
और
आस्था
रखते
हैं,
जिसने
बार-बार
सैयदना
और
दाऊदी
बोहरा
समुदाय
की
सदियों
पुरानी
मान्यताओं,
रीति-रिवाजों,
प्रथाओं
और
सिद्धांतों
के
स्थान
की
पुष्टि
की
है।
इस
अवसर
पर
बॉम्बे
उच्च
न्यायालय
के
न्यायमूर्ति
गौतम
पटेल
को
पिछले
दस
वर्षों
में
इस
जटिल
मामले
को
धैर्यपूर्वक
सुनने
और
निर्णय
देने
में
जितना
समय
लगा,
उतना
समय
देने
के
लिए
समाज
ने
धन्यवाद
दिया।
बोहरा
समाज
ने
स्वर्गीय
इब्राहिम
ए.के.
फैजुल्लाभॉय
के
नेतृत्व
में
अपने
सभी
सॉलिसिटरों
और
अधिवक्ताओं
के
प्रति
भी
आभार
और
धन्यवाद
व्यक्त
किया।
साथ
ही
आर्गस
पार्टनर्स
की
टीम,
जिसमें
वरिष्ठ
भागीदार
अबीजार
इब्राहिम
फैजुल्लाभॉय,
भागीदार
मुर्तजा
कांचवाला,
वरिष्ठ
सहयोगी
सुश्री
जैशा
सबावाला,
साथ
ही
आर्गस
पार्टनर्स
और
अन्य
कानूनी
फर्मों
के
अन्य
अधिवक्ता
शामिल
हैं,
जिन्होंने
समय-समय
पर
हमारी
ओर
से
इस
मामले
में
भाग
लिया
है।
अंत
में,
हम
सभी
गवाहों
को
भी
धन्यवाद
दिया,
जिन्होंने
इस
मामले
में
सैयदना
मुफद्दल
सैफुद्दीन
की
ओर
से
साक्ष्य
दिए,
जिनकी
गवाही
अनुकूल
निर्णय
प्राप्त
करने
का
आधार
बनी।


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9
साल
तक
चला
मुकदमा

सैयदना
उत्तराधिकार
विवाद
में
मुकदमा
समाप्त
हुआ
और
नौ
साल
तक
चलने
वाले
फैसले
को
अप्रैल
2023
में
सुरक्षित
रखा
गया।
अंतिम
सुनवाई
नवंबर
2022
में
शुरू
हुई
और
अप्रैल
2023
में
समाप्त
हुई।
2014
में
52वें
सैयदना
मोहम्मद
बुरहानुद्दीन
का
निधन
हो
गया
और
उनके
बेटे
मुफद्दल
सैफुद्दीन
53वें
सैयदना
बने।
सैयदना
बुरहानुद्दीन
के
सौतेले
भाई
खुजैमा
कुतुबुद्दीन
ने
सैफुद्दीन
के
उत्तराधिकार
को
चुनौती
देते
हुए
दावा
किया
कि
सैयदना
बुरहानुद्दीन
ने
1965
में
गुप्त
रूप
से
उन्हें
उत्तराधिकार
की
आधिकारिक
घोषणा
‘नास’
प्रदान
की
थी।
कुतुबुद्दीन
ने
दावा
किया
कि
सैफुद्दीन
ने
फर्जी
तरीके
से
सैयदना
का
पद
संभाला
था।
कुतुबुद्दीन
ने
दावा
किया
कि
1965
में
बुरहानुद्दीन
के
दाई
बनने
के
बाद,
उन्होंने
10
दिसंबर,
1965
को
माजून
की
घोषणा
से
पहले,
सार्वजनिक
रूप
से
कुतुबुद्दीन
को
माजून
(दूसरी
कमान)
के
रूप
में
नियुक्त
किया
था
और
एक
गुप्त
नास
के
माध्यम
से
निजी
तौर
पर
उन्हें
अपने
उत्तराधिकारी
के
रूप
में
नियुक्त
किया
था।


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कौन
हैं
सैयदना
मुफद्दल
सैफुद्दीन?

सैयदना
मुफद्दल
सैफुद्दीन
53वें
अल-दाई
अल-मुतलक
और
विश्वव्यापी
दाऊदी
बोहरा
समुदाय
के
वर्तमान
नेता
हैं।
सैयदना
सैफुद्दीन
दुनिया
भर
में
अपने
अनुयायियों
का
मार्गदर्शन
करते
हैं
और
उन्हें
उनकी
आस्था,
संस्कृति
और
विरासत
के
करीब
लाते
हैं।

सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की नियुक्ति को दी गई चुनौती को उच्च न्यायालय ने किया खारिज