एंटी-डोपिंग एजेंसी ने पहलवान बजरंग को सस्पेंड किया: एजेंसी बोली- सैंपल नहीं दिया, रेसलर का जवाब- टेस्ट के लिए एक्सपायरी किट दी गई थी

एंटी-डोपिंग एजेंसी ने पहलवान बजरंग को सस्पेंड किया: एजेंसी बोली- सैंपल नहीं दिया, रेसलर का जवाब- टेस्ट के लिए एक्सपायरी किट दी गई थी


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स्पोर्ट्स
डेस्क
22
मिनट
पहले

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बजरंग पूनिया ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। - Dainik Bhaskar


बजरंग
पूनिया
ने
बर्मिंघम
कॉमनवेल्थ
गेम्स
में
भारत
के
लिए
गोल्ड
मेडल
जीता
था।

नेशनल
एंटी-डोपिंग
एजेंसी
(NADA)
ने
पहलवान
बजरंग
पूनिया
को
अनिश्चितकाल
के
लिए
सस्पेंड
कर
दिया
है।
बजरंग
पूनिया
ने
डोप
टेस्ट
के
लिए
अपना
सैंपल
नहीं
दिया
था,
जिसके
बाद
NADA
ने
यह
एक्शन
लिया
है।

10
मार्च
को
ओलिपिंक
गेम्स
में
हिस्सा
लेने
के
लिए
हुए
एशियन
क्वालिफायर्स
के
नेशनल
ट्रायल्स
के
दौरान
NADA
ने
बजरंग
से
सैंपल
देने
के
लिए
कहा
था।
लेकिन,
बजरंग
ने
सैंपल
देने
से
इनकार
कर
दिया।
NADA
को
विश्व
डोपिंग
रोधी
एजेंसी
(WADA)
को
बताना
था
कि
एक
एथलीट
ने
अपना
सैंपल
क्यों
नहीं
दिया।

23
अप्रैल
को
NADA
ने
बजरंग
को
नोटिस
दिया
और
7
मई
तक
जवाब
देने
को
कहा
था।
बजरंग
ने
अभी
तक
जवाब
नहीं
दिया
है
और
इसलिए
उन्हें
निलंबित
कर
दिया
गया
है।

बजरंग
पूनिया
ने
पोस्ट
करके
इसका
जवाब
दिया।
उन्होंने
लिखा-
मैंने
कभी
भी
NADA
अधिकारियों
को
सैंपल
देने
से
इनकार
नहीं
किया,
उन्होंने
पहले
मेरा
सैंपल
लेने
के
लिए
एक्सपायरी
किट
दी
थी।
एक्सपायरी
किट
देने
वालों
के
खिलाफ
उन्होंने
क्या
कदम
उठाए।
इसका
जवाब
दें
और
फिर
मेरा
डोप
टेस्ट
ले
लीजिए।


हारते
ही
बाहर
चले
गए
थे
पूनिया,
तीसरे-चौथे
मुकाबले
के
लिए
नहीं
रुके

बजरंग की यह फोटो 10 मार्च की है, जब वो नॅशनल ट्रायल में हार गए थे।


बजरंग
की
यह
फोटो
10
मार्च
की
है,
जब
वो
नॅशनल
ट्रायल
में
हार
गए
थे।

दो
महीने
पहले
ओलिपिंक
गेम्स
में
भाग
लेने
के
लिए
हुए
ट्रायल
में
बजरंग
पूनिया
को
फ्री-स्टाइल
65
KG
वेट
कैटेगरी
में
रोहित
ने
9-1
से
मात
दी
थी।
सेमीफाइनल
में
हारने
के
बाद
बजरंग
पूनिया
गुस्से
में
तुरंत
भारतीय
खेल
प्राधिकरण
(SAI)
केंद्र
से
चले
गए।
राष्ट्रीय
डोपिंग
रोधी
एजेंसी
(NADA)
के
अधिकारियों
ने
पूनिया
के
डोप
सैंपल
लेने
की
कोशिश
की,
लेकिन
वह
सैंपल
नहीं
दिए।


बजरंग
ने
एशियन
गेम्स
बिना
ट्रायल्स
दिए
खेला
था

बजरंग
पूनिया
को
पिछले
साल
चीन
के
हांगझोउ
एशियन
गेम्स
के
सेमीफाइनल
मैच
में
हार
मिली
थी।
इतना
ही
नहीं,
ब्रॉन्ज
मेडल
मैच
में
भी
बजरंग
को
जापानी
पहलवान
के.
यामागुची
ने
10-0
से
हरा
दिया
था।
उनकी
हार
के
बाद
सोशल
मीडिया
पर
कई
लोग
भड़क
उठे
थे,
क्योंकि
एशियन
गेम्स
में
भाग
लेने
से
पहले
उन्होंने
किसी
प्रतिस्पर्धी
मुकाबले
में
हिस्सा
नहीं
लिया
था।

उन्हें
ट्रायल
के
बिना
इन
खेलों
के
लिए
भारतीय
दल
में
शामिल
करने
की
भी
आलोचना
हुई
थी।


बृजभूषण
पर
यौन
शोषण
के
आरोप
लगाए
थे

पहलवानों
ने
WFI
के
पूर्व
अध्यक्ष
बृजभूषण
पर
महिला
रेसलर्स
के
यौन
शोषण
के
आरोप
लगाए
थे।
इसको
लेकर
बजरंग
पूनिया,
विनेश
फोगाट
और
साक्षी
मलिक
की
अगुआई
में
आंदोलन
हुआ।
पहलवानों
ने
पहले
जंतर-मंतर
पर
धरना
दिया।
इसके
बाद
उनकी
याचिका
पर
सुप्रीम
कोर्ट
ने
आदेश
दिए
और
दिल्ली
पुलिस
ने
बृजभूषण
पर
केस
दर्ज
किया।

इस
मामले
की
कोर्ट
में
सुनवाई
चल
रही
है।
इसी
दौरान
WFI
के
चुनाव
हुए
तो
बृजभूषण
के
करीबी
संजय
सिंह
चुनाव
जीत
गए।
जिसके
बाद
बजरंग
के
अलावा
विनेश
फोगाट
ने
भी
अपने
अवॉर्ड
लौटा
दिए।
वहीं
साक्षी
मलिक
ने
कुश्ती
से
ही
संन्यास
ले
लिया।


कॉमनवेल्थ
गेम्स-
2022
में
जीता
था
गोल्ड

बजरंग
पूनिया
ने
टोक्यो
ओलिंपिक
में
ब्रॉन्ज
मेडल
जीता
था।
बर्मिंघम
कॉमनवेल्थ
गेम्स
में
उन्होंने
भारत
के
लिए
गोल्ड
मेडल
जीता
था।
पुरुषों
की
फ्री
स्टाइल
65
किलो
भारवर्ग
के
फाइनल
में
बजरंग
पूनिया
ने
कनाडा
के
एल.
मैकलीन
को
9-2
से
मात
दी
थी।
बजरंग
पूनिया
का
यह
कॉमनवेल्थ
गेम्स
में
लगातार
दूसरा
गोल्ड
एवं
ओवरऑल
तीसरा
मेडल
था,
हालांकि
उस
गोल्ड
मेडल
जीत
के
बाद
वह
कुछ
खास
नहीं
कर
पाए
हैं।

बजरंग पूनिया ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर अपना पद्मश्री सम्मान रख दिया था। पुलिस और अधिकारियों के समझाने के बाद भी वह उसे वहीं छोड़कर चले आए थे।


बजरंग
पूनिया
ने
प्रधानमंत्री
आवास
के
बाहर
अपना
पद्मश्री
सम्मान
रख
दिया
था।
पुलिस
और
अधिकारियों
के
समझाने
के
बाद
भी
वह
उसे
वहीं
छोड़कर
चले
आए
थे।


WFI
चुनाव
को
लेकर
लौटाया
था
पद्मश्री
अवॉर्ड

रेसलर
बजरंग
पूनिया
ने
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
को
एक
चिट्‌ठी
लिखकर
पद्मश्री
अवॉर्ड
लौटाने
का
ऐलान
किया
था।
इस
चिट्‌ठी
में
बजरंग
ने
भारतीय
कुश्ती
संघ
के
अध्यक्ष
के
पद
पर
बृजभूषण
के
करीबी
संजय
सिंह
की
जीत
का
विरोध
जताया
था।

3
महीने
पहले
प्रधानमंत्री
आवास
में
एंट्री
नहीं
मिलने
पर
बजरंग
ने
अपना
अवॉर्ड
सामने
फुटपाथ
पर
रख
दिया।
बजरंग
ने
कहा,
‘महिला
पहलवानों
के
अपमान
के
बाद
मैं
ऐसी
सम्मानित
जिंदगी
नहीं
जी
पाऊंगा,
इसलिए
अपना
सम्मान
लौटा
रहा
हूं।
अब
मैं
इस
सम्मान
के
बोझ
तले
नहीं
जी
सकता।’


खबरें
और
भी
हैं…