

नई
दिल्ली.
बिभव
कुमार
पर
राज्यसभा
सांसद
स्वाति
मालीवाल
ने
13
मई
को
मुख्यमंत्री
अरविंद
केजरीवाल
के
सिविल
लाइंस
के
आधिकारिक
आवास
पर
अपने
साथ
मारपीट
करने
का
आरोप
लगाया
है.
बिभव
कुमार
को
आप
सुप्रीमो
के
सबसे
करीबी
सहयोगी
के
रूप
में
जाना
जाता
है.
लगभग
दो
दशकों
से
केजरीवाल
के
साथ
जुड़े
रहने
के
कारण
बिभव
कुमार
को
बाहरी
दुनिया
के
साथ
दिल्ली
के
मुख्यमंत्री
का
सेतु
कहा
जाता
है.
बिभव
कुमार
दिल्ली
सचिवालय
और
सीएम
के
कैंप
कार्यालय
में
विभिन्न
आधिकारिक
काम
को
देखते
हैं.
साथ
ही
उनको
पार्टी
पदाधिकारियों,
मीडिया
और
अन्य
लोगों
के
लिए
केजरीवाल
से
जुड़ने
का
एकमात्र
जरिया
भी
कहा
जाता
है.
चाहे
कोई
राजनीतिक
बैठक
हो,
सार्वजनिक
समारोह
हो
या
निजी
कार्यक्रम,
जिसमें
केजरीवाल
शामिल
हों,
वहां
विभव
हमेशा
उनके
साथ
साए
की
तरह
मौजूद
रहते
हैं.
दिल्ली
विश्वविद्यालय
से
मास्टर
डिग्री
और
पत्रकारिता
में
मास्टर
डिप्लोमा
हासिल
करने
के
बाद
43
वर्षीय
बिभव
कुमार
कथित
तौर
पर
पूर्व
डिप्टी
सीएम
और
AAP
के
संस्थापक
सदस्य
मनीष
सिसोदिया
द्वारा
संचालित
एक
एनजीओ
कबीर
में
अपने
कार्यकाल
के
दौरान
केजरीवाल
के
संपर्क
में
आए.
जल्द
ही
विभव
केजरीवाल
के
निजी
सचिव
के
तौर
पर
उनका
काम
देखने
लगे.
सूत्रों
ने
कहा
कि
लगभग
उसी
समय
उनकी
मुलाकात
स्वाति
मालीवाल
से
हुई,
जो
उनके
द्वारा
संचालित
एनजीओ
पब्लिक
कॉज
रिसर्च
फाउंडेशन
में
केजरीवाल
की
सलाहकार
थीं.
बिभव
और
मालीवाल
ने
कुछ
परियोजनाओं
पर
संयुक्त
रूप
से
काम
किया
है.
2012
में
जब
केजरीवाल
ने
इंडिया
अगेंस्ट
करप्शन
आंदोलन
शुरू
किया,
तब
बिभव
लगातार
उनके
साथ
थे.
हालांकि
वह
हमेशा
पर्दे
के
पीछे
काम
करने
के
लिए
जाने
जाते
हैं.
लेकिन
पिछले
साल
बिभव
प्रमुखता
में
आए
जब
दिल्ली
सरकार
के
सतर्कता
निदेशालय
ने
पीडब्ल्यूडी
से
पूछा
कि
नियमों
का
उल्लंघन
करते
हुए
टाइप
VI
बंगला
उन्हें
क्यों
आवंटित
किया
गया
है.
तीन
माह
के
अंदर
ही
पीडब्ल्यूडी
ने
आवास
का
आवंटन
निरस्त
कर
दिया.
इस
साल
फरवरी
में
ईडी
ने
बिभव
से
जुड़े
परिसरों
सहित
विभिन्न
स्थानों
पर
छापेमारी
की.
अप्रैल
में
जांच
एजेंसी
ने
उनसे
दिल्ली
शराब
नीति
मामले
के
संबंध
में
पूछताछ
की.
कथित
तौर
पर
वह
दिल्ली
शराब
नीति
और
दिल्ली
जल
बोर्ड
में
कथित
अनियमितताओं
से
जुड़ी
मनी
लॉन्ड्रिंग
जांच
के
सिलसिले
में
ईडी
की
जांच
के
दायरे
में
थे.
अप्रैल
में
सतर्कता
निदेशालय
ने
मुख्यमंत्री
के
निजी
सचिव
के
रूप
में
बिभव
कुमार
की
सेवाएं
खत्म
कर
दीं.
हालांकि
बिभव
ने
केंद्रीय
प्रशासनिक
न्यायाधिकरण
में
फैसले
का
विरोध
किया.
लेकिन
वह
स्टे
पाने
में
असफल
रहे.
बिभव
के
खिलाफ
सतर्कता
निदेशालय
ने
2007
के
एक
पुराने
लंबित
मामले
का
हवाला
दिया
था.
जिसमें
उन
पर
सरकारी
काम
में
बाधा
डालने
का
आरोप
लगाया
गया
था.
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FIRST
PUBLISHED
:
May
19,
2024,
21:53
IST