

Active
vs
Passive
Investing
:
निवेश
करने
के
ढेरों
तरीके
हैं.
मगर
इन
दिनों
आम
लोगों
के
बीच
म्यूचुअल
फंड
के
जरिए
निवेश
करने
का
तरीका
काफी
तेजी
से
प्रचलन
में
आया
है.
अब
म्यूचुअल
फंड
को
भी
आगे
कई
कैटेगरीज़
में
बांटा
गया
है.
निवेश
को
मौटे
तौर
पर
सक्रिय
और
निष्क्रिय
निवेश
(एक्टिव
और
पैसिव
इनवेस्टिंग)
में
बांटा
गया
है.
इसे
आसान
भाषा
में
समझने
के
लिए
हम
चुस्त
और
सुस्त
निवेश
नाम
दे
रहे
हैं.
इन
दोनों
में
क्या
फर्क
है,
और
निवेश
का
कौन-सा
तरीका
ज्यादा
आपके
लिए
उपयुक्त
होगा?
वारेन
बफेट
जैसे
बड़े-बड़े
निवेशक
किसे
बेहतर
मानते
हैं
और
क्यों?
इस
लेख
का
मकसद
इसी
मुद्दे
पर
विस्तार
से
प्रकाश
डालना
है.
पहले
एक्टिव
और
पैसिव
निवेश
के
बारे
में
समझ
लेना
चाहिए.
शेयर
या
अन्य
निवेश
को
बार-बार
खरीदने
वाले
निवेशकों
को
एक्टिव
इनवेस्टर
अथवा
चुस्त
निवेशक
कहा
जाता
है,
ये
लोग
ऐसे
निवेश
ढूंढ़ते
और
खरीदते
हैं,
जो
जल्दी
लाभ
दे
सकने
की
संभावना
रखते
हों.
जो
शेयर
उनके
हिसाब
से
परफॉर्म
नहीं
करते
हैं,
उन्हें
जल्दी
से
बेच
भी
देते
हैं.
पैसिव
अथवा
सुस्त
निवेशक
बार-बार
निवेश
करने
के
बजाय
म्यूचुअल
फंड
(MF)
या
एक्सचेंज-ट्रेडेड
फंड
(ETF)
खरीदते
हैं
और
उन्हें
लंबे
समय
तक
रखते
हैं.
ये
निवेशक
फंड
मैनेजरों
पर
भरोसा
करते
हैं
और
अपने
पैसे
को
धीमे-धीमे
बढ़ते
हुए
देखना
पसंद
करते
हैं.
अब
इन्हें
थोड़ा
और
विस्तार
में
समझाते
हैं.
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पैसा?
क्या
होता
है
एक्टिव
इनवेस्टमेंट?
सक्रिय
अथवा
चुस्त
निवेश
में
एक
किसी
ऐसे
शख्स
की
जरूरत
होती
है,
जो
पोर्टफोलियो
को
मैनेज
कर
सके.
मैनेज
करने
वाला
कोई
प्रोफेशनल
भी
हो
सकता
है
और
कोई
व्यक्ति
अपना
पोर्टफोलियो
खुद
भी
संभाल
सकता
है.
इस
तरह
के
निवेश
का
मुख्य
उद्देश्य
शॉर्ट
टर्म
में
प्राइस
के
उतार-चढ़ाव
को
मैनेज
करना
होता
है
और
उससे
अधिक
से
अधिक
रिटर्न
हासिल
करना
होता
है.
इसके
लिए
निवेशकों
को
गहराई
से
रिसर्च
करनी
पड़ती
है.
इसी
रिसर्च
के
जरिए
वे
किसी
शेयर,
बॉन्ड
या
एसेट
को
खरीदते
हैं
और
इसी
के
आधार
पर
एग्जिट
होते
हैं.
आमतौर
पर,
एक
पोर्टफोलियो
मैनेजर
एनालिस्टों
के
एक
ग्रुप
का
नेतृत्व
करता
है,
जो
सभी
तरह
से
आंकड़ों
को
परखते
हैं
और
पहले
से
तय
किए
गए
मापदंडों
और
मानदंडों
का
उपयोग
करके
यह
तय
करते
हैं
कि
खरीदना
या
बेचना
है
या
नहीं.
पैसिव
इनवेस्टमेंट
क्या
है
और
कैसे
करता
है
काम?
इसे
हिन्दी
में
निष्क्रिय
निवेश
कहा
जाता
है.
इस
तरह
के
निवेशक
लम्बी
समयावधि
के
लिए
निवेश
करते
हैं.
निष्क्रिय
निवेशक
के
रूप
में
निवेश
करना
बहुत
ही
किफायती
हो
सकता
है,
क्योंकि
उनके
पोर्टफोलियो
में
खरीद
और
बिक्री
सीमित
हो
जाती
है.
इसमें
शेयर
बाजार
को
लेकर
अटकलबाजी
नहीं
होती
और
एकरूप
निरंतर
निवेश
चलता
रहता
है.
एक
उदाहरण
के
लिए
इंडेक्स
(निफ्टी50
या
सेसेंक्स)
फंड
में
निवेश
करने
वालों
को
किसी
तरह
की
कोई
परेशानी
नहीं
होती,
क्योंकि
ये
इंडेक्स
खुद
ही
अपने
आप
को
ठीक
करते
रहते
हैं.
समय-समय
पर
अगर
कोई
शेयर
कमजोर
पड़ता
है
तो
उसे
बाहर
कर
दिया
जाता
है,
जबकि
अच्छा
करने
वाले
स्टॉक
को
अंदर
ले
लिया
जाता
है.
इस
तरह
ये
इंडेक्स
इंडस्ट्री
के
बेहतरीन
शेयरों
का
एक
ग्रुप
बन
जाता
है.
आपके
लिए
कौन-सा
बेहतर?
सक्रिय
और
निष्क्रिय
निवेश
एक
ही
सिक्के
के
दो
पहलू
हैं.
आपको
किसमें
निवेश
करना
चाहिए,
इस
बारे
में
आपको
अपने
हिसाब
से
देखना
होगा.
हालांकि
रिसर्च
ये
कहती
है
कि
पैसिव
इनवेस्टमेंट
बेहतर
होता
है.
इसमें
निवेश
काफी
सरल
और
सस्ता
हो
जाता
है.
इसके
उलट,
यदि
किसी
निवेशक
को
शेयर
बाजार
की
बहुत
अच्छी
समझ
है
तो
वह
एक्टिव
इनवेस्टमेंट
भी
कर
सकता
है.
नामी
निवेशकों
ने
क्या
दिया
सुझाव
वॉरेन
बफेट
:
वॉरेन
बफेट
ने
बार-बार
निष्क्रिय
निवेश
को
प्राथमिकता
दी
है.
उन्होंने
निवेशकों
को
कई
बार
कम
लागत
वाले
इंडेक्स
फंड
में
निवेश
करने
की
सलाह
दी
है.
वह
मानते
हैं
कि
ऐसा
करने
से
निष्क्रिय
निवेशकों
को
सक्रिय
निवेशकों
की
तुलना
में
अच्छा
रिजल्ट
मिलेगा.
जॉन
सी.
बोर्गेयर
:
वैनगार्ड
ग्रुप
के
संस्थापक
और
इंडेक्स
फंडिंग
के
पक्षधर
जॉन
बोर्गेयर
ने
निष्क्रिय
निवेश
के
विचार
को
लोकप्रिय
बनाया.
उनका
मानना
है
कि
कम
लागत
वाले
इंडेक्स
फंड्स
में
निवेश
लंबे
समय
में
निवेशकों
के
लिए
बेहतर
होता
है.
वे
कहते
हैं,
“एक
सरल
इंडेक्स
फंड
को
रखने
से
आपको
बेजोड़
सफलता
मिल
सकती
है.”
चार्ली
मुंगेर
:
बर्कशायर
हैथवे
के
उपाध्यक्ष
और
वॉरेन
बफेट
के
लंबे
समय
के
साथी
चार्ली
मुंगेर
का
मानना
है
कि
सक्रिय
निवेश
से
बेहतर
होगा
कि
निष्क्रिय
निवेश
किया
जाए.
इससे
ज्यादा
लाभ
मिलेगा.
वे
दो
टूक
कहते
हैं-
अधिकांश
लोगों
को
बस
निष्क्रिय
निवेश
करना
चाहिए.
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FIRST
PUBLISHED
:
July
12,
2024,
18:08
IST