

वित्त
मंत्री
निर्मला
सीतारमण
मोदी
सरकार
के
तीसरे
कार्यकाल
के
पहले
बजट
में
केंद्रीय
कर्मचारियों
को
बड़ा
तोहफा
देने
की
तैयारी
में
हैं.
इससे
कर्मचारियों
के
वेतन
और
रियाटर
कर्मचारियों
की
पेंशन
में
भारी
इजाफा
हो
सकता
है.
मौजूदा
वक्त
में
केंद्र
सरकार
के
एक
करोड़
से
अधिक
कर्मचारी
हैं.
इसके
अलावा
50
से
अधिक
रिटायर
कर्मचारी
हैं.
ये
सभी
लंबे
समय
से
आठवें
वेतन
आयोग
के
गठन
की
मांग
कर
रहे
हैं.
उनकी
यह
मांग
काफी
समय
से
लंबित
है.
इससे
पहले
पूर्व
प्रधानमंत्री
मनमोहन
सिंह
की
सरकार
ने
सातवें
वेतन
आयोग
का
गठन
किया
था.
उसकी
सिफारिशों
को
1
जनवरी
2016
से
प्रभावी
बनाया
गया.
उसी
हिसाब
से
मौजूदा
वक्त
में
केंद्रीय
कर्मचारियों
को
वेतन
और
पेंशन
मिल
रहा
है.
बीते
चुनावों
में
ओल्ड
पेंशन
स्कीम
और
आठवें
वेतन
आयोग
के
गठन
की
मांग
चुनावी
मुद्दा
बना
था.
ऐसे
में
माना
जा
रहा
है
कि
सरकार
इसको
लेकर
दबाव
में
है.
आमतौर
पर
वेतन
आयोग
का
गठन
हर
10
साल
पर
होता
है.
छठे
वेतन
आयोग
कि
सिफारिसों
को
1
जनवरी
2006
से
प्रभावी
बनान
गया
था.
2026
से
लागू
करने
की
संभावना
इस
तरह
पैटर्न
को
देखें
तो
सरकार
को
एक
जनवरी
2026
से
आठवें
वेतन
आयोग
की
सिफारिशों
को
प्रभावी
बनाना
पड़
सकता
है.
ऐसे
में
इससे
पहले
आयोग
के
गठन
की
संभावना
है.
क्योंकि
आयोग
को
अपनी
रिपोर्ट
सौंपने
में
ठीकठाक
समय
लगता
है.
हालांकि
अगस्त
2022
में
केंद्र
सरकार
ने
आठवें
वेतन
आयोग
के
गठन
की
किसी
भी
संभावना
से
इनकार
किया
था.
लेकिन,
अब
तक
करीब
दो
साल
का
समय
बीत
चुका
है.
देश
में
राजनीतिक
हालात
भी
बदल
चुके
हैं.
केंद्र
में
पीएम
मोदी
के
नेतृत्व
में
एक
नई
सरकार
है.
ऐसे
में
बदली
हुई
परिस्थितियों
में
आठवें
वेतन
आयोग
के
गठन
की
संभावना
से
इनकार
नहीं
किया
जा
सकता.
इस
वक्त
केंद्रीय
कर्मचारियों
को
मूल
वेतन
पर
53
फीसदी
महंगाई
भत्ता
मिल
रहा
है.
अगर
आठवें
वेतन
आयोग
का
गठन
होता
है
तो
आम
पर
उसकी
सिफारिशों
में
डीए
को
मर्ज
कर
नई
बेसिक
सैलरी
स्लैब
बनाने
का
सुझाव
होता
है.
फिर
उस
पर
डीए
का
निर्धारण
किया
जाता
है.
इस
तरह
से
कर्मचारियों
की
सैलरी
में
एक
मुश्त
बड़ी
बढ़ोतरी
हो
जाती
है.
Tags:
7th
pay
commission,
Budget
session
FIRST
PUBLISHED
:
July
23,
2024,
10:16
IST