चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में धांधली के आरोपी अधिकारी अनिल मसीह ने मांगी माफी, लगा था ये आरोप

चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में धांधली के आरोपी अधिकारी अनिल मसीह ने मांगी माफी, लगा था ये आरोप
चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में धांधली के आरोपी अधिकारी अनिल मसीह ने मांगी माफी, लगा था ये आरोप


अनिल
मसीह

चंडीगढ़
में
मेयर
चुनाव
के
दौरान
धांधली
के
आरोपी
पूर्व
अधिकारी
अनिल
मसीह
ने
शुक्रवार
को
सुप्रीम
कोर्ट
ने
माफी
मांग
ली.
चंडीगढ़
में
30
जनवरी
2024
को
हुए
मेयर
चुनाव
में
8
मतों
के
अवैध
घोषित
करने
के
मामले
में
शुक्रवार
को
सुप्रीम
कोर्ट
में
सुनवाई
हुई.
इस
सुनवाई
के
दौरान
उन्होंने
माफी
मांगी.
फरवरी
में
इस
पर
सुनवाई
करते
हुए
सुप्रीम
कोर्ट
ने
पूर्व
चुनाव
अधिकारी
अनिल
मसीह
के
खिलाफ
कोर्ट
की
अवमानना
​​के
मामले
में
नोटिस
जारी
किया
था.
कोर्ट
ने
माना
था
कि
उन्होंने
जानबूझकर
वोटों
को
अवैध
किया
था
और
बाद
में
कोर्ट
में
अपने
झूठे
बयान
दर्ज
कराए
थे.

अनिल
मसीह
ने
सुप्रीम
कोर्ट
से
माफी
मांगी
है.
उन्होंने
कोर्ट
में
कहा
है
कि
इस
मामले
में
उनसे
गलती
हुई
है.
चंडीगढ़
के
बीजेपी
मेयर
के
फैसले
को
कोर्ट
पहले
ही
खारिज
कर
चुका
है.

वकील
मुकुल
रोहतगी
ने
कहा
है
कि
हमने
बिना
शर्त
माफी
मांगी
है.
अब
अनिल
मसीह
अपना
पुराना
हलफनामा
वापस
लेंगे
और
दूसरा
हलफनामा
देकर
बिना
शर्त
माफी
मांगेंगे.
वरिष्ठ
वकील
सिंघवी
ने
कहा
कि
अगर
वह
बिना
शर्त
माफी
मांगते
हैं
तो
उन्हें
कोई
दिक्कत
नहीं
है.

ये
भी
पढ़ें

अनिल
मसीह
ने
मांगी
माफी

नोटिस
के
जवाब
में
चुनाव
अधिकारी
अनिल
मसीह
ने
पहले
कोर्ट
में
जवाब
दिया
था
कि
जब
वह
आखिरी
बार
सुप्रीम
कोर्ट
में
अपना
बयान
देने
आए
थे
तो
उनकी
तबीयत
ठीक
नहीं
थी.
वह
चंडीगढ़
पीजीआई
से
अधिक
मात्रा
में
ड्रग्स
ले
रहे
थे.
इस
वजह
से
उन्हें
नहीं
पता
कि
उन्होंने
क्या
बयान
दिया
है.

अनिल
मसीह
द्वारा
आठ
मतों
को
रद्द
करने
के
मामले
के
बाद
काफी
सियासी
विवाद
पैदा
हुआ
था.
इसे
लेकर
आम
आदमी
पार्टी
ने
बीजेपी
पर
जमकर
हमला
बोला
था
और
बाद
में
कोर्ट
ने
इस
मतगणना
के
अवैध
करार
दिया
था.

जानिए
क्या
था
मामला

30
जनवरी
को
हुए
नगर
निगम
चुनाव
में
बीजेपी
को
कुल
16
वोट
पड़े
थे,
जिनमें
बीजेपी
के
14
पार्षद,
अकाली
दल
का
एक
पार्षद
और
एक
सांसद
शामिल
हैं.
जबकि
इंडिया
गठबंधन
को
20
वोट
मिले,
जिसमें
आम
आदमी
पार्टी
के
13
और
कांग्रेस
के
7
पार्षद
शामिल
हैं.
लेकिन
चुनाव
अधिकारी
अनिल
मसीह
ने
गठबंधन
के
आठ
वोटों
को
अवैध
घोषित
कर
दिया.
जब
ये
मामला
सुप्रीम
कोर्ट
तक
पहुंचा
तो
कोर्ट
में
ये
माना
गया
कि
चुनाव
अधिकारी
खुद
कैमरे
के
सामने
वोट
पर
निशान
लगा
रहे
थे.