
भाजपा,
सपा
और
बसपा
का
चुनाव
चिन्ह।
–
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:
अमर
उजाला
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करें
सियासत
साजिशों
का
ऐसा
खेल
है
जिसमें,
कई
चालों
को
खुद
से
छिपाकर
चलना
पड़ता
है।
पश्चिमी
उत्तर
प्रदेश
का
सियासी
मंजर
शायर
अशोक
साहिल
के
इस
शेर
की
नुमाइंदगी
करता
नजर
आ
रहा
है।
दरअसल,
लोकसभा
चुनाव
में
टिकट
की
बिसात
पर
सबने
अपनी
चाल
चली।
कुछ
आगे
निकल
गए
तो
कुछ
पिछड़
गए।
प्रचार
का
रणसिंघा
गूंजते
ही
शह-मात
और
भितरघात
का
सिलसिला
भी
शुरू
हो
गया
है।
इसके
तहत
टिकट
न
मिलने
से
अंतर्कलह,
गुटबाजी
और
वजूद
की
लड़ाई
की
गुंजाइश
बढ़
गई
है।
इस
सियासी
तापमान
से
प्रत्याशियों
की
पेशानी
पर
पसीना
झलक
रहा
है।
चुनाव
डेस्क
की
रिपोर्ट…
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