इलेक्टोरल बॉन्ड से लेकर चंडीगढ़ मेयर तक… पिछले तीन महीने में ये रहे सर्वोच्च अदालत के ‘सुप्रीम’ फैसले

इलेक्टोरल बॉन्ड से लेकर चंडीगढ़ मेयर तक… पिछले तीन महीने में ये रहे सर्वोच्च अदालत के ‘सुप्रीम’ फैसले
इलेक्टोरल बॉन्ड से लेकर चंडीगढ़ मेयर तक… पिछले तीन महीने में ये रहे सर्वोच्च अदालत के ‘सुप्रीम’ फैसले


इलेक्टोरल
बॉन्ड
पर
SBI
को
सुप्रीम
कोर्ट
से
राहत
नहीं
मिली
है.

कहते
हैं
अगर
किसी
की
शिकायत
कहीं
नहीं
सुनी
जाती
है
तो
उसकी
बात
कोर्ट
सुनता
है.
यही
कारण
है
कि
कोर्ट
को
किसी
भी
देश
की
न्याय
व्यवस्था
के
लिए
काफी
अहम
माना
जाता
है.
सुप्रीम
कोर्ट
भारत
का
सर्वोच्च
न्यायालय
है
और
इसका
मुख्य
काम
देश
में
कानून
का
पालन
सुनिश्चित
करना
है.
सुप्रीम
कोर्ट
ने
साल
2024
के
पिछले
तीन
महीने
में
कई
अहम
फैसले
दिए
हैं.
वैसे
तो
पिछले
तीन
महीने
में
सुप्रीम
कोर्ट
में
कई
मुद्दे
पहुंचे
और
कई
मुद्दों
पर
अहम
फैसले
भी
आए,
लेकिन
हम
आपको
उन
फैसलों
के
बारे
में
बताने
जा
रहे
हैं
जो
चर्चा
में
रहे.
सुप्रीम
कोर्ट
के
इन
फैसलों
ने
हर
किसी
को
न्याय
पर
ना
सिर्फ
भरोसा
करने
के
लिए
प्रेरित
किया
बल्कि
सुरक्षा
का
भाव
भी
जगाया.
आइए
जानते
हैं
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कौन-कौन
से
ऐसे
बड़े
फैसले
दिए
जिन
पर
खूब
चर्चा
हुई.

इलेक्टोरल
बॉन्ड
का
‘सच’
आया
सामने

6
साल
बाद
आखिरकार
इलेक्टोरल
बॉन्ड
का
सच
सबके
सामने

गया.
हालांकि
ये
सच
इतनी
आसानी
से
सामने
नहीं
आया
है.
राजनीतिक
पार्टियों
को
चुनावी
बॉन्ड
के
जरिए
मिले
डोनेशन
को
सार्वजनिक
करने
के
लिए
देश
की
शीर्ष
अदालत
को
एक्शन
लेना
पड़ा.
यही
नहीं
सुप्रीम
कोर्ट
ने
इस
मामले
में
स्टेट
बैंक
ऑफ
इंडिया
को
कई
बार
फटकार
लगाई.
आखिरकर
एसबीआई
की
ओर
से
दिए
गए
डेटा
को
चुनाव
आयोग
ने
14
मार्च
2024
को
अपनी
वेबसाइट
पर
शेयर
कर
दिया.

चंडीगढ़
मेयर
चुनाव

चंडीगढ़
मेयर
चुनाव
को
लेकर
भी
सुप्रीम
कोर्ट
ने
बड़ा
फैसला
दिया
था.
कोर्ट
ने
अपने
अहम
फैसले
में
कहा
कि
मेयर
चुनाव
को
लेकर
जिन
8
वोटों
को
अवैध
घोषित
किया
गया
था
वो
आम
आदमी
पार्टी
के
पक्ष
में
पड़े
थे.
चीफ
जस्टिस
की
अगुवाई
वाली
बेंच
ने
मेयर
चुनाव
के
दौरान
डाली
गई
बैलेट
पेपर्स
की
जांच
करने
के
बाद
कहा
कि
जिन
8
वोटों
को
अवैध
घोषित
किया
गया
है
वो
आप
नेता
कुलदीप
कुमार
के
पक्ष
में
डाले
गए
थे.
सुप्रीम
कोर्ट
के
इस
फैसले
के
साथ
ही
चंडीगढ़
का
मेयर
कुलदीप
कुमार
को
बनाया
गया.

बिलकिस
बानो
केस

सुप्रीम
कोर्ट
ने
बिलकिस
बानो
केस
में
भी
अहम
फैसला
दिया.
सर्वोच्च
न्यायालय
ने
बिलकिस
बानो
गैंगरेप
के
दोषियों
को
सजा
में
छूट
देने
वाले
गुजरात
सरकार
के
फैसले
को
रद्द
कर
दिया.
बता
दें
कि
अगस्त
2022
को
अपने
अहम
फैसले
में
गुजरात
सरकार
ने
बिलकिस
बानो
गैंगरेप
केस
में
उम्रकैद
की
सजा
पाए
सभी
11
दोषियों
को
रिहा
कर
दिया
था.
बिलकिस
बानो
ने
इस
फैसले
को
सुप्रीम
कोर्ट
में
चुनौती
दी
थी.

मदरसा
बोर्ड

सुप्रीम
कोर्ट
ने
शुक्रवार
को
अपने
अहम
फैसले
में
इलाहाबाद
हाईकोर्ट
के
22
मार्च
के
आदेश
पर
रोक
लगा
दी.
इलाहाबाद
हाईकोर्ट
ने
अपने
आदेश
में
‘यूपी
बोर्ड
ऑफ
मदरसा
एजुकेशन
एक्ट
2004’
को
असंवैधानिक
बताया
था.
सुप्रीम
कोर्ट
ने
कहा,
हाईकोर्ट
का
ये
कहना
कि
मदरसा
बोर्ड
संविधान
के
धर्मनिरपेक्ष
सिद्धांत
का
उल्लंघन
करता
है,
बिल्कुल
ठीक
नहीं
है.
सुप्रीम
कोर्ट
के
इस
फैसले
का
सीधा
असर
मदरसा
बोर्ड
के
17
लाख
छात्रों
और
10
हजार
अध्यापकों
पर
पड़ेगा.

नवनीत
राणा
को
राहत

महाराष्ट्र
के
अमरावती
से
बीजेपी
नेता
नवनीत
कौर
राणा
को
सुप्रीम
कोर्ट
से
बड़ी
राहत
मिली.
सुप्रीम
कोर्ट
ने
बॉम्बे
हाईकोर्ट
के
उस
फैसले
को
रद्द
कर
दिया,
जिसमें
नवनीत
राणा
के
जाति
प्रमाण
पत्र
को
सही
ठहराया
गया
था.
नवनीत
राणा
ने
जाति
प्रमाणपत्र
रद्द
करने
के
फैसले
को
सुप्रीम
कोर्ट
में
चुनौती
दी
थी.
बता
दें
कि
बॉम्बे
हाईकोर्ट
ने
8
जून
2021
को
कहा
था
कि
नवनीत
राणा
ने
मोची
जाति
का
प्रमाण
पत्र
फर्जी
दस्तावेज
के
आधार
पर
हासिल
किया
था.
इस
मामले
में
कोर्ट
ने
नवनीत
राणा
पर
दो
लाख
रुपए
का
जुर्माना
भी
लगाया
था.

सदन
में
नोट
लेकर
वोट

सुप्रीम
कोर्ट
ने
वोट
के
बदले
नोट
के
मामले
में
बड़ा
फैसला
सुनाया.
सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
के
बाद
अब
अगर
सांसद
पैसे
लेकर
सदन
में
भाषण
देता
है
या
फिर
वोट
देता
है
तो
उनके
खिलाफ
केस
चलाया
जाएगा.
इसका
मतलब
साफ
है
कि
इस
मामले
में
अब
सांसदों
को
किसी
भी
तरह
की
कानूनी
छूट
नहीं
मिल
सकेगी.
बता
दें
कि
सुप्रीम
कोर्ट
ने
1998
के
नरसिम्हा
राव
के
फैसले
को
पलट
दिया.
1998
में
5
जजों
की
संविधान
पीट
ने
3:2
के
बहुमत
से
तय
किया
था
कि
इस
तरह
के
मामले
को
लेकर
जनप्रतिनिधियों
पर
मुकदमा
नहीं
चलाया
जा
सकता
है.

फैक्ट
चेक
यूनिट

सुप्रीम
कोर्ट
ने
केंद्र
सरकार
को
बड़ा
झटका
देते
हुए
फैक्ट
चेक
यूनिट
की
अधिसूचना
पर
रोक
लगा
दी.
केंद्र
सरकार
ने
ऑनलाइन
मीडिया
पर
फर्जी
कंटेंट
की
पहचान
के
लिए
फैक्ट
चेकिंग
यूनिट
तैयार
की
थी.
आईटी
नियमों
में
किए
गए
संशोधन
के
मुताबिक
अगर
फैक्टर
चेक
यूनिट,
केंद्र
सरकार
के
जुड़ी
किसी
खबर
या
जानकारी
को
फर्जी
पाता
है
तो
उसे
तुरंत
सोशल
मीडिया
से
हटाना
होगा.
अगर
सोशल
मीडिया
से
ऐसे
कंटेंट
को
हटाया
नहीं
जाता
है
तो
उस
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म
पर
कानूनी
कार्रवाई
की
जाएगी.

ज्ञानवापी
केस

सुप्रीम
कोर्ट
ने
इलाहाबाद
हाईकोर्ट
के
उस
आदेश
पर
रोक
लगाने
से
इनकार
कर
दिया
था,
जिसने
वाराणसी
जिला
अदालत
के
उस
आदेश
को
बरकरार
रखा
गया
था.
बता
दें
कि
जिला
अदालत
ने
ज्ञानवापी
मस्जिद
के
दक्षिणी
तहखाने
‘व्यास
जी
तहखाना’
में
हिंदुओं
को
पूजा
की
अनुमति
दी
गई
थी.