UP: अमेठी में सियासी सूरमाओं ने गंवाई जमानत… 2019 के चुनाव में 28 में से 26 उम्मीदवार न बचा पाए थे

UP:                                    अमेठी में सियासी सूरमाओं ने गंवाई जमानत… 2019 के चुनाव में 28 में से 26 उम्मीदवार न बचा पाए थे
UP:                                    अमेठी में सियासी सूरमाओं ने गंवाई जमानत… 2019 के चुनाव में 28 में से 26 उम्मीदवार न बचा पाए थे

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election
2024


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार

अमेठी
का
अपना
एक
अलग
मिजाज
है।
सियासत
का
मैदान
हो
या
फिर
कुछ
और,
यहां
के
मतदाताओं
ने
हर
बार
कुछ
नया
किया
है।
कभी
जीत
का
रिकॉर्ड
बनाया
तो
कभी
सियासी
सूरमाओं
को
ऐसा
सबक
दे
दिया
कि
वह
हार
के
साथ
अपनी
जमानत
तक
गवां
बैठे। 

चाहे
वह
मेनका
गांधी
हो
या
फिर
बसपा
के
संस्थापक
कांशीराम,
जनता
दल
के
शरद
यादव

आम
आदमी
पार्टी
से
चुनाव
लड़
चुके
डॉ.
कुमार
विश्वास।
इन
नेताओं
की
अमेठी
में
जमानत
तक
जब्त
हो
चुकी
है।
 

वर्ष
1967
में
अस्तित्व
में
आई
अमेठी
का
पहला
चुनाव
कांग्रेस
के
विद्याधर
वाजपेयी
ने
जीता।
इस
चुनाव
में
छह
उम्मीदवारों
में
से
चार
की
जमानत
जब्त
हो
गई। 

1971
के
चुनाव
में
जीत
दर्ज
करने
वाले
कांग्रेस
के
विद्याधर
के
अलावा
मैदान
में
उतरे
चार
अन्य
प्रत्याशी
जमानत
तक
नहीं
बचा
सके।
1977
के
चुनाव
में
भारतीय
राष्ट्रीय
लोकदल
के
रवींद्र
प्रताप
सिंह

कांग्रेस
के
संजय
गांधी
को
छोड़कर
दो
अन्य
को
हार
के
साथ
जमानत
तक
गंवानी
पड़ी। 


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