
इंदौर
में
‘यूनाइटेड
फोरम
ऑफ
बैंक
रिटायरीज
ऑर्गेनाइजेशन’
के
बैनर
तले
श्री
मध्य
भारत
हिन्दी
साहित्य
समिति
में
विरोध
प्रदर्शन
किया
गया।
ऑल
इंडिया
बैंक
रिटायरीज
फेडरेशन,
सभी
बैंक
रिटायरीज
और
पेंशनर्स
का
राष्ट्रीय
स्तर
पर
प्रतिष्ठित
संगठन
है।
इसमें
राष्ट्रीयकृत,
प्राइवेट
तथा
ग्रामीण
बैंक
के
संगठन
संबद्ध
हैं
और
तीन
लाख
से
अधिक
सेवानिवृत्त
साथी
इसके
सदस्य
हैं।
यह
संगठन
बैंक
रिटायरीज
एवं
पेंशनर्स
के
अधिकारों,
सेवाओं
में
कमी,
हितों
की
सुरक्षा
और
सभी
प्रकार
की
मांगों
तथा
समस्याओं
के
समाधान
के
लिए
समर्पित
है,
जहां
पेंशन
अपडेशन
वर्षों
से
पेंशनर्स
की
लंबित
मुख्य
मांग
रही
है।
इसके
लिए
संगठन
कई
वर्षों
से
प्रयासरत
है,
वहीं
स्वास्थ्य
बीमा
पॉलिसी
में
सुधार,
स्वास्थ्य
बीमा
प्रीमियम
पर
जीएसटी
की
सम्पूर्ण
छूट,
तथा
विशेष
भत्ता
को
पेंशन
गणना
में
शामिल
करने
जैसी
कई
अन्य
मांगें
भी
अभी
भी
लंबित
हैं।
सरकार
के
सामने
रखी
मांगे
इन
सभी
मांगों
के
समाधान
हेतु
संगठन
द्वारा
आइबीए,
रिजर्व
बैंक
ऑफ
इंडिया,
वित्त
मंत्रालय,
संसद
सदस्य
एवं
अन्य
सभी
स्तरों
पर
प्रयास
जारी
हैं,
परंतु
सरकार
द्वारा
अब
तक
इन
मांगों
के
समाधान
के
लिए
कोई
ठोस
कदम
नहीं
उठाया
गया
है।
सरकार
का
ध्यान
आकर्षित
करने
और
मांगों
के
त्वरित
समाधान
हेतु
संगठन
द्वारा
पूरे
देशभर
में
सभी
राज्यों
के
प्रमुख
शहरों
में
धरना
प्रदर्शन
किए
जा
रहे
हैं।
मानव
शृंखला
भी
बनाई
इसी
क्रम
में
आज
इंदौर
के
आरएनटी
मार्ग
पर
मानव
शृंखला
भी
बनाई
गई,
जिसमें
इंदौर,
रतलाम,
उज्जैन,
धार,
महू,
देवास,
भोपाल
एवं
आस-पास
के
क्षेत्रों
के
बड़ी
संख्या
में
रिटायरी
सदस्य
शामिल
हुए।
प्रदर्शन
के
दौरान
पोस्टर,
बेनर्स,
घोषणाएं
एवं
भाषणों
के
माध्यम
से
सरकार
का
ध्यान
आकर्षित
करने
का
प्रयास
किया
गया
और
यह
प्रदर्शन
पूरी
तरह
से
शांति
पूर्ण
रहा।
इसमें
ऑल
इंडिया
बैंक
रिटायरीज
फेडरेशन
के
राष्ट्रीय
महासचिव
शरबत
चंद
जैन,
मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़
राज्य
कमेटी
AIBRF
के
चेयरमैन
आर
डी
यादव,
अध्यक्ष
किशोर
धर्माधिकारी,
महासचिव
शरद
व्यास
के
साथ-साथ
सभी
बैंक
के
पदाधिकारी
गण
जैसे
चौरे,
सुरेश
विजयवर्गीय,
अंतर
सिंग
वर्मा,
शिवाजी
मोहिते,
पी
सी
शर्मा,
नंदलाल
माहेश्वरी,
जसबीर
दिलावरी,
राजेश
अहिरे,
खन्ना,
सोलंकी,
परमार,
एन
के
अय्यर
एवं
हरेराम
वाजपेयी
उपस्थित
रहे।
सभी
ने
सभा
को
संबोधित
करते
हुए
सभी
मांगों
को
पुरजोर
तरीके
से
उठाया
और
सरकार
से
इन
सभी
मांगों
को
शीघ्रता
से
स्वीकार
करने
का
आह्वान
किया
गया।