
शहर
के
पेयजल
स्रोतों
से
आरक्षित
पानी
लगातार
चोरी
हो
रहा
है।
नदी,
नालों
और
डैमों
में
बड़ी-बड़ी
मोटर
लगाकर
पानी
निकाला
जा
रहा
है।
यदि
यही
स्थिति
बनी
रही
तो
आने
वाले
दिनों
में
शहरवासियों
के
लिए
आरक्षित
पानी
भी
समाप्त
हो
सकता
है,
जिससे
भीषण
गर्मी
में
जलसंकट
गहरा
सकता
है।
इसे
देखते
हुए
नगरपालिका
(नपा)
एक्शन
मोड
में
आ
गई
है
और
जलाशयों
से
पानी
चोरी
करने
वालों
पर
एफआईआर
दर्ज
कराने
की
तैयारी
कर
रही
है।
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जलाशयों
से
हो
रही
पानी
चोरी,
प्रशासन
की
अनदेखी
बीते
वर्ष
जिले
में
औसत
से
कम
वर्षा
हुई
थी,
जिससे
आगामी
गर्मियों
में
जल
संकट
की
आशंका
बढ़
गई
है।
ऐसे
में
पानी
का
संरक्षण
जिला
प्रशासन
की
प्राथमिकता
होनी
चाहिए,
लेकिन
पिछले
कुछ
महीनों
से
जल
स्रोतों
से
बड़े
पैमाने
पर
पानी
चोरी
हो
रहा
है
और
इस
ओर
किसी
का
ध्यान
नहीं
जा
रहा।
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शहर
के
प्रमुख
जल
स्रोत
काहिरी
बंधान
और
जमोनिया
तालाब
से
बड़ी
मात्रा
में
पानी
चोरी
किया
जा
रहा
है।
कई
स्थानों
पर
पाइप
और
मोटर
लगाकर
रोजाना
पानी
निकाला
जा
रहा
है।
जमोनिया
डैम
के
आसपास
कई
किसानों
ने
पाइपलाइन
और
बिजली
के
तार
बिछा
रखे
हैं,
जिससे
वे
बड़ी
मात्रा
में
तालाब
का
पानी
अवैध
रूप
से
उपयोग
कर
रहे
हैं।
ज्ञात
रहे
कि
सीहोर
नगर
की
जल
आपूर्ति
जमोनिया
तालाब
और
काहिरी
बंधान
पर
निर्भर
है।
यह
जल
स्रोत
शहर
के
कई
वार्डों
में
पेयजल
आपूर्ति
के
लिए
संरक्षित
किए
गए
हैं
और
यह
पानी
किसानों
को
नहीं
दिया
जाता।
बावजूद
इसके,
भगवानपुरा
और
जमोनिया
जलाशयों
से
कई
स्थानों
पर
पानी
चोरी
हो
रहा
है।
नपा
अध्यक्ष
ने
किया
काहिरी
डैम
का
निरीक्षण
शहर
में
जल
वितरण
व्यवस्था
को
सुचारू
बनाए
रखने
के
लिए
शनिवार
को
नगरपालिका
अध्यक्ष
प्रिंस
राठौर
ने
काहिरी
बंधान
का
निरीक्षण
किया।
इस
दौरान
उन्होंने
नगर
पालिका
सीएमओ
से
चर्चा
कर
एक
विशेष
टीम
गठित
करने
के
निर्देश
दिए।
निरीक्षण
के
दौरान
जल
सभापति
संतोष
शाक्य,
सहायक
इंजीनियर
विजय
कोली,
पार्षद
मांगीलाल
मालवीय,
लोकेन्द्र
वर्मा
सहित
नपा
का
अमला
मौजूद
रहा।
पानी
चोरी
रोकने
सख्त
कदम
उठाएगी
नपा
नपा
के
सीएमओ
भूपेंद्र
दीक्षित
ने
कहा
कि
आरक्षित
जलाशयों
से
पानी
का
दुरुपयोग
करने
वालों
के
खिलाफ
प्रकरण
दर्ज
किए
जाएंगे।
इसके
अलावा
जलाशयों
की
नियमित
निगरानी
के
लिए
नावों
से
कर्मचारियों
की
तैनाती
के
निर्देश
भी
दिए
गए
हैं,
ताकि
जलाशयों
की
सुरक्षा
सुनिश्चित
की
जा
सके।
नगरपालिका
द्वारा
की
जा
रही
इस
कार्रवाई
से
उम्मीद
की
जा
रही
है
कि
जल
स्रोतों
की
रक्षा
होगी
और
गर्मियों
में
शहर
को
पेयजल
संकट
से
बचाया
जा
सकेगा।