
देशमुख
की
15वीं
पुण्यतिथि
के
मौके
पर
चित्रकूट
में
कार्यक्रम
में
शामिल
हुए।
इस
अवसर
पर गृह
एवं
सहकारिता
मंत्री
अमित
शाह
ने
चित्रकूट
में
“नवीनीकृत
प्रकल्प
राम
दर्शन”
का
रिमोट
से
लोकार्पण
किया। इस
अवसर
पर
अमित
शाह
ने
नानाजी
देशमुख
के
योगदानों
की
सराहना
करते
हुए
उनकी
ग्राम
स्वराज
की
अवधारणा
को
आज
भी
प्रासंगिक
बताया।
उन्होंने
कहा
कि
उनका
स्वराज
का
सिद्धांत
आज
भी
गांवों
को
आत्मनिर्भर
बनाने
की
दिशा
में
प्रेरणादायक
है।
शाह
ने
कहा
कि
नानाजी
देशमुख
जैसे
महान
व्यक्तित्वों
ने
हमेशा
राष्ट्रप्रथम
की
विचारधारा
को
अपनाया
और
समर्पित
होकर
देश
की
सेवा
की।
अमित
शाह
ने
आगे
कहा
कि
कुछ
लोग
ऐसे
होते
हैं,
जो
अपनी
जीवनशैली
और
कार्यों
से
समाज
पर
गहरी
छाप
छोड़ते
हैं
और
युग
परिवर्तन
का
कारण
बनते
हैं।
नानाजी
देशमुख
उन
महान
व्यक्तियों
में
से
एक
थे।
में
केंद्रीय
गृहमंत्री
ने
नए
राम
दर्शन
और
पंडित
दीनदयाल
उपाध्याय
की
नई
मूर्ति
का
अनावरण
किया।
शाह
ने
कहा
कि
यहां
तीन
बड़े
कार्यक्रम
आयोजित
किए
गए
हैं।
नानाजी
देशमुख
की
पुण्यतिथि,
अंत्योदय
विचारधारा
पर
मंथन
और
चित्रकूट
के
विकास
का
संकल्प।
नानाजी
ने
पूरे
तीर्थ
क्षेत्र
को
जीवंत
किया
है।
उन्होंने
कहा
कि
मैं
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
का
धन्यवाद
करता
हूं
कि
उन्होंने
एक
सच्चे
राष्ट्र
सेवक
को
भारत
रत्न
से
सम्मानित
किया।
इस
अवसर
पर
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
भी
उपस्थित
हुए।
उन्होंने
नानाजी
देशमुख
के
जीवन
के
संघर्षों
और
उनके
कार्यों
को
याद
करते
हुए
बीजेपी
नेताओं
ने
उनके
योगदान
को
प्रेरणास्पद
बताया।
कौन
थे
नानाजी
देशमुख
बता
दें
नानाजी
देशमुख
का
जन्म
11
अक्टूबर
1916
को
महाराष्ट्र
के
हिंगोली
जिले
के
कडोली
में
हुआ
था।
उनका
परिवार
मराठी
भाषी
ब्राह्मण
था।
अपनी
शिक्षा
के
लिए
पैसे
जुटाने
के
लिए
उन्होंने
सब्जी
बेचने
तक
का
काम
किया।
नानाजी
ने
सीकर
में
हाई
स्कूल
की
पढ़ाई
की,
जहां
उन्हें
रावराजा
से
स्कॉलरशिप
प्राप्त
हुई।
इसके
बाद
नानाजी
ने
बिड़ला
कॉलेज
में
अपनी
उच्च
शिक्षा
जारी
रखी
और
साथ
ही
राष्ट्रीय
स्वयंसेवक
संघ
(RSS)
से
जुड़
गए।
1952
में
जनसंघ
की
स्थापना
के
बाद
नानाजी
को
उत्तर
प्रदेश
में
जनसंघ
का
कार्य
सौंपा
गया।
1967
में
वे
जनसंघ
के
राष्ट्रीय
संगठन
मंत्री
बने
और
दिल्ली
आ
गए।
नानाजी
ने
दिल्ली
में
‘दीनदयाल
शोध
संस्थान’
की
स्थापना
की,
जो
आज
भी
उनके
विचारों
को
आगे
बढ़ा
रहा
है।
इसी
प्रकार
मराठवाड़ा,
बिहार
आदि
में
भी
कई
गांवों
का
पुननिर्माण
किया.
1999
में
वे
राज्यसभा
में
मनोनीत
किए
गए.
नानाजी
ने
27
फरवरी,
2010
को
अपनी
कर्मभूमि
चित्रकूट
में
अंतिम
सांस
ली
थी.
2019
नानाजी
को
देश
के
सर्वोच्च
नागरिक
सम्मान
भारत
रत्न
से
सम्मानित
किया
गया।
नानाजी
देशमुख
का
जीवन
संघर्षों
से
भरा
हुआ
था,
और
उन्होंने
हमेशा
समाज
के
उत्थान
के
लिए
कार्य
किया।