
220
साल
पहले
गढ़ाकोटा
के
बुंदेला
राजा
मर्दन
सिंह
जूदेव
ने
जिस
मेले
की
शुरुआत
की
थी,
वह
आज
भी
उसी
भव्यता
और
दिव्यता
के
साथ
जारी
है।
सागर
जिले
में
प्रसिद्ध
यह
मेला
‘रहस
मेला’
के
नाम
से
जाना
जाता
है।
इस
साल
तीन
दिवसीय
रहस
लोकोत्सव
27
से
1
मार्च
तक
आयोजित
किया
जा
रहा
है,
जिसका
शुभारंभ
गुरुवार,
को
केंद्रीय
सामाजिक
न्याय
एवं
अधिकारिता
मंत्री
डॉ.
वीरेंद्र
कुमार
द्वारा
किया
गया।
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कल
शुक्रवार
को
मेले
में
होने
वाले
किसान
सम्मेलन
में
प्रदेश
के
मुख्यमंत्री
मोहन
यादव
शामिल
होंगे।
मुख्यमंत्री
बनने
के
बाद
मोहन
यादव
पहली
बार
गढ़ाकोटा
पहुंच
रहे
हैं,
जिसे
लेकर
भव्य
तैयारियां
की
जा
रही
हैं।
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सरकारी
योजनाओं
का
लाभ
मिलेगा
मेला
समिति
के
अध्यक्ष
दीपू
भार्गव
ने
बताया
कि
यह
मेला
भारत
के
प्राचीन
मेलों
में
शुमार
है।
मेले
के
तीनों
दिन
आयुष्मान
कार्ड,
संबल
कार्ड,
आधार
कार्ड
और
कर्मकार
मंडल
के
कार्ड
बनाए
जाएंगे।
इसके
अलावा
सभी
प्रकार
की
पेंशनों
की
तुरंत
स्वीकृति
दी
जाएगी।
गरीबी
रेखा
में
नाम
जोड़े
जाएंगे।
किसानों
के
खेतों
की
मिट्टी
का
परीक्षण
कर
‘मृदा
परीक्षण
कार्ड’
बनाए
जाएंगे।
नगरपालिका,
जनपद
और
जिला
पंचायत
की
सभी
हितग्राही
मूलक
योजनाओं
के
कार्य
स्वीकृत
किए
जाएंगे।
रहस
मेले
के
तीनों
दिन
शाम
6
बजे
से
मुंबई
की
आरकेस्ट्रा
और
डांस
ग्रुप
द्वारा
फिल्मी
और
विदेशी
डांस
प्रस्तुतियां
होंगी।
रात्रि
9
बजे
से
सुप्रसिद्ध
लोक
गायक
जित्तू
खरे
और
उनकी
कलाकार
मंडली
द्वारा
101
नर्तकियों
के
साथ
बुंदेलखंडी
राई
नृत्य
की
भव्य
प्रस्तुति
होगी।
इतिहास
और
उद्देश्य
इतिहासकारों
के
अनुसार,
राजा
मर्दन
सिंह
जूदेव
ने
1809
में
अपने
राज्याभिषेक
की
वर्षगांठ
पर
इस
मेले
की
शुरुआत
की
थी।
इसका
उद्देश्य
धार्मिक
और
सांस्कृतिक
आयोजनों
के
साथ-साथ
व्यापारिक
महत्त्व
को
बढ़ावा
देना
था।


