
मुख्यमंत्री
मोहन
यादव
द्वारा
खुले
में
मांस
विक्रय
पर
प्रतिबंध
के
आदेश
के
बावजूद
शहर
में
खुलेआम
मीट
की
बिक्री
जारी
है।
स्थानीय
प्रशासन
और
नगर
पालिका
के
प्रयासों
के
बावजूद
मीट
व्यापारी
मनमानी
करते
नजर
आ
रहे
हैं।
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सीधी शहर
के
प्रमुख
चौराहों
पर
खुले
में
मांस
काटने
और
बेचने
से
न
केवल
दुर्गंध
फैल
रही
है,
बल्कि
स्कूल
जाने
वाले
बच्चों
में
भय
और
असहजता
का
माहौल
भी
बन
रहा
है।
स्थानीय
नागरिकों
का
कहना
है
कि
इन
व्यापारियों
के
कारण
राहगीरों
को
नाक
दबाकर
गुजरना
पड़ता
है।
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से
भरे
दो
ओवरलोड
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क्रॉसिंग
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हुआ
हादसा,
मची
अफरा-तफरी
पुराने
प्रयास
बेअसर,
मीट
मंडी
के
बावजूद
नहीं
हो
रहा
विस्थापन
पूर्व
विधायक
केदारनाथ
शुक्ल
ने
2018
में
नवीन
मीट
मंडी
का
निर्माण
कराया
था,
ताकि
मीट
विक्रेताओं
को
शहर
से
हटाकर
वहां
व्यवस्थित
किया
जा
सके।
लेकिन
वर्षों
बाद
भी
व्यापारी
शहर
के
बीचों-बीच
ही
अवैध
रूप
से
मीट
की
बिक्री
कर
रहे
हैं।
लालता
चौक
समेत
विभिन्न
क्षेत्रों
में
एसडीएम
द्वारा
मीट
बिक्री
प्रतिबंधित
करने
के
आदेश
के
साइन
बोर्ड
लगाए
गए
हैं। लेकिन
स्थिति
यह
है
कि
उन्हीं
साइन
बोर्ड
के
सामने
खुलेआम
मीट
बेचा
जा
रहा
है।
यह
भी
पढ़ें: नये
सत्र
से
पहले
स्कूल
और
दुकानदारों
की
मनमानी
पर
लगाम,
दो
स्कूलों
पर
मामला
दर्ज
चुनावी
साल
में
प्रशासन
लाचार,
विधायक
और
CMO
ने
दिए
आश्वासन
चुनावी
वर्ष
में
प्रशासन
की
इस
नाकामी
पर
लोगों
में
नाराजगी
है।
सीधी
विधायक
रीति
पाठक
का
कहना
है
कि
उन्हें
पहली
बार
इस
स्थिति
की
जानकारी
मिल
रही
है
और
वे
जल्द
ही
इस
पर
कार्रवाई
करेंगी।
वहीं,
नगर
पालिका
CMO
मिनी
अग्रवाल
ने
भी
माना
कि
कुछ
व्यापारी
प्रतिबंध
के
बावजूद
शहर
में
मीट
बेच
रहे
हैं।
उन्होंने
भरोसा
दिलाया
कि
जल्द
ही
इनके
खिलाफ
सख्त
कार्रवाई
होगी।
स्थानीय
लोगों
की
मांग, प्रशासन
तत्काल
करे
कार्रवाई
स्थानीय
नागरिकों
का
कहना
है
कि
प्रशासन
को
तत्काल
सख्ती
दिखानी
चाहिए
और
मीट
व्यापारियों
को
नियमानुसार
मीट
मंडी
में
शिफ्ट
करना
चाहिए।
मुख्यमंत्री
के
आदेशों
की
अवहेलना
को
गंभीरता
से
लेते
हुए
दोषियों
पर
सख्त
कदम
उठाने
की
जरूरत
है,
ताकि
शहर
की
सफाई
और
व्यवस्था
बनी
रहे।