
भोपाल
जिला
विकास
समन्वय
एवं
निगरानी
समिति
(दिशा)
की
बैठक
की
बैठक
गुरुवार
को
आयोजित
हुई।
लेकिन
हैरानी
तब
हुई
जब
सांसद
आलोक
शर्मा
बैठक
की
अध्यक्षता
में
आयोजित
बैठक
में
अधिकारी
ही
नहीं
पहुंचे।
भोपाल
नगर
निगम
से
संबंधित
मुद्दों
पर
बैठक
में
बातचीत
होनी
थी,
लेकिन
नगर
निगम
के
ना
तो
आयुक्त
हरेंद्र
नारायण
उपस्थित
ही
नहीं
थे।
इसके
अलावा
जल
संसाधन
विभाग
के
अधिकारी
भी
बैठक
में
शामिल
नहीं
थे।
इस
बात
पर
सांसद
आलोक
शर्मा
ने
जमकर
नाराजगी
जताई।
उनको
बताया
गया
कि
आयुक्त
किसी
दूसरी
बैठक
के
कारण
नहीं
उपस्थित
हो
सके।
इस
पर
सांसद
आलोक
शर्मा
ने
कहा
कि
भोपाल
में
दूसरी
बैठकें
भी
चलती
रहेंगी।
नगर
निगम
का
इतना
बड़ा
स्ट्रक्चर
है।
हमारे
एडिशनल
कमिश्नर,
डिप्टी
कमिश्नर
और
अन्य
दूसरे
अधिकारी
हैं।
नगर
निगम
आयुक्त
का
आचरण
निंदा
की
श्रेणी
में
आता
है।
ऐसे
अधिकारी
की
निंदा
होनी
चाहिए।
उन्होंने
कहा
कि
निंदा
प्रस्ताव
बैठक
में
रखना
चाहिए।
उन्होंने
नगर
निगम
आयुक्त
को
बैठक
से
फोन
भी
लगाया,
लेकिन
उन्होंने
फोन
ही
नहीं
उठाया।
उन्होंने
कहा
कि
यदि
कोई
बैठक
थी
तो
हमारी
बैठक
का
समय
बदल
देते।
बैठक
के
एजेंडे
के
अधिकांश
बिंदु
नगर
निगम
के
हैं।
बैठक
में
महापौर
आई
हैं।
विज्ञापन
Trending
Videos
विज्ञापन
…
इससे
घोर
आपत्तिजनक
और
क्या
हो
सकता
है
सांसद
ने
कहा
कि
जनप्रतिनिधियों
के
भी
चार
काम
हैं,
वह
उनको
छोड़
कर
आए।
आयुक्त
फोन
तक
नहीं
उठा
रहे।
महापौर
का
फोन
नहीं
उठा
रहे।
इससे
ज्यादा
घोर
आपत्तिजनक
और
क्या
हो
सकता
है।
यह
मध्य
प्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
है।
मैं
महापौर
भी
रहा
हूं,
अधिकारियों
की
कार्यप्रणाली
भी
जानता
हूं।
इस
प्रकार
के
अधिकारियों
की
लापरवाही
को
बिल्कुल
बर्दाश्त
नहीं
किया
जाएगा।
यह
जनप्रतिनिधियों
का
अपमान
नहीं
है।
यह
भोपाल
की
35
लाख
जनता
का
अपमान
है।
इसे
बिल्कुल
बर्दाश्त
नहीं
किया
जाएगा।
नगर
निगम
का
एक
अधिकारी
नहीं
है
तो
फिर
किससे
बात
करेंगे?
यह
भी
पढ़े Bhopal: अवैध
खनन
अपने
चरम
पर, नेता
प्रतिपक्ष
बोले-ड्राइवर
ने
कबूला
मंत्री
के
बेटे
के
कहने
पर
चला
रहा
था
ट्रक
लोकसभा
को
छोड़कर
आया
हूं
सांसद
आलोक
शर्मा
ने
कहा
कि
गर्मी
के
बाद
बरसात
आने
वाली
है।
बाढ़
से
निपटने
के
लिए
नालों
का
कैसे
निर्माण
हुआ
है।
मुख्यमंत्री
शहरी
अधोसंरचना
में
कितने
काम
हुए
हैं।
कितने
कामों
को
स्वीकृति
मिली
है।
कायाकल्प
अभियान
में
सरकार
ने
पैसा
दिया
है,
उसकी
जानकारी
जनप्रतिनिधियों
को
चाहिए।
मुख्यमंत्री
की
मंशा
है
कि
पूरे
प्रदेश
में
संजीवनी
क्लीनिक
खुलें।
यह
मध्य
प्रदेश
की
राजधानी
है
संजीवनी
102
स्थान
पर
बनाने
के
लिए
राशि
दी
है।
उनका
कितना
काम
हुआ
है।
अमृत-2,
सीवेज
के
काम
की
समीक्षा
करना
था।
शर्मा
ने
कहा
कि
सांसद
के
नाते
यह
मेरी
पहली
बैठक
थी।
उन्होंने
कहा
कि
लोकसभा
चल
रही
है
उसको
छोड़कर
मैं
आया
हूं।
अधिकारियों
का
यह
रवैया
ठीक
नहीं
है।
यह
भी
पढ़े MP
News: रामेश्वर
शर्मा
बोले-
वक्फ
की
जमीन
से
केवल
दो-चार-दस
परिवार
पलते
रहे
इससे
काम
नहीं
चलेगा
सबनानी
ने
भी
आपत्ति
जताई
विधायक
भगवानदास
सबनानी
ने
भी
बैठक
में
अधिकारियों
की
गैरमौजूदगी
पर
आपत्ति
जताई
और
कहा
कि
हम
भी
अपने
कामों
को
छोड़कर
बैठक
में
आए
थे,
लेकिन
इस
तरह
का
बर्ताव
ठीक
नहीं
है।
बैठक
में
स्मार्ट
सिटी,
बिजली,
स्वास्थ्य
और
शिक्षा
जैसे
अहम
मुद्दों
पर
चर्चा
होनी
थी,
लेकिन
अधिकारियों
की
गैरमौजूदगी
ने
बैठक
को
प्रभावित
किया।