Damoh News: मां बड़ी देवी दरबार का 100 फिट ऊंचा शिखर तैयार, कल लगेगा मेला, 300 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास


दमोह
शहर
के
मां
बड़ी
देवी
के
दरबार
में
कल
रविवार
से
भक्तों
का
मेला
लगना
शुरू
हो
जाएगा।
नवरात्र
पर्व
को
लेकर
तैयारियां
अंतिम
दौर
में
है।
यह
मंदिर
जिले
के
लोगों
की
आस्था
का
केंद्र
है।
जहां
9
दिनों
तक
प्रतिदिन
सुबह
से
शाम
तक
हजारों
श्रद्धालु
पहुंचेंगे।
वर्ष
2016
में
समाजसेवियों
की
ओर
से
बड़ी
देवी
मंदिर
का
जीर्णोद्धार
शुरू
किया
गया
था।
अब
इसका
निर्माण
लगभग
पूरा
हो
चुका
है।वर्तमान
में
यहां
विराजमान
तीनों
देवियों
का
भव्य
मंदिर
तैयार
हो
चुका
है।
मां
बड़ी
देवी
मंदिर
के
शिखर
की
ऊंचाई
100
फीट
है।
मंदिर
की
भव्यता
देखते
ही
बनती
है,
जबकि
पहले
मंदिर
की
ऊंचाई
30
फीट
थी।
हाल
ही
में
मकराना
पत्थर
से
तीनों
देवियों
का
भव्य
आसन
तैयार
हो
गया
है।
अब
गर्भगृह
में
इंटीरियर
का
काम
बाकी
है।


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भूतों
का
मेला

मंदिर
का
निर्माण
सैकड़ों
दानदाताओं
और
चढ़ोतरी
से
प्राप्त
राशि
से
किया
गया
है।
इसमें
तीन
प्रमुख
मंदिरों
में
कुछ
दानदाताओं
का
विशेष
सहयोग
रहा
है।
जिसमें
हरसिद्धी
माता
मंदिर
का
निर्माण
मालती
असाटी,
बड़ी
माता
मंदिर
का
निर्माण
प्रदीप,
प्रभात
और प्रकाश
हजारी
द्वारा
कराया
गया
है।
वहीं
64
जोगनी
मंदिर
का
निर्माण
सुनील,
राजीव
और
कपिल
साव
द्वारा
कराया
गया
है।
वहीं
शिव
मंदिर
का
निर्माण
वीरू
राय,
पप्पू
असाटी
के
सहयोग
से
किया
गया।
हाल
ही
में
मंदिर
परिसर
में
विराजमान
भगवान
गणेश
मंदिर
के
आसन
का
निर्माण,
नवीन
पंचकुंडीय
यज्ञमंडप
एवं
कुंभाकार
पानी
की
टंकी
के
निर्माण
का
भूमिपूजन
भी
हुआ
है।
जिसे
रिटायर्ड
कमिश्नर
केपी
राही,
कैलाश
शैलार,
अभिषेक
राय,
संतोष
गंगेले,
डॉ.
नवीन
सोनी,
निक्की
साहू
द्वारा
कराने
का
संकल्प
लिया
गया
है।


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बदलाव


300
वर्ष पुराना इतिहास

मंदिर
के
पुजारी
आशीष
दत्त
कटारे
ने
बताया
कि
वर्तमान
में
दमोह
में
रहने
वाला
हजारी
परिवार
मूलतः
कानपुर
जिले
का
रहने
वाला
है।
करीब
300
साल
पहले
इनके
पूर्वज
पलायन
करते
हुए
दमोह
में
रहने
के
लिए
आए।
तब
वे
अपने
साथ
अपनी
कुल
की
देवी
बड़ी
देवी
को
भी
दमोह
लेकर
पहुंचे।
कई
सालों
तक
बड़ी
देवी
उनके
घर
में
ही
उनकी
कुलदेवी
बनकर
रहीं,
लेकिन
एक
समय
स्वप्न
में
बड़ी
देवी
ने
उन्हें
बगीचे
में
स्थापित
करने
का
निर्देश
दिया।
उसके
बाद
परिजनों
ने
उनकी
स्थापना
अपने
आधिपत्य
वाले
वर्तमान
स्थान
पर
की
गई
थी।
तब
से
लेकर
अब
तक
बड़ी
देवी
यानी
महालक्ष्मी,
महासरस्वती
और
मां
महाकाली
के
तीन
स्वरूप
यहां
पर
लोगों
की
मनोकामना
को
पूरा
कर
रहे
हैं।