MP News:  प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा पर्व, सीएम यादव ने दी नववर्ष की शुभकामनाएं


मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
ने
प्रदेशवासियों
को
नवसंवत्सर
,
चैत्र
नवरात्र,
गुड़ी
पड़वा
और
चेटीचंड
की
बधाई
और
मंगलकामनाएं
दी
हैं।
मुख्यमंत्री
डॉ.
यादव
ने
कहा
कि
भारतीय
नव
वर्ष
विक्रम
संवत
से
प्रारंभ
होता
है।
अंग्रेजी
कैलेंडर
के
प्रचलन
के
बाद
भी
हमारी
संस्कृति
से
जुड़े
नव
संवत्सर,
गुड़ी
पड़वा
पर्व,
चेटीचंड
के
त्योहार
और
चैत्र
नवरात्र
का
अपना
महत्व
है।
भारतीय
समाज
का
बहुत
बड़ा
हिस्सा
इन
मंगल
पर्वों
को
उल्लासपूर्वक
मनाता
है।


विज्ञापन

Trending
Videos


इस
वर्ष
30
मार्च
2025
(रविवार)
से
हिन्दू
नववर्ष
विक्रम
संवत्
2082
की
शुरुआत
हो
रही
है।
गुड़ी
पड़वा
के
दिन
ही
हिन्दू
नववर्ष
का
प्रारंभ
होता
है,
जिसे
चैत्र
मास
की
शुक्ल
प्रतिपदा
के
रूप
में
मनाया
जाता
है।
विक्रम
संवत्
की
शुरुआत
57
ई.पू.
में
उज्जयनी
नरेश
महाराज
विक्रमादित्य
द्वारा
विदेशी
शकों
के
खिलाफ
विजय
प्राप्त
करने
के
साथ
हुई
थी।
उन्होंने
भारतीय
भूमि
की
रक्षा
की
और
काल
गणना
का
सूत्रपात
किया,
जिसे
विक्रमी
संवत्
के
रूप
में
जाना
गया।
प्रदेश
में
गुड़ी
पड़वा
का
पर्व
धूमधाम
से
मनाया
जाएगा।
प्रदेश
में
मंत्री
अलग-अलग
स्थानों
पर
सांसद
और
विधायकों
के
साथ
वर्ष
का
पहला
दिन
धूमधाम
से
मनाएंगे। 


विज्ञापन


विज्ञापन


प्रदेश
के
अलग-अलग
जिलों
में
होंगे
आयोजन 

विक्रम
संवत
2082
के
शुभारंभ
के
उपलक्ष्य
में
विक्रमोत्सव
2025
के
अंतर्गत
भोपाल
जिला
स्तरीय
भव्य
कार्यक्रम
“प्रतिपदा
नव
संवत्सर”
का
आयोजन
शनिवार
सुबह
10
 बजे
से
7
नंबर
चौराहा
स्थित
सुभाष
उत्कृष्ट
उच्चतर
माध्यमिक
विद्यालय
परिसर
में
किया
जाएगा।
यह
आयोजन
नाट्य
अकादमी
के
सहयोग
से
आयोजित
होगा,
जिसमें
सूर्य
उपासना,
ध्वज
वंदना
एवं
नाट्य
उत्सव
के
माध्यम
से
नववर्ष
का
स्वागत
किया
जाएगा।
इस
अवसर
पर
जिले
के
जनप्रतिनिधि,
सांस्कृतिक
कलाकार
एवं
गणमान्य
नागरिक
उपस्थित
रहेंगे
और
भारतीय
सांस्कृतिक
परंपराओं
की
अनुपम
झलक
प्रस्तुत
की
जाएगी।
कार्यक्रम
का
उद्देश्य
हमारी
गौरवशाली
परंपराओं
और
सांस्कृतिक
विरासत
को
वर्तमान
पीढ़ी
से
जोड़ना
है।


मराठी
राजा
द्वारा
शकों
को
पराजित
करने
की
विजय
का
प्रतीक

गुड़ी
पड़वा
को
‘विजय
पताका’
के
रूप
में
मनाया
जाता
है।
यह
दिन
मराठी
राजा
शालिवाहन
द्वारा
शकों
को
पराजित
करने
की
विजय
का
प्रतीक
है।
इस
दिन
को
‘गुढी
पाडवा’
या
मराठी
नववर्ष
के
रूप
में
मनाने
की
परंपरा
है।
आंध्र
प्रदेश
और
कर्नाटका
में
इसे
उगादि
के
रूप
में
मनाया
जाता
है।
इस
दिन
भगवान
श्रीराम
के
बाली
के
अत्याचारों
से
मुक्ति
दिलाने
के
कारण
भी
यह
विशेष
महत्व
रखता
है।
मुख्यमंत्री
ने
विक्रम
संवत्
के
वैज्ञानिक
और
धार्मिक
महत्व
को
रेखांकित
करते
हुए
बताया
कि
यह
संवत्
भारत
की
सांस्कृतिक
धरोहर
और
राष्ट्रीय
स्वाभिमान
का
प्रतीक
है।
विक्रम
संवत्
के
अनुसार
सभी
धार्मिक
त्यौहार
और
अनुष्ठान
मनाए
जाते
हैं।
इस
दिन
विशेष
रूप
से
पच्चड़ी/प्रसादम,
पूरन
पोली
जैसी
विशेष
पकवानों
की
तैयारी
की
जाती
है।
विक्रम
संवत्
हमारे
समाज
और
संस्कृति
की
पहचान
है,
जो
एक
अत्यंत
प्राचीन
और
वैज्ञानिक
प्रणाली
पर
आधारित
है।