
इंदौर
की
कुल
173
शराब
दुकानों
में
से
11
दुकानें
बिक्री
से
रह
गई
थीं,
जिन्हें
नीलाम
करने
के
लिए
आबकारी
विभाग
ने
30
प्रतिशत
तक
कम
कीमत
पर
आवेदन
आमंत्रित
किए
थे।
इसके
बाद
इन
दुकानों
की
नीलामी
हुई
और
126
करोड़
रुपए
की
निर्धारित
कीमत
के
मुकाबले
98
करोड़
रुपए
में
इनका
सौदा
तय
हो
गया।
इसमें
28
करोड़
रुपए
का
नुकसान
हुआ।
आबकारी
विभाग
द्वारा
इन
दुकानों
की
नीलामी
की
प्रक्रिया
पूरी
कर
ली
गई
है,
जिससे
अब
इंदौर
सहित
पूरे
प्रदेश
में
सभी
शराब
दुकानों
का
संचालन
नए
लाइसेंस
के
आधार
पर
किया
जाएगा।
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Indore
News:
मौसम
ने
मारी
पलटी,
गर्मी
में
आए
बादल,
ठंडी
हवाओं
ने
बढ़ाई
चिंता
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शराब
लाइसेंस
प्रक्रिया
और
बढ़ी
हुई
कीमतें
इंदौर
की
173
शराब
दुकानों
के
वित्तीय
वर्ष
2025-26
के
लाइसेंस
के
लिए
आबकारी
विभाग
ने
फरवरी
से
ही
प्रक्रिया
शुरू
कर
दी
थी।
शासन
द्वारा
लागू
नई
शराब
नीति
के
अनुसार,
इस
बार
लाइसेंस
शुल्क
में
20
प्रतिशत
की
वृद्धि
की
गई
थी।
इस
बढ़ोतरी
के
कारण
कई
पुराने
शराब
व्यापारी
और
नए
निवेशक
इन
दुकानों
को
खरीदने
में
दिलचस्पी
नहीं
दिखा
रहे
थे,
जिससे
11
दुकानें
बिना
खरीदार
के
रह
गई
थीं।
इन्हीं
दुकानों
को
बेचने
के
लिए
विभाग
ने
पुनः
आवेदन
आमंत्रित
किए
और
तय
कीमत
से
30
प्रतिशत
कम
दर
पर
भी
आवेदन
स्वीकार
किए
गए।
शराब
की
कीमतों
में
होगी
बढ़ोतरी
आबकारी
अधिकारियों
के
अनुसार,
शराब
कंपनियां
नए
वित्तीय
वर्ष
में
शराब
की
कीमतें
बढ़ाने
की
योजना
बना
रही
हैं।
इससे
यह
स्पष्ट
है
कि
आने
वाले
समय
में
आम
उपभोक्ताओं
को
महंगी
शराब
खरीदनी
पड़ेगी।
अधिकारियों
ने
यह
भी
बताया
कि
नए
लाइसेंस
लागू
होने
के
साथ
ही
प्रदेशभर
में
शराब
दुकानों
का
संचालन
शुरू
कर
दिया
जाएगा।
इसके
अलावा,
कुछ
शराब
दुकानों
के
स्थान
भी
बदले
जा
सकते
हैं,
क्योंकि
कई
इलाकों
में
इन
दुकानों
के
खिलाफ
स्थानीय
लोगों
द्वारा
विरोध
दर्ज
किया
गया
है।
पिछले
साल
की
तुलना
में
कम
हुआ
राजस्व
लक्ष्य
पिछले
साल
इंदौर
की
सभी
173
शराब
दुकानें
1485
करोड़
रुपए
में
बिकी
थीं,
जबकि
इस
साल
इनकी
कीमत
1751
करोड़
रुपए
तय
की
गई।
हालांकि,
सरकार
द्वारा
निर्धारित
20
प्रतिशत
की
बढ़ोतरी
के
लक्ष्य
के
मुकाबले
इस
बार
केवल
18
प्रतिशत
की
बढ़ोतरी
हासिल
की
जा
सकी
है।
आबकारी
विभाग
के
अधिकारियों
का
कहना
है
कि
इसके
बावजूद
यह
आंकड़ा
संतोषजनक
है
और
नए
वित्तीय
वर्ष
में
शराब
बाजार
की
मांग
को
ध्यान
में
रखते
हुए
आवश्यक
सुधार
किए
जाएंगे।