
इंदौर
के
कृषि
कॉलेज
के
स्टूडेंट्स
का
धरना
अब
45
दिनों
से
भी
ज्यादा
वक्त
से
जारी
है,
लेकिन
उनकी
मुख्य
मांग
पर
कोई
समाधान
नहीं
निकल
सका
है।
स्टूडेंट्स
कॉलेज
के
डीन
को
हटाने
की
मांग
कर
रहे
हैं,
और
इस
मामले
की
जांच
के
लिए
एक
कमेटी
भी
बनाई
गई
थी।
हालांकि,
स्टूडेंट्स
का
कहना
है
कि
कमेटी
द्वारा
अभी
तक
कोई
रिपोर्ट
नहीं
दी
गई
है,
और
उनका
संघर्ष
प्रशासन
से
लेकर
मंत्रियों
तक
जारी
रहा
है।
इस
लंबी
अवधि
में
धरने
पर
बैठे
छात्रों
के
बीच
असंतोष
बढ़ता
जा
रहा
है,
और
उनकी
उम्मीदें
अब
कलेक्टर
से
मिलने
की
है।
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कमेटी
की
जांच
रिपोर्ट
का
अब
तक
कोई
परिणाम
नहीं
इस
मामले
में
नेशनल
एजुकेटेड
यूथ
यूनियन
(NEYU)
के
सदस्य
रंजीत
किसानवंशी
ने
कहा
कि
कॉलेज
प्रशासन
ने
एक
पांच
सदस्यीय
कमेटी
बनाई
थी,
जिसमें
प्रशासनिक
अधिकारी
और
प्रोफेसर
भी
शामिल
थे।
कमेटी
का
गठन
छात्रों
की
शिकायतों
की
जांच
करने
के
लिए
किया
गया
था,
लेकिन
अब
तक
जांच
रिपोर्ट
नहीं
दी
गई
है।
रंजीत
ने
यह
भी
बताया
कि
कमेटी
की
ओर
से
जांच
पूरी
हो
चुकी
है,
लेकिन
छात्रों
को
अभी
तक
कोई
औपचारिक
रिपोर्ट
प्राप्त
नहीं
हुई
है।
इस
कारण
स्टूडेंट्स
का
आक्रोश
बढ़ता
जा
रहा
है।
विज्ञापन
कलेक्टर
से
मुलाकात
का
लिया
निर्णय
रंजीत
किसानवंशी
ने
यह
भी
बताया
कि
अब
वे
और
NEYU
के
सदस्य
मंगलवार
को
कलेक्टर
से
मुलाकात
करने
जा
रहे
हैं।
कलेक्टर
से
मिलने
का
मुख्य
उद्देश्य
कमेटी
की
जांच
रिपोर्ट
के
बारे
में
जानकारी
लेना
है।
वे
उम्मीद
करते
हैं
कि
प्रशासन
इस
मामले
को
शीघ्र
सुलझाएगा
और
छात्रों
के
मुद्दे
का
समाधान
निकालेगा।
रंजीत
ने
स्पष्ट
किया
कि
जब
तक
इस
मुद्दे
का
कोई
समाधान
नहीं
निकलता,
तब
तक
स्टूडेंट्स
का
धरना
प्रदर्शन
जारी
रहेगा।
धरने
का
असर
और
छात्रों
का
दृढ़
संकल्प
इंदौर
के
कृषि
कॉलेज
में
स्टूडेंट्स
के
धरने
का
असर
न
केवल
कॉलेज
प्रशासन
पर,
बल्कि
स्थानीय
प्रशासन
और
नेताओं
पर
भी
दिख
रहा
है।
कई
दिनो
से
चल
रहे
इस
आंदोलन
में
छात्रों
ने
कई
बार
अपनी
आवाज
उठाई
है,
लेकिन
अब
तक
कोई
ठोस
परिणाम
सामने
नहीं
आया
है।
रंजीत
किसानवंशी
और
अन्य
NEYU
सदस्य
अब
प्रशासन
के
उच्च
अधिकारियों
से
मुलाकात
करने
की
योजना
बना
रहे
हैं,
ताकि
इस
विवाद
का
समाधान
जल्दी
निकल
सके।
उनका
कहना
है
कि
जब
तक
डीन
की
नियुक्ति
और
अन्य
समस्याओं
का
समाधान
नहीं
होता,
तब
तक
उनका
धरना
जारी
रहेगा।