MP High Court: ‘सभी वर्ग के लोगों को पुजारी के पद पर दी जाए नियुक्ति’, हाईकोर्ट ने अनावेदकों से मांगा जवाब

मध्यप्रदेश
हाईकोर्ट
में
एक
जनहित
याचिका
दायर
कर
राज्य
शासित
धार्मिक
स्थलों
में
सभी
वर्ग
के
लोगों
को
पुजारी
के
पद
पर
नियुक्ति
में
अवसर
प्रदान
करने
की
मांग
की
गई
है।
याचिका
में
मध्यप्रदेश
विनिर्दिष्ट
मंदिर
विधेयक-2019
की
संवैधानिकता
को
चुनौती
दी
गई
है।
मामले
पर
प्रारंभिक
सुनवाई
के
बाद
चीफ
जस्टिस
सुरेश
कुमार
कैत
और जस्टिस
विवेक
जैन
की
युगलपीठ
ने
मुख्य
सचिव,
प्रमुख
सचिव
जीएडी,
सामाजिक
न्याय
मंत्रालय
धार्मिक
एवं
धर्मस्व
मंत्रालय
एवं
लोक
निर्माण
विभाग
को
नोटिस
जारी
कर
चार
सप्ताह
में
जवाब
पेश
करने
के
निर्देश
दिये
हैं।

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अनुसूचित
जाति-जनजाति
अधिकारी
कर्मचारी
संघ
(अजाक्स)
के
सचिव
एमसी
अहिरवार
की
ओर
से
वरिष्ठ
अधिवक्ता
रामेश्वर
सिंह
ठाकुर
एवं
पुष्पेंद्र
शाह
ने
पक्ष
रखा।
उन्होंने
बताया
कि
उक्त
विधेयक
की
धारा-46
के
तहत
अनुसूची-एक
में
मध्यप्रदेश
के
प्रसिद्ध
मंदिरों
तथा
अधीनस्थ
मंदिरों,
भवन
तथा
अन्य
संरचनाओं
सहित
लगभग
350
से
अधिक
मंदिरों
को
अधिसूचित
किया
गया
है।
अधिसूचित
मंदिरों
को
मध्यप्रदेश
सरकार
ने
राज्य
शासन
के
अधीन
रखा
गया
है।
इसके
तहत
अध्यात्म
विभाग
ने
पुजारियों
की
नियुक्तियों
के
लिए
पॉलिसी
बनाई
है।
इस
पॉलिसी
में
केवल
एक
विशेष
जाति
(ब्राह्मण)
को
ही
पुजारी
के
पद
पर
नियुक्ति
दिए
जाने
की
व्यवस्था
की
गई
है।


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और
क्रेता
पर
मामला
दर्ज

नियुक्त
पुजारी
को
राजकोष
से
निर्धारित
वेतन
का
भुगतान
किए
जाने
का
प्रावधान
किया
गया
है।
दलील
दी
गई
कि
हिंदू समुदाय
में
ओबीसी,
एससी-एसटी
वर्ग
भी
शामिल
हैं
तो
फिर
केवल
एक
जाति
को
ही
पुजारी
नियुक्त
किया
जाना
भारतीय
संविधान
से
असंगत
है।
तर्क
दिया
गया
कि
अन्य
नियुक्तियों
की
तरह
पुजारी
की
नियुक्ति
भी
जाति
के
आधार
पर
नहीं,
वरन
योग्यता
के
आधार
पर
होनी
चाहिए।

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सुध

राज्य
शासन
की
ओर
से
उप
महाधिवक्ता
डिप्टी
एडवोकेट
जनरल
अभीजीत
अवस्थी
ने
याचिका
की
प्रचलनशीलता
पर
प्रश्न
उठाया।
उन्होंने
कहा
कि
अजाक्स
एक
कर्मचारियों
का
संगठन
है,
जिसे
उक्त
याचिका
दाखिल
करने
का
कानूनी
अधिकार
नहीं
है।
सुनवाई
पश्चात्
न्यायालय
ने
उक्त
निर्देश
दिये।