
वाहन
चोरी
के
एक
मामले
में
नीलगंगा
थाना
पुलिस
को
एक
बड़ी
सफलता
हाथ
लगी
है,
जिसमें
पुलिस
ने
सीसीटीवी
फुटेज
देखने
के
बाद
जब
कार्रवाई
की
तो
पुलिस
खुद
आश्चर्यचकित
रह
गई,
क्योंकि
ये
वाहन बंटी
और
बबली
दोनों
मिलाकर
चुरा
रहे
थे।
बबली
वाहन
चोरी
के
स्थान
पर
पहले
रैकी
करती
थी
और
उसके
बाद
बंटी
वहां
पहुंचता
और
देखते
ही
देखते
गाड़ी
चुरा
ले
जाता
था।
पुलिस
मैं
जब
संयुक्त
टीम
बनाकर
इन्हें
गिरफ्तार
किया।
पूछताछ
में
इन्होंने
अन्य
वाहन
चोरी
की
वारदातों
को
भी
अंजाम
देने
की
बात
बताई
है।
पूरा
मामला
कुछ
इस
प्रकार
है
कि
थाना
नीलगंगा
क्षेत्र
में
रहने
वाले
मुकेश
बटवाल
निवासी
अंबर
काॅलोनी
के
घर
के
बाहर
से
11
अप्रैल
2025
को
घर
के
पास
से
रात्रि के
समय
मारुति
एक्सिस
स्कूटी
वाहन
क्रमांक
एमपी
13
ईजेड
0292
को
अज्ञात
चोर
चुरा
ले
गए
थे।
मुकेश
बटवाल
ने
थाना
नीलगंगा
पहुंचकर
वाहन
चोरी
का
प्रकरण
दर्ज
करवा
दिया
था।
इसमें
पुलिस
ने
अपराध
क्रमांक
184/25
धारा
303(2)
बीएनएस
के
तहत
पंजीबद्ध
कर
विवेचना
शुरू
की
थी।
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पहुंचा
पिता,
की
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टीम
बनाकर
की
कार्रवाई,
आरोपी
गिरफ्तार
थाना
प्रभारी
नीलगंगा
के
तरुण
कुरील
के
नेतृत्व
में
थाना
पर
पृथक
से
टीम
बनाकर
आरोपियों
की
तलाश
प्रारंभ
की
गई
और
घटना
क्षेत्र
के
सीसीटीवी
फुटेज
खंगाले
गए।
साथ
ही
आरोपियों
की
तलाश
के
दौरान
विश्वसनीय
मुखबिरों
से
सूचना
भी
ली
गई।
इसमें
इस
चोरी
में
एक
महिला
और
एक
पुरुष
के
होने
की
जानकारी
लगी
थी,
जिसके
बाद
थाना
नीलगंगा
पुलिस
द्वारा
लक्की
चौहान
पिता
रामप्रसाद
चौहान
निवासी
महावीर
काॅलोनी
पीपलीनाका
जीवाजीगंज,
व
नेहा
भमूरी
पिता
बाबूलाल
भमूरी
निवासी
मकान
नंबर
37
महावीर
नगर
पिपलीनाका
उज्जैन
हाल
मुकाम
दीपिका
बाथालिया
का
मकान
मंगल
सागर
कॉलोनी
उज्जैन
को
सांवराखेडी
रोड
से
गिरफ्तार
कर
लिया
गया।
आरोपियों
से
पूछताछ
के
बाद
चोरी
की
गई दो
स्कूटी
व
एक
मोटरसाइकिल
व
पूर्व
मे
चोरी
की
गई
दो
मोटरसाइकिल
की
नंबर
प्लेट
कुल
कीमती
2
लाख
25
हजार
को
जब्त
किया
है।
आरोपियों
के
खिलाफ
यह
प्रकरण
दर्ज
लक्की
चौहान
पिता
रामप्रसाद
चौहान
निवासी
महावीर
काॅलोनी
पीपलीनाका
जीवाजीगंज
के
उज्जैन
जीवाजीगंज
में
चोरी
के
कुल
पांच
अपराध
पूर्व
से
दर्ज
हैं।
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के
लिए
दिया
जा
रहा
प्रशिक्षण,
दो
दिन
और
चलेगा
कपल
की
तरह
रहते
थे
इसीलिए
नहीं
होता
था
किसी
को
शक
सीएसपी
दीपिका
शिंदे
ने
बताया
कि
वाहन
चोर
महिला
पुरुष
कपल
की
तरह
रहते
थे।
यही
कारण
है
रैकी
करने
के
दौरान
उन्हें
कोई
पहचान
नहीं
पाता
था।
अधिकतर
समय
यह
लोग
रात्रि
के
समय
ही
रैकी
करते
थे
और
फिर
गाड़ी
चुरा
ले
जाते
थे।