
नेशनल
बोर्ड
ऑफ
एग्जामिनेशन
इन
मेडिकल
साइंसेज
ने
भोपाल
समेत
प्रदेश
के
तीन
जिला
अस्पतालों
को
पोस्ट
एमबीबीएस
डीएनबी/पीजी
डिप्लोमा
की
12
नई
सीटों
की
मान्यता
दी
है।
इसके
साथ
ही
राज्य
में
इन
पाठ्यक्रमों
की
कुल
सीटें
63
हो
गई
हैं।इस
फैसले
से
ग्रामीण
और
दूरदराज
के
इलाकों
में
भी
गायनाकोलॉजी,
एनेस्थीसिया
और
नेत्र
रोग
जैसे
विषयों
में
प्रशिक्षित
विशेषज्ञ
डॉक्टर
मिल
सकेंगे।
उप
मुख्यमंत्री
एवं
स्वास्थ्य
मंत्री
राजेन्द्र
शुक्ल
ने
इसे
प्रदेश
में
स्वास्थ्य
सेवाओं
की
दिशा
में
एक
बड़ा
सुधारात्मक
कदम
बताया।
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युवा
मेडिकल
ग्रेजुएट्स
को
मिलेगा
ट्रेनिंग
का
मौका
इन
नई
सीटों
से
न
केवल
मरीजों
को
राहत
मिलेगी,
बल्कि
युवा
मेडिकल
ग्रेजुएट्स
को
डीएनबी
और
पीजी
डिप्लोमा
में
ट्रेनिंग
का
अवसर
भी
मिलेगा।
इससे
प्रदेश
में
डॉक्टरों
की
कमी
दूर
होगी
और
उन्हें
अपने
गृह
जिलों
में
ही
सेवा
देने
का
मौका
मिलेगा।
राज्य
सरकार
की
योजना
है
कि
आने
वाले
वर्षों
में
हर
जिला
अस्पताल
को
उन्नत
चिकित्सा
शिक्षा
और
प्रशिक्षण
केंद्र
बनाना
है।
इस
फैसले
से
प्रदेश
की
स्वास्थ्य
सेवाएं
केवल
मेट्रो
सिटीज
तक
सीमित
नहीं
रहेंगी,
बल्कि
ग्रामीण
अंचलों
के
लोगों
को
भी
समान
रूप
से
लाभ
मिलेगा।
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इस
अस्पतालों
को
मिलीं
नई
सीटें
जिला
अस्पताल,
भोपाल –
डीजीओ
(गाइनेकोलॉजी)
की
4
सीटें
जिला
अस्पताल,
शिवपुरी-डीजीओ
की
4
सीटें
और
डीए
(एनेस्थीसिया)
की
2
सीटें
जिला
अस्पताल,
रतलाम- डीओ
(नेत्र
रोग)
की
2
सीटें
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पर
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पोती
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को
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फायदा
1-महिला
रोग
विशेषज्ञों
की
संख्या
बढ़ने
से
प्रसव
और
महिलाओं
से
जुड़ी
बीमारियों
का
इलाज
जल्द
मिलेगा।
2-
एनेस्थीसिया
विशेषज्ञ
की
मौजूदगी
से
जिला
अस्पतालों
में
बड़ी
सर्जरी
संभव
होगी।
3-
आंखों
की
बीमारियों
की
विशेषज्ञ
जांच
और
ऑपरेशन
अब
जिला
स्तर
पर
संभव
हो
सकेगा।
स्वास्थ्य
व्यवस्था
होगी
मजबूत
राजेन्द्र शुक्ल
ने
बताया
कि
यह
मान्यता
राज्य
सरकार
द्वारा
जिला
अस्पतालों
में
लगातार
किए
जा
रहे
बुनियादी
ढांचे
के
सुधार,
डॉक्टरों
की
नियुक्ति
और
प्रशिक्षण
के
प्रयासों
का
परिणाम
है।
उन्होंने
कहा
कि
हमारा
लक्ष्य
है
कि
हर
जिले
में
उच्च
गुणवत्ता
वाली
स्वास्थ्य
सेवाएं
मिलें,
जिससे
आमजन
को
राहत
मिले
और
रेफर
सिस्टम
पर
निर्भरता
कम
हो।