
अभ्यास
मंडल
की
64
वीं
व्याख्यानमाला
में
प्रसिद्ध
शिक्षाविद
डॉ.वेद
प्रकाश
मिश्र
ने
कहा
कि
शिक्षा
के
क्षेत्र
में
निजी
क्षेत्र
कभी
भी
चैरिटी
के
लिए
नहीं
आते
है
बल्कि
फायदे
के
लिए
आते
है।
प्राइवेट
कॉलेज
पहले
अनुदान
पर
चलते
थे।
फिर
बिना
अनुदान
के
चलने
लगे
और
आज
कमाने
के
लिए
चल
रहे
हैं।
चुनौतियां
कभी
भी
न
तो
आसमान
से
आती
है
न
धरती
में
से
निकलती
है
वह
तो
व्यवस्था
के
माध्यम
से
निर्मित
होती
है।
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के
लिए
है
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शिक्षा
का
व्यवसायीकरण
और
वर्तमान
चुनौतियां
विषय
पर
उन्होंने
अपनी
बात
रखी
और
कहा
कि
हर
शिक्षित
नागरिक
एक
गरीब
व्यक्ति
को
शिक्षित
करने
का
प्रण
लें,
तो
देश
में
शिक्षा
का
परिदृश्य
बदल
सकता
है।
हमारे
देश
की
चिकित्सा
शिक्षा
इतनी
बेहतर
है
कि
वह
सबसे
पहले
विश्व
गुरु
का
दर्जा
हमें
दिला
सकती
है।
डाॅ.
मिश्र
ने
कहा
कि
वर्ष
1952
में
देश
में
पहला
शिक्षा
आयोग
बनाया
गया।
इसके
अध्यक्ष
सर्वपल्ली
राधाकृष्णन
थे।
इस
आयोग
के
द्वारा
जो
अनुशंसा
की
गई
उसमें
यह
कहा
गया
कि
देश
के
कुल
जीडीपी
का
6%
शिक्षा
पर
और
6%
स्वास्थ्य
पर
खर्च
किया
जाए।
उस
समय
से
लेकर
आज
तक
कभी
भी
बजट
में
6%
राशि
शिक्षा
को
नहीं
दी
गई।
अब
तक
के
इतिहास
में
अधिकतम
2.93%
राशि
शिक्षा
के
लिए
आवंटित
की
गई
है।
हमारे
देश
में
यह
दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति
है
कि
फीस
के
अभाव
में
प्रतिभा
पढ़
नहीं
पाती
है
।
आज
देश
में
810
चिकित्सा
महाविद्यालय
हैं,
इसमें
से
1991
के
बाद
571
खोले
गए
हैं।
इसमें
412
प्राइवेट
चिकित्सा
महाविद्यालय
है।इस
समय
हमारे
देश
की
असली
ताकत
64%
वह
आबादी
है
जिसकी
उम्र
35
वर्ष
से
कम
है।
हमारे
देश
के
संविधान
में
शिक्षा
की
गारंटी
तो
दी
है
लेकिन
गुणवत्तापूर्ण
शिक्षा
की
गारंटी
नहीं
दी
है।
कार्यक्रम
का
संचालन
कुणाल
भंवर
ने
किया।
अतिथियों
को
स्मृति
चिन्ह
डॉ
भरत
छापरवाल
और
राधेश्याम
शर्मा
ने
भेंट
किए।