
दमोह
जिले
के
58,000
एकड़
का
जंगली
रकबा
रानी
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
को
हैंडओवर
हो
गया
है।
जिसके
बाद
जहां-जहां
से
टाइगर
रिजर्व
की
सीमा
लगती
है,
वहां
अब
नए
नियम
लागू
हो
जाएंगे। नौरादेही
अभ्यारण्य
के
नाम
से
पहचान
बनाने
वाला
अभ्यारण्य
अब
टाइगर
रिजर्व
के
नाम
से
जाना
जाएगा।
इसे
टाइगर
रिजर्व
का
दर्जा
मिले
एक
वर्ष
बीत
चुका
है।
अब
दमोह
जिले
का
काफी
बड़ा
क्षेत्र
भी
इस
टाइगर
रिजर्व
का
हिस्सा
बन
गया
है।
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
में
दमोह
जिले
का
तारादेही,
तेंदूखेड़ा,
तेजगढ़,
सिग्रामपुर
का
जंगली
क्षेत्र
शामिल
हो
गया
है।
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यह
है
टाइगर
रिजर्व
की
स्थिति
-
वीरांगना
दुर्गावती
बाघ
अभयारण्य
के
लिए
केंद्र
सरकार
ने
केन-बेतवा
नदी
जोड़ो
परियोजना
को
सशर्त
मंजूरी
देते
समय
मध्य
प्रदेश
सरकार
पर
कुछ
शर्तें
लगाई
थीं। -
इन
शर्तों
के
तहत
मध्य
प्रदेश
सरकार
को
नौरादेही
और
दुर्गावती
वन्यजीव
अभ्यारण्य
को
मिलाकर
एक
बाघ
अभयारण्य
बनाने
के
लिए
कहा
गया
था। -
जून
2023
में
सागर,
दमोह
और
नरसिंहपुर
जिलों
में
फैले
नौरादेही
और
दुर्गावती
वन्यजीव
अभ्यारण्य
को
एक
संयुक्त
अधिसूचित
क्षेत्र
के
रूप
में
अधिसूचित
किया
गया। -
बाद
में
सरकार
ने
संयुक्त
अधिसूचित
क्षेत्र
का
नाम
बदलकर
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
कर
दिया। -
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
का
कुल
क्षेत्रफल
लगभग
2,339
वर्ग
किमी
है।
टाइगर
रिजर्व
में
लगभग
1,414
वर्ग
किलोमीटर
क्षेत्र
को
कोर
क्षेत्र
और
925.12
वर्ग
किलोमीटर
क्षेत्र
को
बफर
जोन
में
शामिल
किया
गया
है।
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यह
बना
बफर
जोन
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
घोषित
होने
के
बाद
दमोह
जिले
का
जंगली
क्षेत्र
बड़ी
मात्रा
में
चला
गया
था
और
अब
टाइगर
रिजर्व
को
हैंडओवर
भी
हो
गया
है।
दमोह
जिले
का
जो
क्षेत्र
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
में
गया
है,
वह
बफर
जोन
में
शामिल
हुआ
है।
बफर
जोन
क्षेत्र
का
मतलब
होता
है
कि
वहां
लोगों
का
आवागमन
जारी
रह
सकता
है,
लेकिन
यहां
पदस्थ
कर्मचारी
अब
दमोह
जिले
के
नहीं
बल्कि
वीरांगना
टाइगर
रिजर्व
के
कर्मचारी
माने
जाएंगे।
जानकारी
के
अनुसार
तेजगढ़,
झलोन,
तारादेही
और
तेंदूखेड़ा
रेंज
का
जंगली
क्षेत्र
जो
अब
वीरांगना
टाइगर
रिजर्व
में
गया
है,
वहां
पदस्थ
कर्मचारी
भी
अब
सामान्य
वनमंडल
की
जगह
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
अधीन
हो
गए
हैं।
अब
आगामी
समय
में
उनका
वेतन
भी
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
कर्मचारियों
के
नाम
से
बनेगा।
बढ़
रही
है
जानवरों
की
संख्या
सर्रा
और
झापन,
ये
दोनों
रेंज
दमोह
जिले
की
सीमा
में
हैं,
मगर
यह
पूर्व
से
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
की
रेंज
रही
हैं।
यहां
रहने
वाले
ग्रामीणों
के
अनुसार
टाइगर
रिजर्व
में
बड़ी
संख्या
में
जंगली
जानवर
हैं।
बाघों
के
साथ
तेंदुआ,
नीलगाय,
भालू
समेत
चीतल
यहां
पाए
जाते
हैं।
लगभग
एक
माह
पूर्व
टाइगर
रिजर्व
में
एक
बाघिन
ने
भी
चार
शावकों
को
जन्म
दिया
है।
अनुमान
यह
भी
लगाया
जा
रहा
है
कि
दो-तीन
साल
में
तेंदूखेड़ा
का
जंगली
क्षेत्र
बाघों
सहित
अन्य
जानवरों
का
आशियाना
बनेगा।
वर्तमान
में
बाघ
को
छोड़कर
अन्य
सभी
जानवर
जंगलों
में
मौजूद
हैं।
क्या
बोले
अधिकारी?
रानी
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
प्रभारी
एसडीओ
प्रतीक
दुबे
ने
बताया
कि
दमोह
जिले
का
लगभग
58,000
एकड़
जंगली
क्षेत्र
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
में
चला
गया
है,
जो
बफर
जोन
में
शामिल
हुआ
है।
दमोह
डीएफओ
ईश्वर
जरांडे
ने
बताया
कि
दमोह
जिले
का
जो
जंगली
भाग
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
लिए
चिन्हित
हुआ
था,
वह
हैंडओवर
हो
चुका
है।
अब
आगे
जो
भी
उस
क्षेत्र
में
गतिविधियां होंगी,
वह
वीरांगना
दुर्गावती
टाइगर
रिजर्व
के
नियमों
के
तहत
होंगी।

