
चाय
एक
ऐसा
शब्द
है
जो
स्वागत
परंपरा
का
सूचक
हो
गया
है।
चाय
के
बगैर
दिन
की
शुरुआत
ही
नहीं
होती
है।
हमारे
बुजुर्ग
चाय
का
पीना
उचित
नहीं
मानते
थे,
पर
वक्त
बदला
और
प्रचार
प्रसार
ने
चाय
को
दिनचर्या
का
अहम
हिस्सा
बना
दिया।
कार्य
स्थलों
पर
टी
ब्रेक
होने
लगे
हैं।
चाय
की
गुमटियों
ने
अपना
स्थान
बदला
और
आज
चाय
के
कैफे
एक
नए
स्वरूप
में
देखने
को
मिलते
हैं,
लेकिन
इंदौर
में
कई
चाय
के
ठियों
ने
इतिहास
रचा
है।
यहां
चाय
की
चुस्कियों
के
साथ
कई
नामचीन
नेता
देश
दुनिया
के
मसलों
पर
मंथन
किया
करते
थे।
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1834
में
हुआ
भारत
में
चाय
का
आगमन
1834
में
भारत
में
चाय
उत्पादन
की
संभावना
के
लिए
एक
समिति
बनाई
गई।
1835
में
असम
में
चाय
के
बागान
लगाए
गए।
21
दिसंबर
2019
को
संयुक्त
राष्ट्र
संघ
के
एक
निर्णय
के
तहत
21
मई
को
विश्व
चाय
दिवस
मनाया
जाने
लगा।
चाय
दिवस
का
मुख्य
उद्देश्य
इसे
जुड़े
श्रमिकों
और
चाय
व्यापार
की
और
ध्यान
आकर्षित
करना
है।
विश्व
में
चाय
उत्पादन
में
भारत
के
स्थान
दूसरा
है।
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