Jabalpur News: दोषसिद्धि के साक्ष्य नहीं होने के कारण एफआईआर निरस्त, व्यापमं प्री मेडिकल टेस्ट 2013 का मामला

प्री-मेडिकल
टेस्ट
(पीएमटी)-2013
में
रैकेटियर
के
लिए
चार
स्कोररों
की
व्यवस्था
करने
के
आरोप
में
सीबीआई
द्वारा
दर्ज
की
गई
एफआईआर
को
निरस्त
करने
की
मांग
को
लेकर
दायर
याचिका
पर
हाईकोर्ट
ने
निर्णय
सुनाया
है।
मुख्य
न्यायाधीश
सुरेश
कुमार
कैत
एवं
न्यायमूर्ति
विवेक
जैन
की
युगलपीठ
ने
पाया
कि
याचिकाकर्ता
के
खिलाफ
ऐसे
कोई
साक्ष्य
नहीं
हैं,
जिनसे
उसकी
दोषसिद्धि
सिद्ध
हो
सके।
इसके
आधार
पर
कोर्ट
ने
एफआईआर
निरस्त
करने
का
आदेश
दिया।


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यह
याचिका
राजस्थान
के
बाड़मेर
जिले
के
निवासी
रामनिवास
पटेल
की
ओर
से
दायर
की
गई
थी।
सीबीआई
ने
उनके
खिलाफ
विशेष
न्यायाधीश
(व्यापमं
प्रकरण),
भोपाल
के
समक्ष
भारतीय
दंड
संहिता
की
धाराएं
420,
467,
468,
471,
201;
भ्रष्टाचार
निवारण
अधिनियम
की
धारा
13(1)(डी)
सहपठित
धारा
3(2);
शस्त्र
अधिनियम
की
धारा
25
और
27;
तथा
आयकर
अधिनियम
की
धारा
66
और
43
के
तहत
आरोप
पत्र
प्रस्तुत
किया
था।
इस
प्रकरण
में
कुल
491
आरोपी
बनाए
गए
हैं।


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रहेंगे
टीम
में

रामनिवास
पटेल
पर
आरोप
था
कि
उसने
पीएमटी-2013
परीक्षा
में
रैकेटियर
संजीव
कुमार
शिल्पकार
से
मिलवाकर
चार
स्कोररों
की
व्यवस्था
करवाई
थी
और
इसके
एवज
में
चार
लाख
रुपये
लिए
थे।
बताया
गया
कि
उसने
स्कोररों
को
40
हजार
रुपये,
अपने
पिता
को
20
हजार
रुपये
दिए
थे,
जबकि
दस
हजार
रुपये
उसके
पास
से
बरामद
हुए
थे।
याचिकाकर्ता
के
अधिवक्ता
कपिल
शर्मा
ने
तर्क
दिया
कि
चार्जशीट
में
ऐसा
कोई
प्रत्यक्ष
साक्ष्य
नहीं
है
जिससे
यह
साबित
होता
हो
कि
याचिकाकर्ता
ने
आर्थिक
लाभ
अर्जित
किया।
स्कोररों
या
पिता
को
पैसे
देने
का
भी
कोई
प्रमाण
नहीं
है,
केवल
दस
हजार
रुपये
की
जब्ती
का
साक्ष्य
है।
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में
बाल
न्यायालय
में
सुनवाई

हाईकोर्ट
की
युगलपीठ
ने
कहा
कि
जांच
पूरी
हो
चुकी
है
और
चार्जशीट
दाखिल
की
जा
चुकी
है।
इस
चरण
में
एफआईआर
को
रद्द
करने
की
मांग
उचित
है
क्योंकि
प्रस्तुत
साक्ष्य
दोषसिद्धि
की
संभावना
नहीं
दर्शाते।
इसलिए
याचिकाकर्ता
के
खिलाफ
चल
रही
कार्यवाही
को
समाप्त
करना
न्यायसंगत
है।