
एक
युवक
ने
डॉक्टर
बनने
की
चाहत
में
आदिवासी
वर्ग
के
पेंटर
दोस्त
के
नाम
व
जाति
का
उपयोग
करते
हुए
मेडिकल
कॉलेज
में
दाखिला
लिया।
कोर्स
करने
के
बाद
उसी
के
नाम
से
निजी
अस्पताल
में
नौकरी
करने
लगा।
उपचार
के
दौरान
दस
माह
पूर्व
हुई
महिला
की
मौत
के
मामले
में
जांच
के
दौरान
पूरा
फर्जीवाड़ा
उजागर
हुआ।
अतिरिक्त
पुलिस
अधीक्षक
सूर्यकांत
शर्मा
ने
बताया
कि
भंवरताल
स्थित
मार्बल
सिटी
हॉस्पिटल
में
भर्ती
एक
महिला
की
उपचार
के
लिए
1
सितम्बर
2024
को
भर्ती
किया
गया
था।
जिसके
अगले
दिन
दो
सितम्बर
को
मौत
हो
गई
थी।
मेडिकल
फाइल
देखने
पर
बेटे
ने
पाया
था
कि
उपचार
के
दौरान
आईसीयू
वार्ड
में
रात
को
डॉ.
बृजराज
सिंह
उईके
की
ड्यूटी
थी।
बेटे
मनोज
महावर
ने
उपचार
के
दौरान
लापरवाही
बरतने
के
कारण
मां की
मौत
होने
के
संबंध
में
ओमती
थाने
में
शिकायत
दर्ज
की
थी।
पुलिस
ने
शिकायत
को
विवेचना
में
लेकर
जांच
प्रारंभ
की
थी।
ये
भी
पढ़े- इंदौर
के
जिला
अस्पताल
की
छत
पर
मिला
दवाईयों
का
जखीरा,
कोविड
काल
में
मंगाई
थी
सीएसपी
ओमती
सोनू
कुर्मी
ने
बताया
कि
पुलिस
ने
जांच
में
पाया
कि
बृजराज
सिंह
उईके
एक
पेंटर
है।
अस्पताल
में
कार्यरत
डॉक्टर
की
पहचान
फोटो
से
उसने
अपने
दोस्त
सतेन्द्र
कुमार
के
रूप
में
की थी।
मेडिकल
सर्टिफिटेक
जांच
करने
पर
पाया
किया
कि
सत्येन्द्र
ने
अपने
दोस्त
बृजलाल
उइके
के
नाम
व
उसकी
जाति
के
आधार
पर
नेता
सुभाष
चंद्र
मेडिकल
कॉलेज
में
दाखिला
लिया
था।
उसने
साल
2018
में
एमबीबीएस
कोर्स
पूरा
किया
था।
इसके
बाद
से
वह
निजी
अस्पताल
में
नौकरी
कर
रहा
था।
एमबीबीएस
कोर्स
करने
के
कारण
उसके
डॉक्टर
होने
पर
किसी
को
शक
नहीं
हुआ।
पुलिस
ने
आरोपी
के
खिलाफ
धोखाधड़ी
व
साजिश
के
तहत
प्रकरण
दर्ज
कर
उसकी
तलाश
प्रांरभ
कर
दी
है।
ये
भी
पढ़े- शराब
के
लिए
पैसे
नहीं
दिए
तो
बेटे
ने
कर
दी
CM
हेल्पलाइन
में
शिकायत,
शिक्षक
पिता
और
अधिकारी
भी
चौंके
दोस्त
को
मदद
का
वादा
किया,
फिर
मुकरा
दरअसल
सतेंद्र
सिंह
निषाद
और
बृजराज
सिंह
उईके
दोनों
ने
आपस
में
दोस्त
में
हैं,
जिन्होंने
पढ़ाई
12वीं
तक
कटनी
में
की
थी।
अच्छे
दोस्त
होने
के
चलते
उसने
बृजराज
की
10वी
और
12वी
के
रिजल्ट
लेते
हुए
उसके
नाम
का
इस्तेमाल
किया
और
बन
गया
MBBS
डॉक्टर।
हालांकि
फर्जीवाड़े
वाले
इस
डॉक्टर
से
नाइट
ड्यूटी
दौरान
एक
महिला
के
इलाज
में
लापरवाही
हुई,
जिसमें
उसकी
मौत
हो
गई।
कटनी
में
रहने
वाले
ब्रजराज
सिंह
ने
अपनी
मार्कशीट
दिखते
हुए
बताया
कि
इसी
मार्कशीट
का
उपयोग
उसके
दोस्त
ने
करते
हुए
MBBS
की
डिग्री
ली
है।
उसने
मुझे
मेरी
मदद
के
बदले
पैसे
देने
की
बात
कही
थी
लेकिन
आज
तक
कोई
मदद
नहीं
की।
मेरी
दोनों
मार्कशीट,
डिजिटल
जाति
प्रमाण
पत्र
सहित
अन्य
डॉक्यूमेंट
ले
लिए
थे।
वो
जबलपुर
में
मेरे
नाम
से
डॉक्टर
बन
गया
और
मैं
कटनी
में
घर
चलाने
के
लिए
पुताई
का
काम
करता
हूं।
मुझसे
पूछताछ
फरवरी
से
शुरू
हुई
थी
जो
लगातार
जारी
है।
मैेंने
जांच
टीम
को
सब
कुछ
जानकारी
दे
दी
है।