प्रेमी हत्या केस: एमपी हाईकोर्ट ने किशोरी को माना नाबालिग, अब किशोर न्याय बोर्ड में चलेगा मामला


मध्य
प्रदेश
हाईकोर्ट
ने
उस
आदेश
को
रद्द
कर
दिया
है
जिसमें
अपीलकर्ता
को
बड़ा
(बालिग)
माना
गया
था।
कोर्ट
ने
कहा
है
कि
स्कूल
और
मैट्रिक
के
प्रमाणपत्रों
के
अनुसार
अपीलकर्ता
की
उम्र
18
साल
से
कम
है।
इसलिए
प्रेमी
की
हत्या
के
मामले
की
जांच
किशोर
न्याय
बोर्ड
द्वारा
होनी
चाहिए।


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अपीलकर्ता
ने
सत्र
न्यायालय
के
उस
आदेश
को
चुनौती
दी
थी,
जिसमें
उसे
बड़ा
मानकर
मामले
की
सुनवाई
सत्र
न्यायालय
में
करने
का
आदेश
दिया
गया
था।
यह
मामला
भोपाल
के
अशोका
गार्डन
थाने
का
है,
जहां
27
जुलाई
2019
को
अपीलकर्ता
पर
अपने
प्रेमी
पीयूष
जैन
की
हत्या
का
आरोप
है।


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किशोर
न्याय
बोर्ड
ने
स्कूल
और
मैट्रिक
के
दस्तावेजों
के
आधार
पर
अपीलकर्ता
को
नाबालिग
माना
था।
लेकिन
मृतक
के
पिता
ने
सत्र
न्यायालय
में
अपील
की
थी।
सुनवाई
के
दौरान
नगर
निगम
का
जन्म
प्रमाणपत्र
और
नर्सिंग
होम
के
रजिस्टर
के
अनुसार
अपीलकर्ता
की
जन्मतिथि
20
सितंबर
1999
बताई
गई
थी,
इसलिए
उसे
बड़ा
माना
गया
था।
इस
वजह
से
मामले
की
सुनवाई
सत्र
न्यायालय
में
करने
का
आदेश
दिया
गया
था।


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लिए

हाईकोर्ट
के
एकलपीठ
ने
कहा
कि
ऑसिफिकेशन
रिपोर्ट
के
मुताबिक
अपीलकर्ता
की
उम्र
17
से
19
साल
के
बीच
हो
सकती
है।
लेकिन
जब
स्कूल
और
जन्म
प्रमाणपत्र
जैसे
दस्तावेज
मौजूद
होते
हैं,
तो
उन्हें
ज्यादा
महत्व
दिया
जाता
है।
इस
आधार
पर
कोर्ट
ने
अपीलकर्ता
की
जन्मतिथि
27
अगस्त
2001
मानी
और
कहा
कि
वह
नाबालिग
है।
इसलिए
मामला
किशोर
न्याय
बोर्ड
के
पास
जाना
चाहिए।