
पिछले
एक
सप्ताह
से
धूलभरी
आंधी
और
बारिश
ने
किसानों
की
नींद
उड़ा
रखी
थी।
किसान
खेतों
में
पकी
खड़ी
मूंग
की
फसल
को
निकालने
की
चिंता
में
डूबा
हुआ
था।
इसी
बीच
एक
बार
फिर
मौसम
ने
करवट
ली
और
क्षेत्र
में
तेज
धूप
के
साथ
ही
मौसम
खुल
गया।
मौसम
खुलने
से
किसानों
ने
खेतों
में
डेरा
डाल
लिया
है
और
फसल
निकालने
के
इंतजाम
जुटाना
शुरू
कर
दिये
हैं।
किसान
बस
ये
कामना
कर
रहा
है
कि
अभी
कम
से
कम
एक
सप्ताह
पानी
नहीं
आए।
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मौसम
विभाग
की
चेतावनी
के
चलते
किसान
चिंतित
हैं।
उनका
पहला
प्रयास
है
कि
खेतों
में
खड़ी
मूंग
की
फसल
को
वह
पानी
से
बचाकर
अपने
घर
लाकर
सुरक्षित
रख
लें।
हालांकि
क्षेत्र
में
अभी
भी
50
फ़ीसदी
मूंग
की
फसल
अधपकी
अवस्था
में
खड़ी
है
और
कम
से
कम
एक
सप्ताह
से
भी
अधिक
का
अभी
फसल
पकने
में
और
लगेगा।
ऐसी
स्थिति
में
किसान
ईश्वर
से
मौसम
खुलने
की
गुहार
लगा
रहा
था।
हुआ
भी
कुछ
ऐसा
ही।
एक
बार
फिर
मौसम
के
बदलने
से
अब
किसान
खेतों
की
और
दौड़
पड़ा
हैं
और
फसल
की
हार्वेस्टिंग
में
जुट
गया
है।
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को
जवाब
पेश
करेंगे
बाबा
बागेश्वर
45
हजार
हेक्टेयर
में
मूंग
की
बुआई
इस
वर्ष
संपूर्ण
ब्लॉक
में
45
हजार
हैक्टेयर
रकबे
में
मूंग
की
बुआई
की
गई
है।
बुआई
का
सिलसिला
मार्च
माह
से
ही
शुरू
हो
गया
जो
15
अप्रैल
के
बाद
तक
चला।
ऐसे
में
कई
किसानों
की
फसल
अभी
भी
40
से
50
दिन
की
अवस्था
में
ही
पहुंची
है।
जायद
की
मूंग
फसल
की
अवधि
न्यूनतम
60
से
65
दिनों
की
होती
है।
लेकिन
प्री-मानसून
तय
समय
से
एक
पखवाड़े
पूर्व
ही
सक्रिय
हो
जाने
के
कारण
किसानों
के
सामने
संकट
खड़ा
हो
गया
था।
क्षेत्र
में
15
मर्ई
के
बाद
से
ही
लगातार
रुक-रुक
कर
बरसात
व
तेज
हवा
आंधी
का
दौरा
चल
रहा
है।
जिससे
किसानों
की
चिंता
लगातार
बड़ी
हुई
है।
8
दिन
लेट
हुआ
मानसून,
किसान
खुश
मौसम
विभाग
द्वारा
सूचना
जारी
की
गई
हैं
कि
मप्र
में
मानसून
की
इंट्री
10
से
12
जून
के
लगभग
होगी,
लेकिन
इसी
बीच
सिस्टम
चेंज
हुआ
तो
मानसून
एक
सप्ताह
देरी
से
मप्र
में
इंट्री
करेगा।
ऐसे
में
किसानों
ने
राहत
की
सांस
ली
है
और
अब
अपनी
फसल
के
पकने
का
इंतजार
कर
रहा
है।
प्री-मानसून
की
इंट्री
से
कई
किसानों
ने
हरे
खेतों
में
ही
पैराक्वाट
दवा
डालकर
मूंग
फसल
को
सुखा
लिया
और
उसकी
हार्वेस्टिंग
कर
दी,
जिससे
किसानों
को
25
से
30
फीसदी
तक
नुकसान
की
संभावना
व्यक्त
की
जा
रही
है।
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की
मुश्किलें
कृषि
विभाग
की
सलाह
दरकिनार-फसल
सूखाने
में
पैराक्वाट
का
इस्तेमाल
खेतों
में
खड़ी
मूंग
की
फसल
को
जल्द
से
जल्द
अपने
घर
लाने
की
जुगत
में
किसान
धड़ल्ले
से
फसल
सूखाने
के
लिए
पैराक्वाट
जैसी
खतरनाक
दवाओं
का
इस्तेमाल
कर
रहा
है।
कृषि
विभाग
के
द्वारा
किसानों
को
पहले
ही
सलाह
दी
गई
थी
कि
फसल
सूखने
के
लिए
पेराक्वॉड
व
ग्लाइसोफेड
दवाओं
का
इस्तेमाल
ना
करें।
लेकिन
किसान
जल्दबाजी
के
चक्कर
में
दवाओं
का
छिडक़ाव
कर
अपनी
फसल
को
सुखा
रहा
है।
यह
दोनों
दवा
प्रकृति,
मानव
जीवन
और
पशु
सभी
के
लिए
हानिकारक
है।
कृषि
विभाग
के
एसएडीओ
वीएस
राज
ने
बताया
कि
किसानों
को
इस
संबंध
में
सलाह
दी
गई
थी,
लेकिन
उसका
असर
किसानों
पर
कम
ही
दिखाई
दे
रहा
है।