MP News: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बॉम्बे ग्रीन और मणि प्रभा किस्म का स्वाद चख कर “आम महोत्सव” का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
ने
मंगलवार
को
पचमढ़ी
के
राज
भवन
परिसर
में
“आम
महोत्सव”
का
शुभारंभ
किया।
इस
अवसर
पर
उन्होंने
मणि
प्रभा
एवं
बॉम्बे
ग्रीन
किस्म
के
आम
का
स्वाद
भी
लिया।
आम
का
रसास्वादन
कर
मुख्यमंत्री
डॉ.
यादव
ने
आम
की
मिठास
और
स्वाद
की
सराहना
की।
उन्होंने
प्रदर्शनी
में
लाए
गए
देशी
आम
भी
चखे।
प्रदर्शनी
में
जम्बो
केसर,
सुंदरजा,
कृष्ण
भोग,
लंगड़ा
आम,
गजरिया,
मालदा
आदि
किस्मो
की
सराहना
की।
 इस
अवसर
पर
उप
मुख्यमंत्री
जगदीश
देवड़ा
एवं
|राजेंद्र
शुक्ला
के
साथ-साथ
लोक
निर्माण
मंत्री
एवं
नर्मदापुरम
जिले
के
प्रभारी
मंत्री
राकेश
सिंह
और
मंत्रीगण
ने
भी
आम
का
स्वाद
चखा
और
आम
की
विभिन्न
किस्मों
की
सराहना
की।
इस
अवसर
पर
नरसिंहपुर
के
किसान
विजय
पाल
सिंह
ने
आम
की
विभिन्न
किस्मो
की
टोकरी
मुख्यमंत्री
डॉ.
यादव
को
भेंट
की।
आम
उत्पादक
किसान
सुभाष
पटेल
ने
मुख्यमंत्री
डॉ
यादव
को
“यथार्थ
गीता”
पुस्तिका
भेंट
की।

ये
भी
पढ़ें-  MP
News: राहुल
गांधी
ने
जूते
पहनकर
दी
इंदिरा
गांधी
को
पुष्पांजलि,
सीएम
मोहन
यादव
बोले-
यह
हमारे
संस्कार
नहीं

 


आम
प्रदर्शनी
में
इन
किस्मों
का
प्रदर्शन
किया
गया

मंगलवार
को
राजभवन
पचमढ़ी
में
आयोजित
“आम
महोत्सव”
में
जिन
किस्मो
का
प्रदर्शन
किया
गया
उनमें
आम्रपाली,
लंगड़ा,
दशहरी,
चौसा,
तोता
परी,
फ़ाज़ली,
बंगाल
पाली,
तुर्रापर,
शुकर
गुठली,
मिश्री,
हापुस,
स्वर्णप्रभा,
काला
पहाड़,
हिमसागर,
स्वर्णरेखा,
रत्ना,
केसर,
रुक्मणी,
साबनिया,
नीलम,
सिंधु,
जहांगीर,
प्यारी,
रॉयल
मिस्री,
जर्दालू,
सेंसेशन,रस
भंडार
और
राम
केला
शामिल
है।

ये
भी
पढ़ें-  MP
News:  राहुल
गांधी
भोपाल
पहुंचे,
कांग्रेस
नेताओं
ने
किया
गर्मजोशी
से
स्वागत,
संगठन
सृजन
अभियान
की
होगी
शुरुआत


मंत्री
कुशवाह
ने
लिया
जायजा

मध्यप्रदेश
के
सुरम्य
पर्यटन
स्थल
पचमढ़ी
में
दो
दिवसीय
आम
महोत्सव
का
सामाजिक
न्याय
एवं
दिव्यांगजन
सशक्तिकरण,
उद्यानिकी
तथा
खाद्य
प्रसंस्करण
मंत्री
नारायण
सिंह
कुशवाह
ने
भी
जायजा
लिया।
इस
विशेष
आयोजन
में
आम
300
से
अधिक
नमूने
प्रदर्शन
के
लिए
रखे
गए
हैं,
जो
कृषकों,
आमजन
और
पर्यटकों
के
आकर्षण
का
केंद्र
बने
हुए
हैं।
महोत्सव
4
जून
2025
तक
चलेगा
और
इसका
उद्देश्य
आम
की
विविधता
को
प्रोत्साहित
करना,
प्रगतिशील
कृषकों
को
मंच
देना
तथा
आम
आधारित
उद्यानिकी
और
प्रसंस्करण
को
बढ़ावा
देना
है।