
विश्व
पर्यावरण
दिवस
की
पूर्व
संध्या
पर
इंदौर
के
अभ्यास
मंडल
द्वारा
पर्यावरण
संरक्षण
को
समर्पित
एक
प्रेरणादायी
पहल
की
गई।
“हर
पौधा
बने
पेड़,
हर
व्यक्ति
बने
प्रहरी”
और
“पर्यावरण
संरक्षण
हर
व्यक्ति
की
जिम्मेदारी”
जैसे
संकल्पों
के
साथ
कान्ह
सरस्वती
नदी,
लोखंडे
ब्रिज
क्षेत्र
में
पंचवटी
वृक्षों
का
सामूहिक
रोपण
किया
गया।
इस
मौके
पर
वार्ड
57
के
पार्षद
सुरेश
टाकलकर
और
अभ्यास
मंडल
के
संयोजक
स्वप्निल
व्यास
ने
बताया
कि
यह
आयोजन
केवल
पौधारोपण
भर
नहीं,
बल्कि
आम
नागरिकों
को
प्रकृति
के
प्रति
उत्तरदायित्व
से
जोड़ने
का
प्रयास
है।
विज्ञापन
सालभर
होता
है
अभ्यास
मंडल
का
पर्यावरणीय
योगदान
स्वप्निल
व्यास
ने
आगे
कहा
कि
अभ्यास
मंडल
केवल
विश्व
पर्यावरण
दिवस
तक
सीमित
नहीं
है,
बल्कि
वर्षभर
पेड़,
पानी,
प्लास्टिक
और
प्रदूषण
जैसे
मुद्दों
पर
जमीनी
और
वैचारिक
कार्यवाही
करता
है।
संस्था
ने
समय-समय
पर
ऐसे
कार्यक्रमों
के
माध्यम
से
यह
सिद्ध
किया
है
कि
पर्यावरणीय
चेतना
केवल
औपचारिकता
नहीं,
बल्कि
यह
जीवनशैली
का
हिस्सा
बननी
चाहिए।
वर्तमान
में
जब
पृथ्वी
जलवायु
परिवर्तन,
प्रदूषण
और
जैव
विविधता
ह्रास
जैसे
गंभीर
संकटों
से
जूझ
रही
है,
तब
ऐसी
स्थानीय
पहलों
से
नई
उम्मीदें
जागती
हैं।
हर
नागरिक
बने
प्रकृति
का
प्रहरी
अभ्यास
मंडल
का
मानना
है
कि
पर्यावरण
की
रक्षा
केवल
सरकारी
प्रयासों
या
संस्थागत
नीतियों
से
नहीं,
बल्कि
हर
जागरूक
नागरिक
के
संकल्प
से
संभव
है।
इस
अवसर
पर
उपस्थित
सभी
लोगों
से
यह
आह्वान
किया
गया
कि
“धरती
हमारी
माता
है,
और
उसका
संरक्षण
हमारा
धर्म” इस
मूल
भावना
को
अपनाएं।
जब
हर
पौधा
पेड़
बनेगा
और
हर
व्यक्ति
उसके
संरक्षण
में
योगदान
देगा,
तभी
पर्यावरण
दिवस
की
सार्थकता
सिद्ध
होगी
और
वास्तविक
परिवर्तन
आएगा।
पंचवटी
पौधों
के
साथ
नीम
के
भी
पौधे
रोपे
गए
कार्यक्रम
के
दौरान
वट,
पीपल,
आंवला,
अशोक
और
बेल
जैसे
पंचवटी
वृक्षों
के
साथ-साथ
नीम
के
पौधे
भी
लगाए
गए।
साथ
ही
सभी
पौधों
को
सुरक्षित
रखने
के
लिए
ट्रीगार्ड
भी
लगाए
गए।
कार्यक्रम
का
संचालन
वैशाली
खरे
ने
किया
और
आभार
मालासिंह
ठाकुर
द्वारा
व्यक्त
किया
गया।
इस
अवसर
पर
रामेश्वर
गुप्ता,
शंकर
गर्ग,
नेताजी
मोहिते,
शफी
शेख,
सुधीर
दांडेकर,
दिनेश
शिन्त्रे,
उल्हास
बापट,
अनिल
मोड़क,
शाम
पांडे,
मुरली
खंडेलवाल,
फादर
लकारा,
दीप्ति
गौर,
मोनिका
सबनीस,
ग्रीष्मा
त्रिवेदी,
यश
जायसवाल,
संजना
चौधरी,
सोनाली
बापट
सहित
अनेक
पर्यावरण
प्रेमी
उपस्थित
रहे।