
कलियुग
में
अधर्म,
पाप
और
भौतिकता
बढ़ेगी,
लेकिन
जो
व्यक्ति
भगवान
शिव
की
भक्ति
करेगा,
वह
सभी
संकटों
से
सुरक्षित
रहेगा।
शिव
पुराण
का
श्रवण
करने
मात्र
से
ही
भगवान
शिव
की
कृपा
प्राप्त
होती
है
और
जीवन
में
सकारात्मक
बदलाव
आता
है।
जैसे
दूध
को
तपाने
पर
वह
घी
में
परिवर्तित
हो
जाता
है,
वैसे
ही
जब
मूर्तिकार
मिट्टी
को
रौंदता
है,
तभी
सुंदर
मूर्ति
बनती
है।
उसी
प्रकार
भगवान
भी
अपने
भक्तों
को
कष्ट
देकर
निखारते
हैं।
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उक्त
विचार
जिला
मुख्यालय
स्थित
प्रसिद्ध
कुबेरेश्वरधाम
पर
आयोजित
ऑनलाइन
सात
दिवसीय
शिवपुत्री
शिवमहापुराण
कथा
के
छठे
दिवस
पर
अंतर्राष्ट्रीय
कथावाचक
पंडित
प्रदीप
मिश्रा
ने
व्यक्त
किए।
उन्होंने
कहा
कि
कभी-कभी
ऐसा
लगता
है
कि
भक्त
कष्ट
भोग
रहा
है
और
पापी
मस्त
है।
पर
ऐसा
नहीं
है,
कष्ट
भी
हमारे
लिए
एक
सबक
होते
हैं।
इन
कष्टों
में
भी
हम
यदि
सच्चे
मन
से
भगवान
शिव
की
भक्ति
करें
तो
वे
सुख
में
बदल
सकते
हैं।
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ने
दम
तोड़ा,
क्या
है
कहानी
ऑनलाइन
कथा
के
दौरान
प्रतिदिन
बड़ी
संख्या
में
श्रद्धालु
शामिल
होते
हैं,
और
सुबह
से
शाम
तक
पूरी
भक्ति-भावना
के
साथ
“तेरे
डमरू
की
धुन
सुनके
मैं
काशी
नगरी
आई
हूं,
मेरे
भोले
ओ
बम
भोले…”
जैसे
भजनों
के
साथ
आनंद
लेते
हैं।
कथा
के
छठे
दिवस
पंडित
श्री
मिश्रा
ने
भगवान
शिव
और
मां
पार्वती
की
पुत्री
अशोक
सुंदरी
के
राजा
नहुष
से
विवाह
का
विस्तारपूर्वक
वर्णन
किया।
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की
वापसी
बनी
खतरा!
इंदौर
में
एक
दिन
में
मिले
7
नए
कोरोना
मरीज
भगवान
कठिन
परिस्थितियों
में
डालते
हैं
पंडित
मिश्रा
ने
कहा
कि
भगवान
अपने
भक्त
के
प्रेम
और
निष्ठा
की
परीक्षा
लेते
हैं।
यह
परीक्षा
यह
दिखाती
है
कि
भक्त
वास्तव
में
भगवान
से
कितना
प्रेम
करता
है।
यदि
कठिन
समय
में
भी
भक्त
भगवान
के
प्रति
अपनी
श्रद्धा
और
विश्वास
बनाए
रखता
है,
तो
यह
उसकी
आध्यात्मिक
उन्नति
का
कारण
बनता
है।
भक्तों
को
मिलने
वाले
कष्ट
साधारण
घटनाएं
नहीं
होतीं।
वे
भगवान
की
योजना
के
अंतर्गत
ही
आती
हैं
और
उनके
पीछे
गहरे
आध्यात्मिक
कारण
होते
हैं।
भगवान
अपने
भक्तों
को
दुखी
नहीं
देखना
चाहते,
परंतु
उन्हें
उच्चतर
आध्यात्मिक
स्थिति
तक
पहुंचाने
के
लिए
इन
कष्टों
को
माध्यम
बनाते
हैं।
यह
एक
प्रकार
का
प्रशिक्षण
है,
जैसे
गुरु
अपने
शिष्य
को
अनुशासन
सिखाने
के
लिए
कठोर
परिस्थितियों
में
डालता
है।
बुधवार
को
कथा
के
दौरान
उन्होंने
कहा
कि
शिव
रूपी
गुरु
जब
कृपा
करते
हैं,
तभी
हम
शिवत्व
का
अंश
मात्र
समझ
पाते
हैं।
जब
तक
प्रभु
की
कृपा
नहीं
होती,
तब
तक
हम
धर्म
और
भक्ति
की
ओर
अग्रसर
नहीं
हो
सकते।
देवादिदेव
की
कृपा
से
ही
हम
ईश्वर
की
ओर
बढ़ते
हैं।
बाबा
भोलेनाथ
की
चौखट
पर
जाकर
ही
सुख
और
शांति
की
प्राप्ति
होती
है।

कुबेरेश्वर
धाम
पर
चल
रही
पंडित
प्रदीप
मिश्रा
की
आनॅलाइन
शिवमहापुराण