Ujjain News:महाकाल को प्रसन्न करने के लिए अनौखी आराधना,100 बच्चे कर रहे नंगे पैर नृत्य


उज्जैन
में
गंगा
दशहरा
पर
विश्वप्रसिद्ध
बाबा
महाकाल
के
दरबार
में
छोटे-छोटे
कलाकारों
द्वारा
अनूठी
परंपरा
निभाई
जा
रही
है।
इस
दौरान
लगभग
100
कलाकार
भगवान
महाकाल
के
दरबार
में
नंगे
पैर
तपती
गर्मी
के
बीच
नृत्य
आराधना
कर
रहे
हैं।
यह
परंपरा
36
सालों
से
लगातार
निभाई
जा
रही
है।

रसराज
नृत्य
संस्थान
द्वारा
आयोजित
इस
अखंड
नृत्य
साधना
के
बारे
में
निदेशक
साधना
मालवीय
ने
कहा
कि 
भगवान
महाकाल
के
दरबार
में
कला
की
प्रस्तुति
देकर
कलाकार
भी
खुद
को
धन्य
मानते
हैं।
पिछले
कई
सालों
से
गंगा
दशहरे
पर्व
पर
दूर-दूर
से
कलाकार
यहां
प्रस्तुति
देने
के
लिए
आते
हैं।
मध्य
प्रदेश,
राजस्थान,
गुजरात
सहित
कई
प्रदेशों
से 
कलाकार
उज्जैन

रहे
हैं। 
गुरुवार
सुबह
भस्म
आरती
के
बाद
शुरू
हुई 
अखंड
नृत्यांजलि
देर
रात
शयन
आरती
तक
लगातार
18
घंटे
तक
चली


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किया
प्रदर्शन


विश्व
कल्याण
की
कामना
को
लेकर
हो
रही
नृत्य
साधना

रसराज
प्रभात
नृत्य
संस्थान
की
अध्यक्ष 
साधना
मालवीय
तथा
सांस्कृतिक
सचिव
मृणालिनी
चौहान
ने
बताया
कि
विश्व
में
सुख
शांति
और
समृद्धि
बनी
रहे
इसी
भाव
को
लिए
हर
साल
भगवान
महाकाल
की
घुंघरूओं
के
माध्यम
से
बच्चे
18
घंटे
तक
सतत
नृत्य
आराधना
करते
हैं।
जैसे
अखंड
रामायण
पाठ
होता
है
वैसे
ही
भगवान
के
श्री
चरणों
में
अखंड
नत्यांजलि
होती
है। 


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दौड़ा
चला
आता
हूं


एक
महीने
पहले
से
शुरू
होती
है
कार्यक्रम
की
तैयारी

गंगा
दशहरा
पर्व
पर
हर
साल
होने
वाली
नृत्यांजलि
में
संस्थान
के
कलाकार
सुबह
भस्म
आरती
से
महाकाल
के
दरबार
में
पहुंचकर
घुंघरु
के
माध्यम
से
नृत्य
आराधना
शुरू
करते
हैं।
इस
कार्यक्रम
की
तैयारी
एक
महीने
पहले
से
शुरू
हो
जाती
है।
इसमें
मुख्य
रूप
से
शिव
तांडव,
शिव
पंचाक्षर,
महाकाल
आरती
आदि
शामिल
होती
है।
तबला
और
हारमोनियम
के
साथ
गायन
वादन
करते
हुए
कलाकार
महाकाल
मंदिर
के
मुक्ता
काशी
मंच
पर
भगवान
का
नृत्य
के
माध्यम
से
अभिषेक
करते
हैं।