Bhopal: भोपाल में कोरोना के मरीज मिलने के बाद भी नहीं शुरू हुई RT-PCR जांच, निजी लैबों में करानी पड़ रही जांच


मध्य
प्रदेश
में
कोरोना
के
मरीजों
की
संख्या
लगातार
बढ़
रही
है
राजधानी
भोपाल
में
भी
तीन
मरीज
मिल
चुके
हैं
इसके
बावजूद
अभी
तक
सरकारी
अस्पतालों
में
आरटी-पीसीआर
जहां
शुरू
नहीं
हो
पाई
है।
लक्षण
वाले
मरीजों
को
निजी
अस्पतालों
में
जांच
करनी
पड़
रही
है।
प्रदेश
में
 पहला
केस
23
मई
को
सामने
आया
था।
अब
तक
सामने
आए
कुल
50
मामलों
में
से
करीब
40%
मरीज
या
तो
देश
के
अन्य
राज्यों
से
लौटे
थे
या
किसी
बाहर
से
आए
संक्रमित
के
संपर्क
में
आए
थे।
यह
स्थिति
इसलिए
भी
चिंताजनक
है
क्योंकि
बीते
20
दिनों
में
देशभर
में
एक्टिव
केस
93
से
बढ़कर
5,364
हो
गए
हैं।
यानी
16
मई
की
तुलना
में
6
जून
को
देश
में
5,274
ज्यादा
एक्टिव
केस
हैं।


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मध्य
प्रदेश
में
अभी
तक
सारी
जांचे
निजी
लबों
में
हुई

मध्यप्रदेश
में
बुधवार
और
गुरुवार
को
17
नए
केस
सामने
आए
हैं,
जिससे
कुल
एक्टिव
केस
36
हो
गए
हैं,
लेकिन
सरकारी
अस्पतालों
में
RT-PCR
जांच
ठप
है,
क्योंकि
लोक
स्वास्थ्य
एवं
चिकित्सा
शिक्षा
विभाग
ने
अब
तक
किट
खरीदी
के
लिए
रेट
कॉन्ट्रैक्ट
नहीं
किया
है।
साल
2020
में
जो
रेट
तय
किए
गए
थे,
वे
2023
में
समाप्त
हो
गए।
2024
में
आवश्यकता
नहीं
पड़ी,
लेकिन
अब
केस
बढ़ने
लगे
हैं,
तो
सरकारी
अस्पतालों
में
जांच
नहीं
हो
पा
रही।
लोग
निजी
लैब
में
1200
से
1500
रुपए
देकर
जांच
कराने
को
मजबूर
हैं।
अब
तक
आए
सभी
केसों
की
जांच
निजी
लैब
में
हुई
है।


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स्वास्थ्य
विभाग
छिपा
रहा
मरीजों
की
जानकारी 

कोरोना
के
मरीज
सामने

रहे
हैं,
लेकिन
स्वास्थ्य
विभाग
मरीजों
की
जानकारी
सार्वजनिक
नहीं
कर
रहा
है।
जबकि
साल
2020
से
2024
तक
जब
भी
केस
बढ़ते
थे,
तो
स्वास्थ्य
विभाग
रोजाना
बुलेटिन
जारी
करता
था,
लेकिन
2025
में
ऐसा
कुछ
नहीं
हो
रहा
है।

बुलेटिन

रहा,

ही
अधिकारी
जानकारी
देने
को
तैयार
हैं।
उनका
कहना
है
कि
जब
तक
राज्य
सरकार
की
ओर
से
गाइडलाइन
नहीं
आती,
वे
कोई
सूचना
नहीं
देंगे।


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का
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बोले-आज
तक
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को
नहीं
मिली
सजा


 हमीदिया
की
जीनोम
सीक्वेंसिंग
मशीन
खा
रही
धूल

कोरोना
की
दूसरी
लहर
में
हुई
भारी
मौतों
के
बाद
मध्यप्रदेश
के
5
मेडिकल
कॉलेजों
भोपाल,
इंदौर,
ग्वालियर,
जबलपुर
और
रीवा
में
जीनोम
सीक्वेंसिंग
लैब
स्थापित
करने
का
फैसला
लिया
गया
था,
लेकिन
भोपाल
के
गांधी
मेडिकल
कॉलेज
की
स्टेट
वायरोलॉजी
लैब
और
इंदौर
के
महात्मा
गांधी
मेडिकल
कॉलेज
को
छोड़कर,
बाकी
किसी
भी
मेडिकल
कॉलेज
में
अभी
तक
मशीनें
नहीं
आई
हैं।
हमीदिया
अस्पताल
में
लगाई
गई
मशीन
का
अभी
तक
इस्तेमाल
ही
नहीं
किया
गया।
कोविड
वायरस
को
फैलने
से
रोकने,
उसके
असर
की
बारीकी
से
निगरानी
करने
और
सटीक
जानकारी
देने
के
मकसद
से
विश्व
स्वास्थ्य
संगठन
ने
मध्यप्रदेश
की
स्टेट
वायरोलॉजी
लैब
को
5
करोड़
रुपए
की
जीनोम
सीक्वेंसिंग
मशीन
दी
थी। 

 

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ने
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की
मूल
विचारधारा
समता,अनुशासन
और
सेवा
का
प्रतीक


सिर्फ
एम्स
में
जांच
की
सुविधा
उपलब्ध

कोविड
अलर्ट
के
बीच
केवल
एम्स
भोपाल
अकेला
सरकारी
अस्पताल
है,
जहां
कोरोना
की
जांच
के
लिए
आरटी-पीसीआर
किट
मौजूद
हैं।
संस्थान
ने
किसी
भी
आपात
स्थिति
से
प्रभावी
ढंग
से
निपटने
के
लिए
एक
विशेष
टास्क
फोर्स
का
गठन
भी
किया
है,
जिससे
कोविड
संक्रमण
की
सटीक
पहचान
संभव
है।