MP News: संतों की चार माह की घोर तपस्या सम्पन्न, नर्मदा तट के सुंदरधाम आश्रम में हुआ विष्णु महायज्ञ


नर्मदा
तट
पर
स्थित
सुंदरधाम
आश्रम,
जो
आध्यात्मिक
साधना
का
प्रमुख
केंद्र
माना
जाता
है,
वहां
बसंत
पंचमी
से
जारी
संतों
की
घोर
तपस्या
“कोठ
खप्पर
धुनी
तप”
का
विधिविधान
से
समापन
हो
गया।
यह
तपस्या
चार
महीने
तक
दिन
रात
निरंतर
चलती
रही,
जिसकी
पूर्णाहुति
श्री
विष्णु
महायज्ञ
के
साथ
सम्पन्न
हुई।


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जलते
खप्पर
और
अंगारों
के
बीच
चली
ईश्वर
आराधना

इस
विशेष
साधना
में
संतगण
अपने
सिर
पर
जलता
हुआ
खप्पर
रखकर
चारों
ओर
जलते
कंडों
के
मध्य
बैठकर
मंत्र
जाप,
ध्यान
और
परमात्मा
की
आराधना
करते
हैं।
यह
परंपरा
ब्रह्मलीन
संत
श्री
1008
सुंदरदास
जी
महाराज
द्वारा
प्रारंभ
की
गई
थी,
जिन्होंने
स्वयं
58
वर्षों
तक
यह
तप
किया
था।


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में
लू
चलने
की
संभावना


’46
वर्षों
से
निभा
रहे
हैं
परंपरा’

वर्तमान
में
इस
परंपरा
का
निर्वहन
कर
रहे
गादीपति
महामंडलेश्वर
श्री
श्री
1008
बालकदास
जी
महाराज
पिछले
46
वर्षों
से
इस
कठिन
तप
में
लीन
हैं।
बसंत
पंचमी
से
गंगा
दशहरे
तक
चलने
वाली
यह
साधना
केवल
आत्मशुद्धि
के
लिए
नहीं,
बल्कि
समस्त
विश्व
कल्याण
की
भावना
से
प्रेरित
है।


ब्रह्मचर्य,
संयम
और
अनुशासन
का
जीवंत
उदाहरण

आश्रम
के
महंत
श्री
श्री
108
नारायण
दास
जी
महाराज
ने
बताया
कि
कोठ
खप्पर
धुनी
तप
केवल
एक
आध्यात्मिक
अभ्यास
नहीं,
बल्कि
यह
सनातन
परंपरा,
ब्रह्मचर्य,
संयम
और
त्याग
का
प्रत्यक्ष
उदाहरण
है।
यह
तपस्या
हमारे
शास्त्रों
की
जीवंत
परंपरा
को
आज
भी
संजोए
हुए
है।

महंत
नारायणदास
जी
महाराज
ने
कहा,”ब्रह्मलीन
सुंदरदास
जी
महाराज
द्वारा
शुरू
की
गई
इस
परंपरा
को
आज
भी
श्रद्धा
से
बालकदास
जी
महाराज
निभा
रहे
हैं।
यह
तप
केवल
आत्मशुद्धि
नहीं,
अपितु
विश्व
शांति
का
संदेश
भी
देता
है।”


महायज्ञ
और
भजन
संध्या
से
भक्तिमय
हुआ
वातावरण

तपस्या
के
समापन
अवसर
पर
श्री
विष्णु
महायज्ञ
का
आयोजन
हुआ,
जिसमें
सैकड़ों
श्रद्धालुओं
और
संतों
ने
भाग
लिया।
पूर्णाहुति
के
बाद
प्रसादी
वितरण
किया
गया
और
भजन
संध्या
के
साथ
संपूर्ण
वातावरण
भक्तिरस
में
डूब
गया।