
राजधानी
भोपाल
के
ऐशबाग
रेलवे
क्रॉसिंग
पर
बनाए
गए
ओवर
ब्रिज
देश
भर
में
चर्चा
का
विषय
बना
हुआ
है।
90
डिग्री
के
मोड़
होने
के
कारण
हादसों
का
पॉइंट
बन
सकता
है।
इसे
बनाने
वाले
इंजीनियरों
का
कहना
है
कि
उनके
पास
इसके
अलावा
और
कोई
विकल्प
नहीं
था।
इधर
मामला
राष्ट्रीय
स्तर
का
बनने
के
बाद
पीडब्ल्यूडी
मंत्री
ने
नेशनल
हाईवे
अथॉरिटी
ऑफ
इंडिया
(एनएचएआई)
से
जांच
कराया
जिसमें
कहा
गया
है
कि
इस
ओवर
ब्रिज
पर
35-40
किमी
प्रति
घंटा
से
अधिक
गति
से
गाड़ी
नहीं
चलाया
जा
सकता
है।
इससे
अधिक
स्पीड
में
गाड़ी
चली
तो
हादसा
होने
का
खतरा
है।
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नहीं
था
कोई
दूसरा
विकल्प
उस
समय
के
कार्यपालन
यंत्री
जावेद
शकील
ने
अमर
उजाला
को
बताया
कि
ब्रिज
बनाने
से
पहले
इस
पर
चर्चा
हुई
थी
लेकिन
कोई
दूसरा
विकल्प
नहीं
था।
आस-पास
बड़ी
बिल्डिंगे
और
स्टेडियम
होने
से
कोई
अन्य
अलाइनमेंट
संभव
नहीं
था।
एनएचएआई
की
जांच
टीम
ने
भी
यही
कहा
है।
उन्होने
कहा
कि
अब
तो
मेरा
ट्रांसफर
हो
चुका
है।
इस
पर
और
अपडेट
नहीं
दे
सकते
हैं।
वहीं
चीफ
इंजीनियर
जीपी
वर्मा
ने
मामला
सुनते
ही
कहा
कि
मै
अभी
मीटिंग
में
हूं।
बात
नहीं
कर
सकता
हूं।
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लिए
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दावेदार
इन
इंजीनियरों
की
लापरवाही
से
बना
त्रिकोण
मोड़
पीडब्ल्यूडी
ब्रिज
सेक्शन
के
चीफ
इंजीनियर
जीपी
वर्मा,
कार्यपालन
यंत्री
जावेद
शकील
और
आरओबी
के
पूर्व
एसडीओ
रवि
शुक्ला
ये
तीन
इंजीनियर
इस
प्रोजेक्ट
को
लीड
कर
रहे
थे।
जिनकी
लापरवाही
की
वजह
से
देश
का
पहला
आरओबी
ऐशबाग
होगा
जिसका
त्रिकोण
मोड़
बनाया
गया।
हैरत
की
बात
यह
है
कि
गलती
उजागर
होने
से
पहले
ही
कार्यपालन
यंत्री
जावेद
शकील
का
ट्रांसफर
कर
दिया
गया
है।
वह
भी
तब
जब
कार्यपालन
यंत्री
के
रिटायरमेंट
में
मात्र
10
माह
शेष
बचे
हैं।
वहीं
एसडीओ
रवि
शुक्ला
को
डॉ.
भीमराव
आंबेडकर
ब्रिज
में
लापरवाही
के
चलते
निलंबित
किया
गया
था।
तब
शुक्ला
आरओबी
का
भी
काम
देख
रहे
थे।
मंत्री
ने
भी
नहीं
दिया
ध्यान
जानकारी
के
लिए
बतादें
कि
यह
ब्रिज
नरेला
विधान
सभा
क्षेत्र
में
आता
है।
इसलिए
मंत्री
विश्वास
सारंग
इसका
कई
बार
निरीक्षण
किया
लेकिन
उन्होने
कभी
भी
इस
ओर
ध्यान
नहीं
दिया।
आखिरी
बार
उन्होंने
दो
महीने
पहले
निरीक्षण
किया
था।
उस
दौरान
उन्होंने
15
जून
तक
प्रोजेक्ट
का
काम
पूरा
करने
की
हिदायत
पीडब्ल्यूडी
के
इंजीनियरों
को
दी
थी।
लेकिन
त्रिकोण
मोड़
को
लेकर
उन्होंने
अधिकारियों
से
कोई
सवाल-जवाब
नहीं
किए।
एनएचएआई
की
जांच
रिपोर्ट
एनएचएआई
की
जांच
टीम
ने
कहा
है
कि
क्षेत्र
में
बड़ी-बड़ी
बिल्डिंग
और
स्टेडियम
होने
से
कोई
अन्य
अलाइनमेंट
भी
संभव
नहीं
था।
छोटे
शहरों
में
ऐसे
आरओबी
बने
हैं।
इस
पर
35-40
किमी
प्रति
घंटे
से
अधिक
की
स्पीड
से
गाड़ी
नहीं
चल
सकेगी।
अब
यहां
गाड़ियों
की
गति
धीमी
करने
के
उपाय
करना
होंगे।