
मध्य
प्रदेश
लोकसभा
चुनाव
2024
–
फोटो
:
सोशल
मीडिया
विस्तार
मध्य
प्रदेश
के
लोकसभा
चुनाव
में
कई
प्रत्याशी
पहले
जिस
दल
से
विधायक
थे
अब
उसके
खिलाफ
ही
प्रतिद्वंद्वी
दल
से
टिकट
हासिल
कर
लोकसभा
का
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
एक
पार्टी
से
विधानसभा
का
प्रतिनिधित्व
करने
के
बाद
अब
ये
प्रत्याशी
अपनी
निष्ठा
बदलकर
दूसरी
पार्टी
से
मैदान
में
हैं।
इसमें
भाजपा
से
विधायक
रह
चुके
प्रत्याशी
कांग्रेस
के
टिकट
पर
चुनाव
लड़
रहे
है।
वहीं,
कांग्रेस
से
विधायक
रहे
प्रत्याशी
भाजपा
के
टिकट
पर
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
राहुल
सिंह
लोधी-
दमोह
से
भाजपा
प्रत्याशी
राहुल
सिंह
लोधी
2018
में
कांग्रेस
के
टिकट
पर
विधायक
बने।
उन्होंने
भाजपा
के
दिग्गज
नेता
व
पूर्व
मंत्री
जयंत
मलैया
को
चुनाव
में
हराया।
हालांकि,
2020
में
विधानसभा
से
इस्तीफा
देकर
वे
पाला
बदलकर
भाजपा
में
शामिल
हो
गए।
उपचुनाव
में
भाजपा
के
टिकट
पर
चुनाव
लड़े,
लेकिन
कांग्रेस
के
अजय
टंडन
से
चुनाव
हार
गए।
अब
भाजपा
ने
उनको
दमोह
से
लोकसभा
प्रत्याशी
बनाया
है।
उनका
मुकाबला
कांग्रेस
के
पूर्व
विधायक
तरवर
सिंह
लोधी
से
है।
नीलम
मिश्रा-
रीवा
से
कांग्रेस
प्रत्याशी
नीलम
मिश्रा
2013
में
भाजपा
के
टिकट
पर
रीवा
के
सेमरिया
से
विधायक
बनीं,
लेकिन
फिर
राजनीति
में
सक्रिय
नहीं
रहीं।
भाजपा
ने
2018
में
टिकट
नहीं
दिया,
इसके
बाद
नीलम
मिश्रा
ने
पति
अभय
मिश्रा
के
साथ
पार्टी
बदल
ली।
अभय
मिश्रा
वर्तमान
में
कांग्रेस
के
टिकट
पर
सेमरिया
सीट
से
विधायक
हैं।
वे
रीवा
जिले
से
कांग्रेस
के
अकेले
विधायक
हैं।
वे
विधानसभा
चुनाव
के
पहले
भाजपा
में
चले
गए
थे,
लेकिन
फिर
कांग्रेस
में
शामिल
हो
गए।
अब
उनकी
पत्नी
नीलम
मिश्रा
का
मुकाबला
वर्तमान
भाजपा
सांसद
जर्नादन
मिश्रा
से
है।
संजय
शर्मा-नर्मदापुरम
से
कांग्रेस
प्रत्याशी
संजय
शर्मा
2013
में
भाजपा
के
टिकट
पर
तेंदूखेड़ा
से
विधायक
चुने
गए।
इसके
बाद
वे
भाजपा
छोड़
कांग्रेस
में
शामिल
हो
गए।
उनको
2018
में
कांग्रेस
ने
टिकट
दिया
और
वे
जीत
कर
विधानसभा
में
पहुंचे।
संजय
शर्मा
शकर
फैक्ट्री
के
मालिक
हैं।
उनको
कद्दावर
नेता
माना
जाता
है।
अब
कांग्रेस
ने
उनको
नर्मदापुरम
संसदीय
क्षेत्र
से
प्रत्याशी
बनाया
है।
उनका
मुकाबला
भाजपा
के
दर्शन
सिंह
चौधरी
से
है।
सत्यपाल
सिकरवार-मुरैना
से
भाजपा
प्रत्याशी
सत्यपाल
सिकरवार
2013
में
सुमावली
से
भाजपा
के
विधायक
बने।
इससे
पहले
उनके
पिता
गजराज
सिंह
सिकरवार
भी
सुमावली
विधानसभा
से
विधायक
रहे।
2020
के
उपचुनाव
में
सत्यपाल
के
भाई
सतीश
सिकरवार
कांग्रेस
में
शामिल
हो
गए
और
ग्वालियर
पूर्व
सीट
से
चुनाव
लड़े।
इस
बीच
भाजपा
ने
सत्यपाल
को
पार्टी
से
निष्कासित
कर
दिया।
इसके
बाद
से
सत्यपाल
लगातार
कांग्रेस
के
लिए
सक्रिय
रहे।
अब
उनका
मुकाबला
भाजपा
के
शिवमंगल
सिंह
तोमर
से
है।