Jabalpur News: पति की मौत के बाद पिता करवाना चाहते हैं दूसरी शादी, हाईकोर्ट ने नाबालिग को फूफा को सौंपा

बाल
कल्याण
समिति
की
निगरानी
में
रहने
वाली
नाबालिग
ने
हाईकोर्ट
में
उपस्थित
होकर
बताया
गया
कि
याचिकाकर्ता
पिता
ने
12
साल
में
उसकी
शादी
कर
दी
थी।
पति
की
मौत
के
बाद
पिता
उसकी
दूसरी
शादी
करवाना
चाहते
हैं।
वह
बाल
कल्याण
समिति
अथवा
बाल
कल्याण
गृह
में
नहीं
रहना
चाहती
है
और
शादी
नहीं
करेगी।
वह
अपनी
बुआ
और
फूफा
के
साथ
रहना
चाहती
है।
हाईकोर्ट
के
कार्यवाहक
चीफ
जस्टिस
संजीव
सचदेवा
तथा
जस्टिस
विनय
सराफ
की
युगलपीठ
ने
नाबालिग
किशोरी
की
कस्टडी
एक
माह
के
लिए
फूफा
को
सौंपने
के
आदेश जारी
करते
हुए
अगली
सुनवाई
14
जुलाई
को
निर्धारित
की
है।


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रतलाम
निवासी
कालूराम
की
तरफ
से
हाईकोर्ट
को
भेजे
गए
पत्र
में
बताया
गया
था
कि
कोर्ट
के
आदेश
पर
उसकी
नाबालिग
बच्ची
को
बाल
कल्याण
समिति
भेज
दिया
गया।
अपनी
बच्ची
से
मिलने
गया
तो
वह
नहीं
मिली।
कालूराम
ने
पत्र
में
आरोप
लगाते
हुए
लिखा
था
कि
उसकी
बच्ची
को
बेच
दिया
गया
है।
आरोप
को
गंभीरता
से
लेते
हुए
चीफ
जस्टिस
के
निर्देश
पर
इस
पत्र
की
याचिका
के
रूप
में
सुनवाई
के
आदेश
जारी
किए
थे।
युगलपीठ
ने
पत्र
याचिका
के
रूप
में
मामले
की
सुनवाई
करते
हुए
नाबालिग
को
कोर्ट
में
पेश
करने
के
आदेश
जारी
किए
थे।


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विजय
शाह
के
खिलाफ
हाईकोर्ट
ने
समाप्त
की
कार्यवाही,
सुप्रीम
कोर्ट
के
आदेश
पर
लिया
निर्णय

सरकार
की
तरफ
से
बताया
गया
कि
नाबालिग
बाल
कल्याण
समिति
में
नहीं
रहना
चाहती
है।
वह
अपने
फूफा
के
साथ
रहना
चाहती
है।
बच्ची
की
कस्टडी
के
लिए
फूफा
की
तरफ
से
भी
आवेदन
दायर
किया
गया
था।
याचिका
की
सुनवाई
करते
हुए
पूर्व
में
युगलपीठ
ने
अपने
आदेश
में
कहा
था
कि
फूफा
प्राकृतिक
संरक्षक
नहीं
है,
इसलिए
उसकी
पृष्ठभूमि
को
जाने
बिना
नाबालिग
को
नहीं
सौंप
सकते।
युगलपीठ
ने
फूफा
की
आर्थिक

पारिवारिक
पृष्ठभूमि
के
संबंध
में
रिपोर्ट
पेश
करने
के
आदेश
जारी
किए
थे।
याचिका
की
सुनवाई
के
दौरान
सरकार
की
तरफ
से
फूफा
की
आर्थिक

पारिवारिक
पृष्ठभूमि
की
रिपोर्ट
पेश
की
गई।
नाबालिग
ने
युगलपीठ
के
समक्ष
उपस्थित
होकर
युक्त
जानकारी
दी।
नाबालिग
ने
याचिकाकर्ता
पिता
के
साथ
जाने
से
इंकार
कर
दिया।
सरकार
की
तरफ
से
बताया
गया
कि
फूफा
नाबालिग
की
शादी
राहुल
नामक
युवक
से
करना
चाहते
हैं।
याचिकाकर्ता
पिता
सुनवाई
के
दौरान
अनुपस्थित
नहीं
थे।
उनकी
तरफ
से
सुनवाई
बढ़ाए
जाने
के
लिए
आवेदन
पेश
किया
गया
था।

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सिंगल
क्लिक
से
वितरण

याचिका
की
सुनवाई
के
दौरान
उपस्थित
फूफा
बद्रीनाथ
ने
न्यायालय
में
वचन
दिया
कि
वह
नाबालिग
की
उचित
देखभाल
करेंगे।
विवाह
योग्य
आयु
प्राप्त
नहीं
होने
तक
वह
उसका
विवाह
नहीं
करेंगे।
युगलपीठ
ने
अपने
आदेश में
कहा
है
कि
याचिकाकर्ता
ने
स्थगन
का
अनुरोध
किया
है।
इसलिए
नाबालिग
की
कस्टडी
एक
माह
के
फूफा
को
सौंपी
जाए।
फूफा
एक
सप्ताह
में
न्यायालय
में
दिए
गए
वचन
के
संबंध
में
हलफनामा
पेश
करें।
बाल
कल्याण
विभाग
के
जिला
अधिकारी
इस
दौरान
फूफा
के
घर
का
समय-समय
पर
निरीक्षण
कर
अपनी
रिपोर्ट
पेश
करेंगे।